Cyber Fraud के एक मामले में उत्तराखंड की नैनीताल पुलिस ने मुखानी क्षेत्र के भगवानपुर स्थित हिम्मतपुर तल्ला निवासी राहुल बिष्ट के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई गृह मंत्रालय के निर्देश पर हुई जांच के बाद 18 अगस्त 2026 की देर रात की गई। जांच में सामने आया कि आरोपी का बैंक खाता कथित तौर पर म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया गया था।
मामला छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के नेहरू नगर निवासी राजेश कुमार चौरसिया से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक, राजेश से कुल 2.90 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई थी। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
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Cyber Fraud मामले में ऐसे खुला राज
एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल के अनुसार, साइबर ठगी की शिकायत की जांच के दौरान गृह मंत्रालय के पोर्टल पर संदिग्ध बैंक खाते से जुड़ी गतिविधियां सामने आईं।
जांच को आगे बढ़ाते हुए नैनीताल पुलिस ने संबंधित बैंक खाते की जानकारी जुटाई। जांच में पता चला कि यह खाता कथित तौर पर म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था।
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल दूसरे लोगों से प्राप्त संदिग्ध या ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में खाते के वास्तविक धारक की भूमिका और उसकी जानकारी की स्थिति जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
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छत्तीसगढ़ के पीड़ित से हुई 2.90 लाख की ठगी
पुलिस के मुताबिक, राजेश कुमार चौरसिया ने साइबर अपराध की शिकायत छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज कराई थी। शिकायत में 2.90 लाख रुपये की आर्थिक धोखाधड़ी की जानकारी दी गई थी।
जांच के दौरान जिस बैंक खाते पर पुलिस की नजर गई, वह राहुल बिष्ट के नाम पर था। पुलिस ने खाते में हुए लेनदेन का रिकॉर्ड भी खंगाला।
मामले में अभी पुलिस जांच जारी है। इसलिए आरोपी की भूमिका और साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क से उसके संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
Cyber Fraud में बैंक खाते से दो लेनदेन
जांच में सामने आया कि राहुल बिष्ट के बैंक खाते से अप्रैल और मई 2026 में दो महत्वपूर्ण लेनदेन हुए थे।
पुलिस के अनुसार, 14 अप्रैल 2026 को 1.40 लाख रुपये का लेनदेन हुआ, जबकि 6 मई 2026 को 1.50 लाख रुपये का लेनदेन दर्ज किया गया। दोनों लेनदेन की कुल राशि 2.90 लाख रुपये है।
इन लेनदेन को साइबर ठगी की शिकायत से जोड़कर जांच की जा रही है। पुलिस बैंकिंग रिकॉर्ड, लेनदेन की दिशा और खाते के इस्तेमाल से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
गृह मंत्रालय के निर्देश पर हुई जांच
यह मामला गृह मंत्रालय से जुड़े साइबर अपराध निगरानी तंत्र के जरिए सामने आया। शिकायत और संदिग्ध बैंक खाते की जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया।
साइबर अपराधों में ठगी की रकम कई अलग-अलग बैंक खातों में भेजे जाने के मामले सामने आते हैं। ऐसे में पुलिस के लिए रकम के लेनदेन की पूरी कड़ी का पता लगाना अहम होता है।
राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी इसी तरह के मामलों में नागरिकों को रिपोर्टिंग का माध्यम उपलब्ध कराती है।
पुलिस खंगाल रही लेनदेन की पूरी कड़ी
नैनीताल पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि राहुल बिष्ट का बैंक खाता किस तरह और किन लोगों के संपर्क में इस्तेमाल हुआ। इसके साथ ही कथित साइबर ठगी की रकम खाते तक कैसे पहुंची और आगे कहां गई, इसकी भी जांच महत्वपूर्ण होगी।
पुलिस की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि बैंक खाते के धारक की भूमिका क्या थी और इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं।
साइबर अपराध से बचने के लिए लोगों को अनजान लिंक, कॉल, मैसेज और संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन से सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित बैंक और आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल को देनी चाहिए।
Cyber Fraud के इस मामले में 2.90 लाख रुपये की ठगी और कथित म्यूल अकाउंट के इस्तेमाल ने जांच को गंभीर बना दिया है। नैनीताल पुलिस ने बैंक खाते के आधार पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब लेनदेन की पूरी कड़ी और आरोपी की वास्तविक भूमिका सामने आना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की तस्वीर स्पष्ट होगी।
