Dongargarh BJP Resignation छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ से सामने आया बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शहर मंडल के 111 कार्यकर्ताओं ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वालों में बूथ अध्यक्ष, पूर्व पार्षद, पूर्व पदाधिकारी और लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ता शामिल हैं। सभी इस्तीफे भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत को भेजे गए हैं। इसे उनके कार्यकाल के दौरान सामने आया सबसे बड़ा संगठनात्मक असंतोष माना जा रहा है।
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Dongargarh BJP Resignation: क्या है पूरा मामला?
इस्तीफा देने वाले कार्यकर्ताओं ने अपने पत्र में शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नोतआना पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि संगठन में परिवारवाद, गुटबाजी और समर्पित कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे लोगों को जिम्मेदारियों से दूर रखा जा रहा है, जबकि कुछ चुनिंदा लोगों को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है।
हालांकि, यह आरोप इस्तीफा देने वाले कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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Dongargarh BJP Resignation: ‘दबाव में लिए जा रहे फैसले’ का आरोप
इस्तीफा पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि मंडल अध्यक्ष अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से नहीं लेते।
कार्यकर्ताओं के अनुसार, पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रामजी भारती तथा शहर के कुछ प्रभावशाली व्यापारिक नेताओं के दबाव में संगठनात्मक फैसले लिए जा रहे हैं।
इसके अलावा आरोप लगाया गया कि कुछ व्यक्तियों को एक से अधिक पद दिलाने की अनुशंसा की गई, जबकि लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियों से वंचित रखा गया।
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युवा मोर्चा अध्यक्ष की नियुक्ति पर भी उठे सवाल
असंतुष्ट कार्यकर्ताओं ने हाल ही में भाजपा युवा मोर्चा के शहर अध्यक्ष पद पर आकाश सिंह राजपूत की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं।
उनका आरोप है कि आकाश सिंह राजपूत, भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत के रिश्तेदार हैं और संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका उल्लेखनीय नहीं रही, इसके बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे संगठन में परिवारवाद की धारणा और मजबूत हुई है।
दो वर्षों से चल रही थी अंदरूनी खींचतान
जानकारी के अनुसार, डोंगरगढ़ भाजपा में पिछले करीब दो वर्षों से संगठनात्मक असंतोष बना हुआ था।
मंडल अध्यक्ष बनने के बाद कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं। पूर्व विधायक विनोद खांडेकर समर्थक नेताओं की अनदेखी और संगठनात्मक निर्णयों को लेकर भी समय-समय पर विवाद की बातें सामने आईं।
हाल ही में सोशल मीडिया पर संगठन की कार्यशैली का विरोध करने के आरोप में पूर्व भाजयुमो अध्यक्ष प्रिंस सिंह कक्कड़, पूर्व मंडल महामंत्री संतोष राव, पूर्व सांसद प्रतिनिधि परविंदर सिंह मोंटी और पूर्व मंडल मंत्री वीरेंद्र साहू को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
नोटिस की कार्रवाई पूरी होने से पहले ही अब 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे ने भाजपा संगठन में हलचल तेज कर दी है।
भाजपा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
Dongargarh BJP Resignation मामले में लगाए गए सभी आरोप इस्तीफा देने वाले कार्यकर्ताओं के हैं।
अब तक शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नोतआना, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष रामजी भारती, भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत या भाजपा संगठन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।
यदि संबंधित पक्ष की ओर से कोई बयान या स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
Dongargarh BJP Resignation ने डोंगरगढ़ भाजपा की आंतरिक राजनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे, परिवारवाद और गुटबाजी के आरोपों ने संगठन में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, फिलहाल ये आरोप केवल इस्तीफा देने वाले कार्यकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं और संबंधित नेताओं की आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।
