रायपुर, 28 जुलाई 2026। Malaria Death Kanker मामले में छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने उत्तर बस्तर कांकेर जिले में मलेरिया से संबंधित दो बच्चों की मृत्यु के मामलों पर विस्तृत जानकारी जारी की है। विभाग के अनुसार दोनों मामलों में समय-समय पर जांच, उपचार, दवा वितरण, रेफरल और संबंधित क्षेत्रों में मलेरिया सर्वेक्षण की कार्रवाई की गई। विभाग ने यह भी बताया कि 22 जुलाई को मलेरिया मुक्त अभियान के दौरान दोनों प्रभावित क्षेत्रों में की गई जांच में संबंधित रिपोर्ट निगेटिव पाई गई थी।
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Malaria Death Kanker: पहले मामले में क्या हुआ?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पहला मामला सुभाष कुमेटी (10 वर्ष) का है, जो ग्राम डुडेरापाल, विकासखंड केशकाल, जिला कोंडागांव का निवासी था और बालक आश्रम मर्दापोटी में रहकर पढ़ाई कर रहा था।
21 जुलाई को आश्रम के दो बच्चों की तबीयत खराब होने पर उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। आरडी किट जांच में दोनों बच्चों में पीएफआर (Plasmodium falciparum) संक्रमण की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने तत्काल एसीटी (ACT) और प्राइमाक्वीन की पहली खुराक दी।
22 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आश्रम के 46 बच्चों की जांच की। इसमें दो अन्य बच्चे पीएफआर पॉजिटिव पाए गए, जिन्हें आवश्यक दवा उपलब्ध कराई गई। इसी दौरान किए गए आरएफएस (Reactive Fever Survey) में सुभाष कुमेटी की रिपोर्ट निगेटिव रही।
इसके बाद 24 जुलाई को सुभाष की तबीयत दोबारा खराब होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच की गई, जहां वह पीएफआर पॉजिटिव पाया गया। पहली दवा देने के बाद शेष दवाएं आश्रम अधीक्षक को उपलब्ध कराई गईं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 25 जुलाई की सुबह बच्चे के परिजन उसे अपने गांव डुडेरापाल ले गए। अगले दिन तड़के उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कांकेर में भर्ती कराया गया, जहां 26 जुलाई की सुबह उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
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Malaria Death Kanker: दूसरे मामले में तीन बच्चियां मिलीं पॉजिटिव
दूसरा मामला ग्राम डोमाहर्रा, विकासखंड कांकेर का है। यहां निवासी तीजाराम विश्वकर्मा अपनी तीन बेटियों—रवीना (11 वर्ष), सलीना (5 वर्ष) और करीना (9 वर्ष)—को 23 जुलाई को बुखार की शिकायत होने पर आयुष्मान आरोग्य मंदिर, डोमाहर्रा लेकर पहुंचे।
आरडी किट जांच में तीनों बच्चियां पीएफआर पॉजिटिव पाई गईं। स्वास्थ्य कर्मचारियों ने तत्काल एसीटी और प्राइमाक्वीन की पहली खुराक दी तथा शेष दवाएं परिजनों को उपलब्ध कराईं। उसी दिन उनके घर के आसपास आरएफएस सर्वे भी किया गया।
24 जुलाई को बच्चों के पिता की पहली जांच निगेटिव रही, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने पर उन्हें 108 एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनेलीकन्हार भेजा गया। तीनों बच्चियों को भी वहां भर्ती किया गया।
बाद में तीजाराम की दोबारा जांच में पीएफआर संक्रमण की पुष्टि हुई और उपचार शुरू किया गया। इसी बीच करीना विश्वकर्मा की तबीयत अचानक गंभीर हो गई, जिसके बाद उसे मेडिकल कॉलेज कांकेर रेफर किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उपचार के दौरान 25 जुलाई को उसकी मृत्यु हो गई।
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मलेरिया मुक्त अभियान के तहत की गई जांच
Malaria Death Kanker मामले पर स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि 22 जुलाई को संचालित मलेरिया मुक्त अभियान के तहत दोनों प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक जांच अभियान चलाया गया था।
विभाग के अनुसार उस दौरान संबंधित क्षेत्रों में जांच रिपोर्ट निगेटिव पाई गई थी। इसके बावजूद बुखार की शिकायत मिलने पर तत्काल जांच, दवा वितरण और जरूरत पड़ने पर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर करने की प्रक्रिया अपनाई गई।
स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाने के दिए निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जिले में बुखार के प्रत्येक मामले की पहचान, त्वरित जांच और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।
इसके साथ ही स्वास्थ्य टीमों को लगातार निगरानी, मलेरिया जांच, दवा वितरण और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सर्वेक्षण जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि संक्रमण की रोकथाम प्रभावी ढंग से की जा सके।
Malaria Death Kanker मामले में स्वास्थ्य विभाग ने दोनों बच्चों की मृत्यु से जुड़े घटनाक्रम, जांच, उपचार और रेफरल की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की है। विभाग का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया मुक्त अभियान के तहत जांच, निगरानी और उपचार की प्रक्रिया लगातार जारी है। साथ ही बुखार के प्रत्येक मामले में शीघ्र जांच और समय पर इलाज सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। Malaria Death Kanker से जुड़े मामलों ने समय पर जांच, उपचार और सतत निगरानी की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है।
