Kerala Street Vendors को लेकर एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केरल में सड़क किनारे सामान बेचने वाले फेरीवालों को हमलों, बेदखली और प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इन कार्रवाइयों से बड़ी संख्या में स्ट्रीट वेंडर्स की आजीविका प्रभावित हो रही है। हालांकि, इस संबंध में राज्य सरकार या संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों का पक्ष रिपोर्ट में शामिल नहीं है।
मुख्य बिंदु
- रिपोर्ट में फेरीवालों पर कार्रवाई और बेदखली के आरोप।
- लगभग 5.5 लाख स्ट्रीट वेंडर्स की आजीविका प्रभावित होने का दावा।
- बिना नोटिस हटाने और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं करने के आरोप।
- स्ट्रीट वेंडर्स (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act, 2014 का हवाला।
- पूर्व एलडीएफ सरकार की योजनाओं का उल्लेख।
- स्ट्रीट वेंडर्स फेडरेशन ने कार्रवाई पर चिंता जताई।
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Kerala Street Vendors पर रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है?
रिपोर्ट के अनुसार, केरल में नई सरकार बनने के बाद सड़क किनारे सामान बेचने वाले फेरीवालों को लगातार हटाए जाने और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कई स्थानों पर बिना पूर्व सूचना के एक्सकेवेटर की मदद से वेंडिंग स्थलों को हटाया गया।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि जिन स्थानों पर कुछ फेरीवाले दशकों से व्यवसाय कर रहे थे, वहां से भी उन्हें बेदखल किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में कानून के तहत 30 दिन का नोटिस देने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
Kerala Street Vendors और स्ट्रीट वेंडर्स कानून
रिपोर्ट में Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act, 2014 का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, किसी भी स्ट्रीट वेंडर को हटाने से पहले सर्वे, वेंडिंग ज़ोन का निर्धारण तथा अन्य निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाना आवश्यक है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन कानूनी प्रावधानों का कई स्थानों पर पालन नहीं किया गया और प्रशासन ने सीधे कार्रवाई की।
किन घटनाओं का किया गया उल्लेख?
रिपोर्ट में तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, कन्नूर, मुन्नार सहित कई स्थानीय निकायों में स्ट्रीट वेंडर्स को हटाने की घटनाओं का उल्लेख किया गया है।
एक मामले में कोल्लम में 75 वर्षीय लॉटरी विक्रेता के साथ पुलिस द्वारा कथित दुर्व्यवहार का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में इसे कानून के उल्लंघन के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
पूर्व एलडीएफ सरकार की योजनाओं का भी जिक्र
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2016 से 2026 के बीच एलडीएफ सरकार ने स्ट्रीट वेंडर्स के संरक्षण के लिए कई कदम उठाए थे।
इनमें वर्ष 2018 में राज्य स्तर पर कानून लागू करना, 2019 में योजना शुरू करना, पहचान पत्र एवं लाइसेंस जारी करना, शहरी व्यापार समितियों का गठन तथा पंचायत स्तर पर सर्वे कराना शामिल बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत निवारण एवं विवाद समाधान समिति का गठन भी किया गया था ताकि स्ट्रीट वेंडर्स अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अपील कर सकें।
स्ट्रीट वेंडर्स फेडरेशन का दावा
रिपोर्ट में स्ट्रीट वेंडर्स फेडरेशन के राज्य अध्यक्ष डॉ. के.एस. प्रदीप के हवाले से कहा गया है कि वर्तमान समय में फेरीवालों को पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, उनका दावा है कि पूर्व सरकार के दौरान कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती थी, जबकि वर्तमान स्थिति अलग है।
विवाद के बीच क्या है कानूनी स्थिति?
स्ट्रीट वेंडर्स से जुड़े मामलों में Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act, 2014 लागू होता है। इस कानून का उद्देश्य फेरीवालों की आजीविका की रक्षा करना और नियमन के साथ उन्हें काम करने का अधिकार देना है।
हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित सरकारी पक्ष या प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
Kerala Street Vendors को लेकर सामने आई इस रिपोर्ट में फेरीवालों की बेदखली, कथित कानूनी उल्लंघन और आजीविका पर संकट जैसे गंभीर दावे किए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर राज्य सरकार या संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। ऐसे मामलों में तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
