Smart Electricity Meter को लेकर छत्तीसगढ़ में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम, बिलासपुर समेत कई जिलों में उपभोक्ताओं ने स्मार्ट बिजली मीटर लगाने के बाद बिजली बिलों में भारी वृद्धि का आरोप लगाया है। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। विपक्षी कांग्रेस ने राज्यभर में Smart Electricity Meter और हालिया बिजली दर वृद्धि के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की है। वहीं, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि स्मार्ट मीटर वास्तविक बिजली खपत के आधार पर ही बिल तैयार करते हैं।
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Smart Electricity Meter को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
कई उपभोक्ताओं का दावा है कि Smart Electricity Meter लगने के बाद उनके बिजली बिल दोगुने या तीन गुना तक बढ़ गए हैं।
लोगों का कहना है कि पहले जहां मासिक बिजली बिल ₹1,800 से ₹2,000 के बीच आता था, वहीं अब यह काफी अधिक हो गया है। इससे मध्यमवर्गीय और सामान्य परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।
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रायपुर से सामने आया सबसे चर्चित मामला
रायपुर में एक बंद और खाली फ्लैट का मामला सबसे अधिक चर्चा में रहा।
उपभोक्ता के अनुसार, फ्लैट में कोई नहीं रहता था, फिर भी मई में ₹15,500 और जून में ₹32,000 का बिजली बिल जारी कर दिया गया।
हालांकि शिकायत मिलने के बाद CSPDCL ने जांच की और बिल में हुई त्रुटि को सुधारते हुए अंतिम बिल ₹26 कर दिया।
इसके अलावा रायपुर के एक अन्य उपभोक्ता ने उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि बिना स्पष्ट सहमति के Smart Electricity Meter लगाया गया, जिसके बाद बिजली बिल बढ़ गए। यह मामला अभी विचाराधीन है।
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कबीरधाम में लोगों ने उतार दिए स्मार्ट मीटर
कबीरधाम जिले में विरोध प्रदर्शन और अधिक तीखा देखने को मिला।
कई लोगों ने अपने घरों से Smart Electricity Meter निकालकर बिजली विभाग के कार्यालय में जमा कर दिए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि विभाग सार्वजनिक रूप से बताए कि स्मार्ट मीटर कैसे काम करते हैं और बिजली बिलों में वृद्धि की वजह क्या है।
कांग्रेस ने राज्यव्यापी आंदोलन का किया ऐलान
बढ़ते विरोध के बीच कांग्रेस ने पूरे छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर और हाल ही में बढ़ी बिजली दरों के खिलाफ आंदोलन करने की घोषणा की है।
विपक्ष का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लागू करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और आम उपभोक्ताओं की शिकायतों का समय पर समाधान नहीं किया जा रहा।
Smart Electricity Meter पर CSPDCL ने क्या कहा?
CSPDCL ने स्मार्ट मीटरों में किसी भी प्रकार की तकनीकी गड़बड़ी से इनकार किया है।
बिजली कंपनी का कहना है कि Smart Electricity Meter केवल वास्तविक बिजली खपत को रिकॉर्ड करते हैं और बिजली उपयोग को बढ़ाकर नहीं दिखाते।
कंपनी के अनुसार, स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ता अपनी बिजली खपत पर बेहतर निगरानी रख पा रहे हैं, जिससे बिजली बचाने में भी मदद मिल रही है।
3.11 लाख उपभोक्ताओं की बिजली खपत में 28% कमी का दावा
CSPDCL के अनुसार, रायपुर के 3.11 लाख घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली खपत जून और जुलाई 2026 के दौरान 10.85 करोड़ यूनिट से घटकर 7.77 करोड़ यूनिट रह गई, जो लगभग 28% की कमी है।
कंपनी का दावा है कि यह स्मार्ट मीटर प्रणाली के प्रभावी उपयोग का परिणाम है।
₹1.11 लाख के बिल वाले मामले पर भी दी सफाई
कबीरधाम जिले के बोडला ब्लॉक के सिल्हाटी गांव निवासी तिलक राम चंद्रवंशी ने आरोप लगाया था कि सोलर प्लांट लगाने के बाद उन्हें ₹1,11,650 का बिजली बिल मिला।
CSPDCL की उच्चस्तरीय जांच में पाया गया कि संबंधित उपभोक्ता के नाम पर न तो रूफटॉप सोलर सिस्टम लगा था और न ही Smart Electricity Meter स्थापित था।
कंपनी के अनुसार, अधिक बिजली खपत और पिछले पांच महीनों के बकाया के कारण बिल बढ़ा था। इसका स्मार्ट मीटर या सोलर प्लांट से कोई संबंध नहीं था।
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Smart Electricity Meter को लेकर छत्तीसगढ़ में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर उपभोक्ता बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर विरोध कर रहे हैं, तो दूसरी ओर CSPDCL सभी आरोपों को निराधार बताते हुए स्मार्ट मीटरों को सटीक और पारदर्शी प्रणाली बता रही है। अब यह मुद्दा राजनीतिक रंग भी ले चुका है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट, उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे और सरकार के फैसले इस विवाद की दिशा तय करेंगे।
