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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बालोद में नवनिर्मित इंडोर स्टेडियम का किया शुभारंभ, खिलाड़ियों की प्रतिभा को सराहा

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बालोद (छत्तीसगढ़)। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज बालोद में नवनिर्मित इंडोर स्टेडियम का शुभारंभ किया और खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने इंडोर स्टेडियम पहुँचकर मलखम्ब में जिमनास्ट और योग कर रहे प्रतिभागियों के कलाकृतियों और अभ्यास को देखकर उनके हौसले की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भारत की प्राचीन विधा है। मलखम्ब से साधक मजबूत और तंदुरुस्त बनने के साथ ही तन और मन से स्वस्थ होते हैं। उन्होंने यहां प्रशिक्षण ले रहे प्रतिभागियों को अपना आशीर्वाद और शुभकामनाएं देते हुए नियमित अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रशिक्षकों को जिमनास्ट और योग की बारीकियों से अवगत कराने और इसे बढ़ावा देने का सुझाव दिया।

मुख्यमंत्री ने यहां नेशनल खिलाड़ी दीप्ति साहू, चंचल साहू, प्रेरणा साहू, करुण नायक, राजकुमार मुथाई , वीरेंद्र कुमार, उषा चौधरी से भेंट की । उन्होंने तीन सगी बहने  दीप्ति, चंचल और प्रेरणा साहू के जज्बे और हुनर की सराहना की । दीप्ति साहू नेशनल गेम में अनेक मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन किया है । इंडोर स्टेडियम में कलारी पट्टू, उशु, मुथाई, किक बॉक्सिंग, जूडो खेल का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। यह इंडोर स्टेडियम में पूर्व सैनिक सेवा संघ द्वारा निःशुल्क  प्रशिक्षण दिया जाता है। 

पूर्व सैनिक सेवा संघ के अध्यक्ष राजकुमार साहू ने बताया कि यहां अभी 70 युवाओं को सैनिक, अर्धसैनिक बल में भर्ती के लिए जरूरी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पूर्व सैनिक किशोर नाथ योगी, हेमंत मारगिया, कन्हैया लाल, उमेश साहू द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है । यहां सन 1962 और 1965 के युद्ध में अपनी वीरता का परिचय देने वाले 70 वर्षीय विमल कुमार दास युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
मलखम्ब दो शब्दों मल्ल और खंभा से मिलकर बना है। जिसका अर्थ क्रमशः जिम्नास्ट और पोल होता है।  इसका शाब्दिक अर्थ जिम्नास्ट पोल है । जिम्नास्ट द्वारा उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक प्रशिक्षण के लिए उपयोग किया जाता है । मलखम्ब की उत्पत्ति 12 वीं शताब्दी में भारत के महाराष्ट्र राज्य में हुई थी । मलखम्ब एक ऐसा खेल है, जो पूरे शरीर को व्यायाम और कसरत करा कर स्वस्थ रखता है। यह जितना आसान दिखता है, वास्तव में इतना आसान नहीं होता है। इसके लिए मांसपेशियों में ताकत होनी चाहिए। इसको सीखने के लिए बहुत मेहनत व लगन की आवश्यकता होती है। मलखम्ब एक ऐसा खेल है, जिसमें एक सीधा खंभा होता है, जिस पर चढ़कर योग के साथ जिम्नास्ट भी किया जाता है। यह भारत के पुराने खेलों में से एक है। मलखम्ब के खंभे को शीशम और सहवान की लकड़ी से बनाया जाता है। जिसके ऊपर तेल लगाया जाता है। इसके बाद इसको जमीन में गाड़ दिया जाता है, और फिर कलाकृति की जाती है।