PACS Computerization को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने सहकारी समितियों में डिजिटल व्यवस्था को तेज करने पर जोर दिया है। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने 19 अगस्त 2026 को बिलासपुर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में बैठक लेकर बैंक के कामकाज और किसानों के हित में संचालित योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को समय पर ऋण और अन्य सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा।
PACS यानी प्राथमिक कृषि साख समितियों के कंप्यूटरीकरण से कामकाज में पारदर्शिता बढ़ने और किसानों को डिजिटल सेवाएं आसानी से मिलने की उम्मीद है। इसके साथ कम या ब्याज मुक्त फसल ऋण की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित हो सकती है।
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किसानों को 904 करोड़ से अधिक का ऋण
बैठक में वर्ष 2026 में किसानों को दिए गए ऋण की जानकारी भी सामने आई। अधिकारियों के अनुसार किसानों को 73,207.17 लाख रुपये का नगद ऋण और 17,273.35 लाख रुपये का वस्तु ऋण वितरित किया गया है।
इस तरह किसानों को कुल 904 करोड़ 80 लाख रुपये से अधिक की ऋण सुविधा उपलब्ध कराई गई। मंत्री ने ऋण वितरण की समीक्षा करते हुए पात्र किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने और सहकारी बैंक की सेवाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
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PACS Computerization 31 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य
बैठक में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई। कुछ समितियों में डेटा एंट्री का काम अभी पूरा नहीं हुआ है।
इस पर मंत्री केदार कश्यप ने सभी पैक्स में डेटा एंट्री और PACS Computerization का काम 31 अगस्त 2026 तक 100 प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कंप्यूटरीकरण पूरा होने के बाद समितियों के कामकाज को डिजिटल तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी। इससे रिकॉर्ड प्रबंधन और किसानों तक सेवाओं की पहुंच को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।
PACS Computerization से किसानों को क्या फायदा?
पैक्स के कंप्यूटरीकरण से किसानों को सहकारी संस्थाओं से मिलने वाली सेवाओं में आसानी होने की उम्मीद है। डिजिटल रिकॉर्ड से लेन-देन और ऋण संबंधी जानकारी को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा पात्र किसानों तक फसल ऋण और अन्य सहकारी सेवाएं समय पर पहुंचाने की प्रक्रिया को भी मजबूत किया जा सकता है।
47 नई समितियों में विकसित होंगी सुविधाएं
सहकारिता मंत्री ने बताया कि पांच जिलों में 47 नई सहकारी समितियां खोली गई हैं। इनमें अकेले बिलासपुर जिले में 16 समितियां शामिल हैं।
मंत्री ने इन सभी नई समितियों में आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं मिलने से किसानों को सहकारी सेवाओं का बेहतर लाभ मिल सकेगा।
बैठक में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष रजनीश सिंह, उपाध्यक्ष रजनी साहू, मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मिश्रा और नोडल अधिकारी आशीष दुबे सहित सहकारिता विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
सहकार से समृद्धि योजना की समीक्षा
बैठक में ‘सहकार से समृद्धि’ योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने सहकारिता के माध्यम से किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
कॉमन सर्विस सेंटर की स्थिति की समीक्षा करते हुए सभी केंद्रों में आईडी बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही अन्न भंडारण योजना के शत-प्रतिशत और समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया।
अधूरे गोदामों के निर्माण कार्यों की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को इन्हें जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए, ताकि किसानों और सहकारी समितियों के हित में इनका इस्तेमाल किया जा सके।
भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर सहकारी क्षेत्र से संबंधित योजनाओं और नीतियों की जानकारी उपलब्ध है। सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार
किसान क्रेडिट कार्ड पर भी जोर
मंत्री ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिक से अधिक पात्र किसानों को इससे जोड़ने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार और अभियान चलाने के निर्देश दिए।
किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से पात्र किसानों को कृषि गतिविधियों के लिए समय पर ऋण सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। मंत्री ने अधिकारियों से इसकी पहुंच बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने को कहा।
इसके अलावा ऋण वितरण समितियों की स्थिति, वर्तमान और लंबित अल्पकालीन कृषि ऋण, ब्याज अनुदान तथा माइक्रो एटीएम की उपलब्धता और संचालन की भी समीक्षा हुई।
किसानों की शिकायतों के समयबद्ध समाधान पर जोर
बैठक में सीएम हेल्पलाइन से संबंधित लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को शिकायतों का समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सहकारिता विभाग की सेवाओं का लाभ किसानों को बिना अनावश्यक परेशानी के आसानी से मिलना चाहिए। PACS और सहकारी बैंकों की व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया गया।
कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड से संबंधित केंद्र सरकार की आधिकारिक जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार पर उपलब्ध है।
PACS Computerization को 31 अगस्त तक पूरा करने के निर्देश से छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों की डिजिटल व्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है। 904 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण वितरण, 47 नई समितियों में सुविधाओं के विस्तार और किसान क्रेडिट कार्ड की पहुंच बढ़ाने पर सरकार का फोकस है। यदि कंप्यूटरीकरण समय पर पूरा होता है, तो किसानों को ऋण, रिकॉर्ड और अन्य सहकारी सेवाएं अधिक पारदर्शी और सुगम तरीके से मिल सकती हैं।
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