Raipur News में इस बार एक ऐसी कहानी आई है जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं – और जो इंसानी हौसले और चिकित्सा विज्ञान की ताकत का जीवंत प्रमाण है। महासमुंद के एक 32 वर्षीय युवक के साथ हुई एक दुर्घटना ने उसे मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया, लेकिन AIIMS रायपुर के डॉक्टरों ने एक असाधारण सर्जरी से उसे नई जिंदगी दे दी।
निर्माणाधीन इमारत से गिरने के बाद युवक की 20 से अधिक पसलियां टूट चुकी थीं और उसका डायफ्राम (diaphragm) फट गया था। इससे उसके लीवर, आंत और आमाशय जैसे अंग अपनी जगह छोड़कर सीने में पहुंच गए थे।
Raipur News: निर्माण स्थल से गिरा युवक – शुरू हुई जिंदगी और मौत की जंग
Raipur News के इस मामले की शुरुआत 22 फरवरी को हुई जब महासमुंद का यह युवक एक निर्माणाधीन इमारत से गिर गया। हादसे के तुरंत बाद वह बाहरी रूप से बिल्कुल सामान्य दिख रहा था – न कोई घाव, न कोई खून, और वह पूरी तरह होश में था।
यही सबसे बड़ा धोखा था। शरीर पर बाहरी चोट का कोई निशान न होने के कारण उसकी अंदरूनी चोटों की गंभीरता का शुरुआत में अंदाजा ही नहीं लगाया जा सका।
बाहर से सामान्य, अंदर से तबाह – देर से खुला खतरनाक राज
अगले दिन 23 फरवरी को युवक को सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ शुरू हुई। वह स्थानीय सरकारी अस्पताल पहुंचा, जहां प्राथमिक उपचार देकर उसे घर भेज दिया गया।
जब दर्द लगातार बढ़ता रहा, तो 24 फरवरी को निजी अस्पताल में CT Scan कराया गया। रिपोर्ट ने डॉक्टरों को चौंका दिया – अंदरूनी चोटें इतनी गंभीर थीं कि तुरंत AIIMS रायपुर रेफर करना पड़ा।
AIIMS रायपुर आधिकारिक वेबसाइट: https://www.aiimsraipur.edu.in
Raipur News: AIIMS में जांच ने उड़ाए होश
Raipur News में यह खबर इसलिए और भी चौंकाने वाली है क्योंकि AIIMS में विस्तृत जांच के बाद जो तस्वीर सामने आई वह बेहद भयावह थी।
जांच में पाया गया कि युवक के बाईं ओर के डायफ्राम में 7 से 8 सेंटीमीटर का बड़ा छेद हो गया था। यह परत सीने और पेट को अलग करती है – इसके फटने से लीवर, आंत और आमाशय सब सीने की गुहा में खिसक गए थे।
इसके अलावा युवक की रीढ़ की हड्डी और हाथ-पैरों में भी फ्रैक्चर पाए गए। स्थिति की गंभीरता देखते हुए बिना देर किए तत्काल सर्जरी का फैसला लिया गया।
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पांच घंटे की जटिल थोरैको-एब्डोमिनल सर्जरी
Raipur News के इस मामले का सबसे अहम अध्याय है वह पांच घंटे की जटिल सर्जरी जिसने युवक को जिंदगी लौटाई।
डॉ. राधाकृष्ण रामचंदानी की टीम ने किया असंभव को संभव
डॉ. राधाकृष्ण रामचंदानी के नेतृत्व में AIIMS के सर्जरी विभाग की टीम ने एक अत्यंत जटिल थोरैको-एब्डोमिनल (Thoraco-Abdominal) चीरा लगाया। इस विधि में छाती और पेट को एक साथ खोलकर ऑपरेशन किया जाता है – यह सर्जरी तकनीकी रूप से बेहद कठिन होती है।
सर्जरी के चार अहम चरण
पहले चरण में सीने में पहुंचे आंत, लीवर और आमाशय को अत्यंत सावधानी से वापस पेट में उनकी सही स्थिति में स्थापित किया गया।
दूसरे चरण में अंदरूनी रक्तस्राव को नियंत्रित कर जमा खून को साफ किया गया, ताकि संक्रमण का खतरा न रहे।
तीसरे चरण में डायफ्राम के फटे हिस्से को एक विशेष मेडिकल जाली (Mesh) की मदद से मजबूती से सिला गया – यह सबसे नाजुक और महत्वपूर्ण कदम था।
चौथे और अंतिम चरण में सीने में जमा हवा और तरल पदार्थ निकालने के लिए ड्रेनेज ट्यूब डाली गई, जिससे फेफड़ों पर दबाव कम हो सके।
Raipur News: ICU में 15 दिन और निमोनिया से जंग
सर्जरी की सफलता के बाद की चुनौती कम नहीं थी। Raipur News के इस मामले में पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही।
ऑपरेशन के बाद युवक को डॉ. चिन्मय पांडा की निगरानी में ICU में रखा गया। 20 से अधिक टूटी पसलियों के कारण हर सांस लेने पर असहनीय दर्द होता था।
इस स्थिति में सामान्य रूप से सांस न ले पाने के कारण निमोनिया का गंभीर खतरा था। डॉक्टरों ने इससे बचाव के लिए 15 दिनों तक लगातार दर्द निवारक दवाएं दीं, जिससे युवक सामान्य रूप से सांस लेता रहा और फेफड़ों में संक्रमण नहीं हुआ।
बेहतर पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल और चिकित्सा दल की सतर्कता के चलते युवक पूरी तरह स्वस्थ होकर घर वापस लौट गया।
AIIMS प्रशासन की सराहना
AIIMS रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने इस जटिल और समय-संवेदनशील सर्जरी के लिए पूरी मेडिकल टीम की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि Raipur News में इस तरह के मामले AIIMS रायपुर की उच्च चिकित्सीय क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। सही समय पर सही निर्णय और कुशल सर्जरी ने एक युवा जिंदगी को बचाया।
Raipur News में यह कहानी सिर्फ एक सर्जरी की खबर नहीं है – यह जिंदगी की जीत की दास्तान है। एक युवक जिसे बाहर से कोई चोट नहीं थी, अंदर से पूरी तरह टूट चुका था। लेकिन AIIMS रायपुर के डॉ. राधाकृष्ण रामचंदानी और उनकी टीम ने पांच घंटे की अथक मेहनत से उसे मौत के मुंह से वापस खींच लिया। यह Raipur News हर उस मरीज और परिवार के लिए उम्मीद की किरण है जो जटिल चिकित्सा संकट का सामना कर रहे हैं। AIIMS रायपुर एक बार फिर साबित हुआ – जहां विज्ञान और समर्पण मिलते हैं, वहां चमत्कार होते हैं।
