Cheeni Satyagraha को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी ने बढ़ती महंगाई और चीनी की कीमतों में तेज वृद्धि के विरोध में यह अभियान चलाने की घोषणा की है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस महंगाई से परेशान लोगों के साथ खड़ी रहेगी।
दीपक बैज ने इस आंदोलन की तुलना महात्मा गांधी के ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह नमक आम लोगों की जरूरत से जुड़ा मुद्दा था, उसी तरह चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी भी आम परिवारों के बजट को प्रभावित कर रही है।
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Cheeni Satyagraha: महंगाई पर सरकार को घेरा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि सरकार को चीनी की कीमतों में संभावित वृद्धि की जानकारी तीन से चार महीने पहले ही थी। इसके बावजूद उनके अनुसार, कीमतों को नियंत्रित करने के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
बैज ने दावा किया कि महंगाई के जरिए सरकार ने जनता से करीब 36 हजार करोड़ रुपये एकत्र किए हैं। हालांकि, यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक आरोप है और इसे सरकारी आंकड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस ने कहा कि रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर मध्यम वर्ग, गरीब और निम्न आय वाले परिवारों पर पड़ता है। ऐसे में पार्टी इसे जनता से जुड़े मुद्दे के रूप में राज्यभर में उठाने की तैयारी कर रही है।
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गांधी के नमक सत्याग्रह से तुलना
दीपक बैज ने Cheeni Satyagraha को महात्मा गांधी के नमक मार्च से जोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस का आंदोलन आम लोगों की समस्याओं को केंद्र में रखकर किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पार्टी बढ़ती कीमतों के खिलाफ जनता की आवाज बनेगी। कांग्रेस के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य सरकार पर महंगाई से राहत देने के लिए दबाव बनाना और आम लोगों के मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाना है।
Cheeni Satyagraha में एथेनॉल का मुद्दा
चीनी की कीमतों को लेकर कांग्रेस ने गन्ने के इस्तेमाल और एथेनॉल उत्पादन का मुद्दा भी उठाया। बैज ने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर गन्ने को एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़े जाने से घरेलू चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई और इससे खुदरा कीमतों पर दबाव बढ़ा।
भारत सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ाने की नीति अपनाई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, किसानों को लाभ पहुंचाना और उत्सर्जन घटाना है। (mopng.gov.in)
बैज ने एथेनॉल-मिश्रित ईंधन को लेकर भी वाहन संबंधी समस्याओं का दावा किया। इन दावों पर सरकार या संबंधित तकनीकी संस्थाओं की प्रतिक्रिया को इस रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है।
UCC को लेकर भी कांग्रेस का विरोध
चीनी की कीमतों के मुद्दे के साथ कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भी अपना विरोध दोहराया।
दीपक बैज ने दावा किया कि UCC से आदिवासी समुदायों की परंपराओं, अधिकारों और स्वायत्तता पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आदिवासी समुदायों के संवैधानिक संरक्षण और कल्याण से जुड़े मुद्दों पर समझौता नहीं करेगी।
छत्तीसगढ़ की बड़ी आदिवासी आबादी और अलग-अलग पारंपरिक सामाजिक व्यवस्थाओं को देखते हुए कांग्रेस ने इस मुद्दे को भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया है।
आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
कांग्रेस का कहना है कि आदिवासी समुदायों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और उनकी पारंपरिक व्यवस्थाओं की रक्षा जरूरी है। पार्टी ने कहा कि वह ऐसे किसी भी कदम का विरोध करेगी जिससे इन समुदायों के अधिकार और स्वायत्तता प्रभावित होने की आशंका हो।
UCC को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी रही है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस इसे अपने आगामी राजनीतिक अभियानों का हिस्सा बनाने की तैयारी कर रही है।
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Cheeni Satyagraha के लिए तैयारियां तेज
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के मुताबिक, Cheeni Satyagraha शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आने वाले दिनों में इसे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित किए जाने की योजना है।
पार्टी का फोकस चीनी की कीमत, महंगाई और आम लोगों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को आंदोलन का मुख्य मुद्दा बनाने पर है। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को अभियान से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
Cheeni Satyagraha के जरिए छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने महंगाई और चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह की तर्ज पर जनता से जुड़े मुद्दे का आंदोलन बताया है। कांग्रेस ने चीनी की उपलब्धता, गन्ने के एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल और महंगाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। साथ ही UCC और आदिवासी अधिकारों का मुद्दा भी उठाया गया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्यभर में Cheeni Satyagraha किस तरह आकार लेता है और सरकार की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है।
