Dates Supply Crisis की आशंका ने छत्तीसगढ़ के व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है। मध्य-पूर्व में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के बाजारों तक पहुंचने लगा है। खासकर रमजान के पवित्र महीने में खजूर और अन्य ड्राय फ्रूट की मांग बहुत बढ़ जाती है।
रायपुर और छत्तीसगढ़ के कई बड़े बाजारों के व्यापारियों का कहना है कि फिलहाल उनके पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसलिए इस महीने और अगले महीने तक मांग पूरी होने की उम्मीद है। लेकिन अगर मध्य-पूर्व में युद्ध लंबा चलता है, तो आने वाले समय में खजूर और ड्राय फ्रूट की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है।
Dates Supply Crisis: मध्य-पूर्व तनाव से प्रभावित व्यापार
Dates Supply Crisis की चर्चा इसलिए बढ़ रही है क्योंकि भारत में खजूर और कई ड्राय फ्रूट मुख्य रूप से मध्य-पूर्व के देशों से आते हैं। इनमें खास तौर पर ईरान, कुवैत और कतर प्रमुख आपूर्तिकर्ता माने जाते हैं।
रायपुर के प्रमुख व्यापारी नदीम खान ने बताया कि हर साल रमजान से पहले व्यापारियों द्वारा खजूर और अन्य ड्राय फ्रूट का पर्याप्त स्टॉक मंगाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस बार भी व्यापारियों ने पहले ही माल आयात कर लिया था। इसलिए मार्च और अप्रैल महीने तक बाजार की मांग पूरी हो सकती है।
उन्होंने बताया कि आम तौर पर खजूर और ड्राय फ्रूट पहले समुद्री मार्ग से भारत पहुंचते हैं। इसके बाद महाराष्ट्र के रास्ते सड़क मार्ग से छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में भेजे जाते हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर युद्ध की स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है, तो आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। इससे व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
व्यापारियों का कहना है कि रमजान के दौरान लोग खास तौर पर ईरान और कुवैत के खजूर ज्यादा पसंद करते हैं। ये खजूर मुलायम और स्वाद में बेहतर माने जाते हैं।
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भारत में खजूर के आयात के बारे में अधिक जानकारी:
https://en.wikipedia.org/wiki/Date_palm

रमजान और खजूर की बढ़ती मांग
रमजान इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने में रोजा रखने वाले लोग सूर्यास्त के बाद रोजा खोलते समय सबसे पहले खजूर खाना पसंद करते हैं।
धार्मिक परंपरा के अनुसार रोजा खोलते समय खजूर खाने की परंपरा काफी पुरानी है। इसलिए रमजान के दौरान खजूर की मांग अचानक बढ़ जाती है।
छत्तीसगढ़ में भी रमजान के समय रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और अन्य शहरों के बाजारों में खजूर और ड्राय फ्रूट की बिक्री काफी बढ़ जाती है।
खजूर के अलावा अंजीर, केसर और अन्य ड्राय फ्रूट भी बड़ी मात्रा में ईरान से आयात किए जाते हैं। लेकिन वर्तमान युद्ध जैसी स्थिति आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
ऊर्जा और व्यापार पर वैश्विक तनाव के प्रभाव के बारे में अधिक जानकारी:
https://www.iea.org/topics/energy-security
Key Facts about Dates Supply Crisis
- भारत और छत्तीसगढ़ में खजूर मुख्य रूप से ईरान, कुवैत और कतर से आते हैं।
- रमजान से पहले व्यापारियों ने पर्याप्त स्टॉक आयात कर लिया है।
- मार्च और अप्रैल महीने तक मांग पूरी होने की संभावना है।
- युद्ध लंबा चला तो खजूर और ड्राय फ्रूट की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- राज्य में करीब 550 व्यापारी सीधे इस व्यापार से जुड़े हैं।
प्रतिक्रियाएं
Dates Supply Crisis की आशंका ने व्यापारियों के साथ-साथ ग्राहकों को भी चिंतित कर दिया है। रायपुर के एक अन्य व्यापारी आकाश खंडेलवाल ने बताया कि पूरे छत्तीसगढ़ में करीब 550 व्यापारी इस कारोबार से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ती हैं, तो इससे व्यापार पर गंभीर असर पड़ेगा। कई छोटे व्यापारी आर्थिक संकट में आ सकते हैं।
दूसरी ओर ग्राहक भी चिंतित हैं कि अगर युद्ध की स्थिति जारी रही, तो रमजान के बाद खजूर और ड्राय फ्रूट महंगे हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संघर्ष का असर अक्सर स्थानीय बाजारों पर भी पड़ता है। इसलिए व्यापारियों को आने वाले महीनों के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत भी तलाशने पड़ सकते हैं।
कुल मिलाकर Dates Supply Crisis की आशंका फिलहाल भविष्य की चिंता के रूप में सामने आई है। अभी व्यापारियों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और रमजान के दौरान बाजार की मांग पूरी होने की उम्मीद है।
लेकिन अगर मध्य-पूर्व में तनाव और युद्ध की स्थिति लंबी चलती है, तो खजूर और अन्य ड्राय फ्रूट की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। इसलिए आने वाले महीनों में Dates Supply Crisis छत्तीसगढ़ के बाजारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
