Monitor Lizard Hunting के एक कथित मामले ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में वन विभाग की कार्रवाई तेज कर दी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में तीन लोगों पर संरक्षित गोह यानी बंगाल मॉनिटर लिजर्ड का शिकार करने, उसे पकाने और खाने का आरोप है। वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया।
यह मामला दंतेवाड़ा के बचेली वन परिक्षेत्र के श्यामगिरी इलाके से जुड़ा बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, वीडियो में वन्यजीव को पकड़ने और उसके साथ क्रूरता करने के दृश्य दिखाई दिए। मामले की जांच के दौरान आरोपियों तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया से मिले डिजिटल सुरागों का इस्तेमाल किया गया।
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Monitor Lizard Hunting का वीडियो बना गिरफ्तारी का आधार
वन विभाग के मुताबिक, वायरल वीडियो Instagram पर साझा किया गया था। वीडियो के सामने आने के बाद अधिकारियों ने संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट की जांच शुरू की और उसमें दिखाई दे रहे सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान की।
रिपोर्ट के अनुसार, घटना करीब कुछ समय पहले की थी, लेकिन वन विभाग को इसकी जानकारी वीडियो के वायरल होने के बाद मिली। अधिकारियों ने इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की तलाश शुरू की।
मोटरसाइकिल नंबर से आरोपियों तक पहुंचा विभाग
इस मामले में सोशल मीडिया प्रोफाइल पर दिखाई दे रहा मोटरसाइकिल का रजिस्ट्रेशन नंबर वन विभाग के लिए अहम सुराग बना। इसी जानकारी की मदद से अधिकारियों ने आरोपियों का पता लगाने की दिशा में जांच आगे बढ़ाई।
इसके बाद वन विभाग और पुलिस की टीम ने दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा ब्लॉक स्थित खूंटेपाल गांव में कार्रवाई की। यहां से तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और बाद में गिरफ्तार किया गया।
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Monitor Lizard Hunting मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार
बचेली रेंजर प्रितेश पांडे के अनुसार, आरोपियों की पहचान हुंगा ओयाम (30), कोसा ओयामी (39) और नंदाराम ओयामी (36) के रूप में हुई है। तीनों दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा ब्लॉक के खूंटेपाल गांव के निवासी बताए गए हैं।
वन अधिकारियों के अनुसार, तीनों करीब एक सप्ताह पहले मवेशी चराने के लिए जंगल की ओर गए थे। इसी दौरान उनकी नजर गोह पर पड़ी। आरोप है कि उन्होंने उसे पकड़कर मार दिया और पूरी घटना का वीडियो बनाया।
बाद में यह वीडियो Instagram पर अपलोड किया गया। वीडियो के वायरल होने के बाद मामला वन विभाग की जानकारी में आया और जांच शुरू की गई। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में घटना के समय को लेकर अंतर है, इसलिए इस संबंध में अंतिम तथ्य जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।
वन विभाग ने हथियार भी किए जब्त
जांच के दौरान वन विभाग ने कथित शिकार में इस्तेमाल किए गए सामान को भी जब्त किया है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के पास से तीन बंदा हथियार और दो धनुष-बाण बरामद किए गए। इन्हें कथित शिकार में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
वीडियो में वन्यजीव को पकड़ने और उसके साथ कथित क्रूरता किए जाने के दृश्य सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। वन विभाग अब पूरे घटनाक्रम और वीडियो की सत्यता से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रहा है।
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Monitor Lizard Hunting पर Wildlife Protection Act में क्या सजा?
जिस गोह का शिकार किए जाने का आरोप है, वह बंगाल मॉनिटर लिजर्ड (Varanus bengalensis) है। भारत के मौजूदा वन्यजीव संरक्षण कानून में यह संरक्षित प्रजातियों में शामिल है। India Code में Bengal Monitor Lizard को संबंधित अनुसूची में सूचीबद्ध किया गया है।
Wild Life (Protection) Act, 1972 की धारा 9 के तहत अनुसूची I और II में निर्दिष्ट जंगली जानवरों का शिकार प्रतिबंधित है, सिवाय कानून में दिए गए विशेष अपवादों के।
कानून की धारा 51 के तहत अनुसूची I के किसी जानवर से संबंधित अपराध में तीन से सात साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, किसी आरोपी को कितनी सजा मिलेगी, यह अदालत में आरोप साबित होने और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
सोशल मीडिया पर वन्यजीव अपराध का बढ़ता खतरा
इस घटना ने सोशल मीडिया पर वन्यजीवों के शिकार से जुड़े कंटेंट को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। हाल के वर्षों में ऐसे वीडियो सामने आते रहे हैं, जिनमें संरक्षित वन्यजीवों के साथ अवैध गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया जाता है।
वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे वीडियो केवल कानून तोड़ने की जानकारी नहीं देते, बल्कि कई बार अवैध शिकार को सामान्य गतिविधि की तरह पेश करने का जोखिम भी पैदा करते हैं।
कोर्ट में पेश किए गए आरोपी
वन विभाग की कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों को गुरुवार को दंतेवाड़ा की अदालत में पेश किया गया। अधिकारियों ने उनके खिलाफ Wild Life (Protection) Act, 1972 के तहत कार्रवाई की है।
मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस और वन विभाग यह भी जांच कर रहे हैं कि कथित शिकार की घटना में और कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं तथा सोशल मीडिया पर वीडियो किस तरह और कब प्रसारित हुआ।
Monitor Lizard Hunting का यह मामला बताता है कि सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया वीडियो किसी कथित वन्यजीव अपराध की जांच में अहम डिजिटल सबूत बन सकता है। दंतेवाड़ा में वायरल वीडियो के बाद वन विभाग ने मोटरसाइकिल नंबर जैसे सुरागों के जरिए तीन आरोपियों तक पहुंच बनाई और उन्हें अदालत में पेश किया। चूंकि बंगाल मॉनिटर लिजर्ड संरक्षित वन्यजीव है, इसलिए उसके कथित शिकार पर वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत गंभीर कार्रवाई हो सकती है। मामले में अंतिम दोष और सजा अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
