Women Collectors के मामले में छत्तीसगढ़ ने अगस्त 2026 में नया रिकॉर्ड बनाया है। राज्य के 33 जिलों में अब 12 जिलों की कमान महिला IAS अधिकारियों के हाथों में है। यानी करीब 36 प्रतिशत जिलों का प्रशासन महिला अधिकारियों के नेतृत्व में चल रहा है। यह पहली बार है जब राज्य में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं जिला कलेक्टर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
राज्य सरकार की ओर से मई 2026 में किए गए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद महिला कलेक्टरों की संख्या 10 तक पहुंची थी। अब दो और नियुक्तियों के साथ यह आंकड़ा 12 हो गया है। इसे प्रशासन में महिला नेतृत्व और जिम्मेदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
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Women Collectors की संख्या पहुंची 12
छत्तीसगढ़ में कुल 33 जिले हैं। इनमें 12 जिलों में महिला अधिकारियों के कलेक्टर होने का मतलब है कि हर तीन में से लगभग एक जिले की जिला प्रशासनिक कमान महिलाओं के पास है।
मौजूदा सूची में नुपुर राशि पन्ना कोंडागांव, प्रतिष्ठा ममगाई बेमेतरा, नम्रता जैन नारायणपुर, रेना जमील सूरजपुर और दिव्या मिश्रा बालोद की कलेक्टर हैं। इसके अलावा जयश्री जैन सक्ती, तुलिका प्रजापति कबीरधाम और पद्मिनी भोई सारंगढ़-बिलाईगढ़ की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
Women Collectors में ये नाम भी शामिल
महिला कलेक्टरों की सूची में तानुजा सलाम मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, चंदन त्रिपाठी बलरामपुर-रामानुजगंज, संतन देवी जांगड़े मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और रोक्तिमा यादव कोरिया जिले की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
सरकारी जिला वेबसाइट भी नुपुर राशि पन्ना को कोंडागांव की कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के रूप में दर्ज करती है।
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महिला IAS अधिकारियों को चुनौतीपूर्ण जिलों की जिम्मेदारी
Women Collectors की बढ़ती संख्या का महत्व केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इन अधिकारियों को ऐसे जिलों में भी जिम्मेदारी दी गई है, जहां भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियां अधिक हैं।
नारायणपुर, कोंडागांव, सूरजपुर, बलरामपुर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जैसे जिलों में महिला अधिकारियों की तैनाती यह संकेत देती है कि उन्हें केवल पारंपरिक या अपेक्षाकृत आसान जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रखा गया है।
कलेक्टर जिला प्रशासन का सबसे प्रमुख चेहरा होता है। राजस्व व्यवस्था, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, विकास कार्य, आपदा प्रबंधन और जिला स्तर पर कानून-व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण समन्वय में कलेक्टर की बड़ी भूमिका होती है।
Women Collectors से महिला नेतृत्व को मिला नया संदेश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महिला अधिकारियों को 12 जिलों की कमान मिलने को महिला सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत कदम बताया है। उनका कहना है कि जब बेटियां महिलाओं को महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर काम करते हुए देखती हैं, तो उनमें बड़े सपने देखने और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास बढ़ता है।
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब राज्य सरकार महिलाओं से जुड़े मुद्दों और योजनाओं को अपनी प्रशासनिक प्राथमिकताओं में प्रमुखता दे रही है। इसी क्रम में सरकार इस वर्ष को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में भी देख रही है।
प्रशासन में बढ़ रही महिला भागीदारी
राज्य की IAS कैडर में महिलाओं की संख्या कुल अधिकारियों की तुलना में करीब एक चौथाई बताई जा रही है। इसके बावजूद महत्वपूर्ण फील्ड पोस्टिंग में उनकी मौजूदगी लगातार बढ़ रही है।
मई में हुए प्रशासनिक फेरबदल ने भी इस बदलाव को स्पष्ट किया था। उस समय कई जिलों में महिला IAS अधिकारियों को कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई थी। बाद की नियुक्तियों ने इस रुझान को और मजबूत किया है।
[Link: छत्तीसगढ़ में IAS अधिकारियों के तबादले से जुड़ी खबर]
प्रशासनिक मजबूती और जवाबदेही पर फोकस
महिला अधिकारियों को अधिक जिलों की कमान मिलने से प्रशासन में नेतृत्व की विविधता बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही अधिकारियों को अलग-अलग सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों में काम करने का अवसर भी मिल रहा है।
सरकार के लिए यह व्यवस्था केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि फील्ड प्रशासन में बेहतर डिलीवरी, जवाबदेही और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से भी जुड़ी है।
[Link: छत्तीसगढ़ की प्रमुख सरकारी योजनाओं से जुड़ी खबर]
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में Women Collectors की संख्या 12 तक पहुंचना प्रशासनिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 33 में से 12 जिलों की कमान महिला IAS अधिकारियों के हाथों में होना बताता है कि महिला नेतृत्व अब राज्य की फील्ड एडमिनिस्ट्रेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में इन अधिकारियों के प्रदर्शन और प्रशासनिक परिणामों पर नजर रहेगी।
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