RTI Training के तहत दुर्ग संभाग के सभी 7 जिलों के जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स को सूचना का अधिकार अधिनियम की बारीकियों और आवेदन के समयबद्ध निराकरण की जानकारी दी गई। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग, नवा रायपुर के तत्वावधान और दुर्ग संभाग आयुक्त सत्य नारायण राठौर के निर्देशन में यह दो दिवसीय प्रशिक्षण 20 और 21 अगस्त 2026 को आयोजित हुआ।
प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन क्षेत्रीय संचालक, कृषि प्रसार एवं प्रशिक्षण संस्थान, रूआबांधा भिलाई के सभागार में किया गया। इसका उद्देश्य जिला स्तर पर RTI कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स तैयार करना था।
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RTI Training में 7 जिलों के मास्टर ट्रेनर्स शामिल
दुर्ग संभाग के सभी सात जिलों से जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स ने कार्यशाला में भाग लिया। प्रत्येक जिले से चार प्रतिभागी प्रशिक्षण में शामिल हुए। इस तरह कुल 28 प्रशिक्षणार्थियों ने दो दिवसीय कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यशाला में प्रशिक्षणार्थियों ने सूचना का अधिकार अधिनियम से जुड़े विभिन्न प्रावधानों, आवेदन प्रक्रिया और अधिकारियों की जिम्मेदारियों को समझा। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के स्टाफ ऑफिसर अतुल वर्मा और दुर्ग संभाग के उपायुक्त पीएल यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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RTI Training में आवेदन की समयसीमा पर जोर
स्टाफ ऑफिसर अतुल वर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को RTI के तहत प्राप्त आवेदनों के समयसीमा में निराकरण के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आवेदनों का निर्धारित समय में निष्पादन करना महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण के दौरान आवेदन प्रक्रिया से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
अतुल वर्मा ने जन सूचना अधिकारी यानी PIO और प्रथम अपीलीय अधिकारी के कर्तव्यों को अधिनियम की धाराओं के आधार पर समझाया। प्रशिक्षणार्थियों की ओर से पूछी गई शंकाओं का भी समाधान किया गया।
PIO और प्रथम अपीलीय अधिकारी की भूमिका समझी
RTI Training में जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों को अधिनियम के तहत अपनी जिम्मेदारियों और प्रक्रिया की जानकारी होना जरूरी बताया गया।
उपायुक्त पीएल यादव ने प्रशिक्षणार्थियों को RTI अधिनियम में उल्लेखित प्रावधानों को सूक्ष्मता और सजगता से समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कानून की धाराओं का नियमित अध्ययन करते रहने पर भी जोर दिया।
इससे जिला स्तर पर RTI से संबंधित मामलों के निपटारे में प्रक्रिया की स्पष्टता और बेहतर समन्वय विकसित होने की उम्मीद है।
RTI Online Portal की प्रक्रिया भी बताई
प्रशिक्षण में केवल अधिनियम की धाराओं की जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि RTI से जुड़े व्यावहारिक कार्यों को भी समझाया गया।
राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स केके शुक्ला, सहायक संचालक, आरके चंद्रवंशी, सहायक संचालक और जेपी पाण्डेय, प्राचार्य ने विभिन्न विषयों पर जानकारी दी।
इनमें सूचना का प्रकटन, प्राप्त RTI आवेदनों का निष्पादन, RTI Online Portal पर पंजीयन, आवेदनों के समयसीमा में निराकरण और शुल्क प्राप्ति जैसे विषय शामिल रहे।
छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर सूचना का अधिकार और आयोग से संबंधित जानकारी उपलब्ध है। वहीं RTI Online Portal के माध्यम से केंद्र सरकार के सार्वजनिक प्राधिकरणों से संबंधित ऑनलाइन RTI सेवाओं की जानकारी ली जा सकती है।
RTI Training से जिला स्तर पर व्यवस्था होगी मजबूत
जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करने का उद्देश्य यह है कि वे अपने-अपने जिलों में RTI अधिनियम की प्रक्रिया और प्रावधानों को बेहतर तरीके से समझा सकें।
प्रशिक्षण में आवेदन प्राप्त होने से लेकर उसके निराकरण तक की प्रक्रिया पर जोर दिया गया। साथ ही अधिकारियों के कर्तव्यों और सूचना के प्रकटन से जुड़े प्रावधानों को भी स्पष्ट किया गया।
इस तरह की कार्यशालाएं अधिकारियों और कर्मचारियों में RTI कानून की समझ को मजबूत करने में उपयोगी हो सकती हैं।
प्रशिक्षण में सक्रिय रहे सभी प्रतिभागी
दो दिवसीय कार्यशाला में दुर्ग संभाग के सातों जिलों से आए प्रशिक्षणार्थियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने RTI अधिनियम से जुड़े विषयों पर जानकारी प्राप्त करने के साथ अपनी शंकाएं भी रखीं।
अधिकारियों और राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स ने प्रतिभागियों को अधिनियम के प्रावधानों को नियमित रूप से पढ़ने और समझने के लिए प्रेरित किया।
दुर्ग संभाग में आयोजित RTI Training का उद्देश्य सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों की क्षमता बढ़ाना रहा। सात जिलों से 28 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण लिया, जिसमें RTI आवेदन के समयबद्ध निराकरण, PIO और प्रथम अपीलीय अधिकारी की जिम्मेदारी, सूचना प्रकटन, शुल्क और ऑनलाइन पोर्टल जैसी प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। इससे संभाग में RTI मामलों के बेहतर और व्यवस्थित निराकरण की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
