क्लास 8 की किताब में ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ चैप्टर पर बवाल — CJI बोले “साजिश है”, 2.25 लाख कॉपियां वापस — 5 बड़े खुलासे

NCERT Textbook Controversy ने पूरे देश में शिक्षा जगत और न्यायपालिका को हिलाकर रख दिया है। क्लास 8 की सोशल साइंस की नई टेक्स्टबुक में ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ (Corruption in the Judiciary) का Topic जोड़े जाने पर जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है।

NCERT ने बुधवार को इस मामले पर अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी और माना कि विवादित चैप्टर में गलत सामग्री अनजाने में शामिल हो गई।

संस्था ने न्यायपालिका के प्रति पूरे सम्मान का इजहार करते हुए उस चैप्टर को दोबारा लिखने का आश्वासन दिया।

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किस किताब में है विवादित चैप्टर? — NCERT Textbook Controversy की पूरी डिटेल

किताब का नाम और रिलीज डेट

विवादित किताब का नाम है — ‘Exploring Society: India and Beyond, Volume II’

यह NCERT द्वारा 24 फरवरी 2026 को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए जारी की गई थी।

इस किताब का पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया जा चुका था।

यह किताब Academic Session 2026-27 से स्कूलों में पढ़ाई जानी थी।

विवादित चैप्टर कौन सा है?

किताब के चैप्टर नंबर 4‘The Role of the Judiciary in Our Society’ — के अंतर्गत एक Topic जोड़ा गया था — ‘Corruption in the Judiciary’।

इसी Topic ने पूरे देश में NCERT Textbook Controversy को जन्म दिया।


NCERT Textbook Controversy: ज्यूडीशियरी से जुड़े विवादित पॉइंट्स — क्या-क्या लिखा था किताब में?

किताब में दर्ज थे ये 8 विवादित तथ्य

NCERT की इस किताब में न्यायपालिका को लेकर जो बातें लिखी गई थीं, वे इस प्रकार थीं:

1. करप्शन और चुनौतियां: किताब में लिखा था कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले और जजों की भारी कमी ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं।

2. जज और Code of Conduct: करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया था कि जज एक Code of Conduct से बंधे होते हैं जो कोर्ट के अंदर और बाहर दोनों जगह उनके व्यवहार को नियंत्रित करता है।

3. CPGRAMS System: किताब में Centralised Public Grievance Redress and Monitoring System (CPGRAMS) के जरिए शिकायतें दर्ज करने की व्यवस्था बताई गई थी। साथ ही यह भी लिखा था कि 2017-2021 के बीच 1,600 से अधिक शिकायतें इस सिस्टम के जरिए मिली थीं।

4. Judge को हटाने की प्रक्रिया: किताब में संवैधानिक प्रावधान बताया गया था कि Parliament Impeachment Motion पास करके जज को पद से हटा सकती है।

5. Impeachment की प्रक्रिया: बच्चों को बताया गया था कि ऐसे मोशन पर उचित जांच के बाद ही विचार होता है और जज को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है।

6. गरीबों की न्याय तक पहुंच: चैप्टर में लिखा था — “लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का सामना करते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच की समस्या और बिगड़ सकती है।”

7. Transparency की कोशिशें: किताब में यह भी बताया गया था कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट मजबूत करने के लिए प्रयासरत हैं — जिसमें Technology का उपयोग और करप्शन मामलों में Fast Action शामिल है।

8. पूर्व CJI बीआर गवई का संदर्भ: किताब में पूर्व Chief Justice of India बीआर गवई का उल्लेख था जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार के मामले पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर डालते हैं।

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CJI सूर्यकांत की कड़ी चेतावनी — “यह साजिश है, मैं खुद इस केस को हैंडल करूंगा”

Supreme Court में क्या हुआ?

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने CJI सूर्यकांत, Justice Vipul M. Pancholi और Justice Joymalya Bagchi की Bench के सामने यह मामला उठाया।

सिब्बल ने कहा कि “क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है — यह निंदनीय है।”

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यह भी कहा कि NCERT ने मान लिया है जैसे राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और अन्य संस्थानों में भ्रष्टाचार है ही नहीं — सिर्फ न्यायपालिका को ही निशाना बनाया गया।

CJI का ऐतिहासिक बयान

CJI सूर्यकांत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा —

“दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह एक सोची-समझी और गहरी साजिश लगती है। मुझे पता है इससे कैसे निपटना है। मैं यह केस खुद हैंडल करूंगा।”

यह बयान इस पूरे NCERT Textbook Controversy को एक नई और गंभीर दिशा देता है।

🔗 External Link: Supreme Court of India — Official Website


NCERT का आधिकारिक बयान — “गलती अनजाने में हुई, अफसोस है, चैप्टर दोबारा लिखा जाएगा”

NCERT का पूरा आधिकारिक रुख

NCERT ने अपने आधिकारिक बयान में कहा —

“तय प्रक्रिया के अनुसार 24 फरवरी को क्लास 8 के लिए सोशल साइंस की टेक्स्टबुक जारी की गई। टेक्स्टबुक मिलने पर देखा गया कि कुछ गलत सामग्री अनजाने में चैप्टर नंबर 4 में आ गई।”

शिक्षा मंत्रालय ने भी यही अवलोकन किया और निर्देश दिया कि अगले आदेश तक इस किताब का वितरण पूरी तरह बंद किया जाए।

NCERT ने क्या वादा किया?

  • विवादित चैप्टर को सही अथॉरिटी से सलाह लेकर दोबारा लिखा जाएगा।
  • संशोधित Chapter Academic Session 2026-27 के शुरू होने पर क्लास 8 के छात्रों को उपलब्ध कराया जाएगा।
  • NCERT ने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी Constitutional Body के अधिकार पर सवाल उठाने का कोई इरादा नहीं था।
  • नई टेक्स्टबुक्स का मकसद संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करना और छात्रों में Literacy, Institutional Respect और Democratic Participation की समझ विकसित करना था।

2.25 लाख कॉपियां छपीं — सिर्फ 38 बिकीं, अब सभी वापस मंगाई जा रही हैं

किताब की छपाई और वापसी के आंकड़े

विवरणसंख्या
कुल छपी कॉपियां2,25,000
बाजार में बिकी कॉपियांसिर्फ 38
गोदाम में मौजूद कॉपियां2,24,962
वापस मंगाई गई कॉपियां2,24,962 (गोदाम से)
अभी ढूंढी जा रही कॉपियां38 (बाजार में बिकी)

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, बाजार में बिकी 38 कॉपियों को ढूंढकर वापस लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।

NCERT की वेबसाइट पर भी यह किताब अब उपलब्ध नहीं है।

ऑफलाइन बिक्री भी मंगलवार 24 फरवरी से ही बंद कर दी गई थी।


पूर्व CJI बीआर गवई का जिक्र — NCERT Textbook Controversy में एक और पहलू

किताब में क्या था पूर्व CJI का हवाला?

NCERT Textbook Controversy का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि किताब में पूर्व Chief Justice of India बीआर गवई का संदर्भ भी दिया गया था।

पूर्व CJI गवई ने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर भ्रष्टाचार और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है।

उन्होंने यह भी कहा था — “इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता तेज, निर्णायक और Transparent Action में है… Transparency और Accountability Democratic गुण हैं।”

यहां उठता है सवाल

अगर पूर्व CJI खुद ट्रांसपेरेंसी और जवाबदेही की बात कर चुके हैं, तो उनके ही बयान को किताब में उद्धृत करना कहां तक उचित या अनुचित था — यह अब एक बड़ा अकादमिक और न्यायिक प्रश्न बन गया है।


NEP 2020 और NCF के तहत तैयार हो रही हैं सभी NCERT किताबें

बदलाव का बड़ा संदर्भ

यह NCERT Textbook Controversy एक बड़े बदलाव की प्रक्रिया के बीच सामने आई है।

NCERT ने National Curriculum Framework (NCF) और National Education Policy 2020 (NEP-2020) के तहत सभी Classes की नई किताबें तैयार की हैं।

Covid-19 महामारी के बाद पुरानी किताबों के Topics बदलकर नए Topics जोड़े जा रहे हैं।

Class 1 से Class 8 तक की नई किताबें 2025 में ही Published हो चुकी हैं।

इसी प्रक्रिया में जब Exploring Society: India and Beyond Part 2 तैयार की गई, तब इस विवादित चैप्टर ने NCERT Textbook Controversy को जन्म दिया।

🔗 External Link: NCERT Official Website — National Council of Educational Research and Training


NCERT Textbook Controversy ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत में शिक्षा से जुड़े फैसले न केवल अकादमिक बल्कि संवैधानिक और न्यायिक संवेदनशीलता के दायरे में आते हैं। CJI सूर्यकांत की “यह साजिश है” वाली टिप्पणी, NCERT की माफी, 2.25 लाख कॉपियों की वापसी और चैप्टर को दोबारा लिखने का वादा — ये सब मिलकर इस मामले की गंभीरता को उजागर करते हैं।

अब देखना होगा कि Academic Session 2026-27 में जब संशोधित चैप्टर आएगा, तो NCERT किस प्रकार न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाते हुए बच्चों को सही जानकारी देता है। इस NCERT Textbook Controversy की हर अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

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