Tiger Poaching का गंभीर मामला छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व से सामने आया है। तीन बाघों की हत्या और उनकी खाल बरामद होने के बाद वन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से जांच कराने की मांग की है।
वन मंत्री केदार कश्यप की ओर से इस संबंध में राज्य के गृह विभाग को प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। विभागीय दस्तावेज के अनुसार, मामला केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं दिख रहा है और जांच में महाराष्ट्र से जुड़े लोगों तथा संभावित अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के संकेत मिले हैं।
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CBI जांच की मांग क्यों उठी?
वन विभाग के अनुसार, मामले की संवेदनशीलता और संभावित नेटवर्क की व्यापकता को देखते हुए सामान्य वन अपराध जांच के बजाय केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की जरूरत महसूस हुई।
विभागीय संचार में यह भी आशंका जताई गई है कि गिरोह के संपर्क अन्य राज्यों तक हो सकते हैं। इसके अलावा इंद्रावती नदी और आसपास के दुर्गम वन क्षेत्र का इस्तेमाल राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी के लिए किए जाने की संभावना की भी जांच की जा रही है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI जांच के प्रस्ताव को मंजूरी दी। हालांकि, CBI जांच आगे किस प्रक्रिया से शुरू होगी, यह संबंधित सरकारी मंजूरियों और औपचारिक कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
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Tiger Poaching केस में अब तक क्या हुआ
मामले की शुरुआत 29 जून को हुई, जब वन अधिकारियों को सूचना मिली कि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से दो व्यक्ति छत्तीसगढ़ की ओर बाघ की खाल लेकर जा रहे हैं।
बांदे-पखांजूर मार्ग पर संयुक्त एंटी-पोचिंग टीम ने देर रात दोनों संदिग्धों को रोककर तलाशी ली। उनके पास से दो बाघों की खाल, 13 मूंछें, एक मोटरसाइकिल और अन्य सामग्री बरामद होने की जानकारी सामने आई।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गढ़चिरौली जिले के अहेरी निवासी बिजेश्वर गेडाम और गढ़हेरिया निवासी बाबूराव मड़ावी के रूप में बताई गई है। दोनों को 30 जून को भानुप्रतापपुर की अदालत में पेश किया गया था।
महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े लोगों के नाम
इस मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक बिजेश्वर गेडाम के बारे में विभागीय दस्तावेज में उसे गढ़चिरौली पुलिस की स्पेशल ब्रांच के इंटेलिजेंस सेल से जुड़ा कांस्टेबल बताया गया है।
दूसरे आरोपी बाबूराव मड़ावी को गढ़चिरौली पुलिस से जुड़े एक गोपनीय मुखबिर के रूप में बताया गया है। हालांकि, आरोपियों की भूमिका और नेटवर्क से उनके वास्तविक संबंधों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
Tiger Poaching की जांच इंद्रावती तक पहुंची
पूछताछ के बाद जांच टीम ने छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा क्षेत्र में अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाई। इंद्रावती नदी के नजदीक नेतिवाड़ा गांव में संदिग्धों के घरों की तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान शिकार में इस्तेमाल होने वाले जाल, चाकू, 12 पंजे और चार कैनाइन दांत समेत अन्य सामग्री मिलने की जानकारी दी गई है।
इसके बाद 5 जुलाई को इंद्रावती नदी के पास छिपाकर रखी गई तीसरी बाघ की खाल बरामद की गई। इसके बाद इंद्रावती टाइगर रिजर्व में एक और वन अपराध दर्ज किया गया और सात अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इस तरह मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या नौ तक पहुंच गई। उपलब्ध विभागीय विवरण के अनुसार इनमें चार आरोपी महाराष्ट्र और पांच बीजापुर जिले से बताए गए हैं।
400 किमी के वन्यजीव कॉरिडोर पर चिंता
यह मामला केवल तीन बाघों की हत्या तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जांच में जिस क्षेत्र का उल्लेख सामने आया है, वह मध्य भारत के महत्वपूर्ण वन्यजीव परिदृश्य का हिस्सा है।
इंद्रावती, अबूझमाड़ और गढ़चिरौली के वन क्षेत्र महाराष्ट्र, दक्षिणी छत्तीसगढ़ और आगे ओडिशा की ओर जुड़े व्यापक वन क्षेत्र का हिस्सा हैं। इस पूरे क्षेत्र को बड़े वन्यजीवों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
जांच से जुड़े विवरण में गढ़चिरौली, इंद्रावती, अबूझमाड़, उदंती-सीतानदी और ओडिशा के सुनाबेड़ा क्षेत्र को जोड़ने वाले करीब 400 किलोमीटर के वन्यजीव कॉरिडोर का भी उल्लेख है।
वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की जांच
वन्यजीव तस्करी का नेटवर्क अंतरराज्यीय सीमाओं तक फैला हो तो उसकी जांच में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हो जाता है। केंद्र सरकार का वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) संगठित वन्यजीव अपराध से निपटने और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए वैधानिक संस्था है।
इसी वजह से इस Tiger Poaching मामले की संभावित व्यापकता को देखते हुए केंद्रीय स्तर की जांच की मांग महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और बरामद सामग्री के आधार पर नेटवर्क की आगे की कड़ियां तलाशना जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती है।
भारत में बाघों और अन्य संरक्षित वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। केंद्र सरकार भी टाइगर रिजर्व में एंटी-पोचिंग गतिविधियों को मजबूत करने के लिए राज्यों को सहायता देती है।
Tiger Poaching का इंद्रावती मामला तीन बाघों की हत्या से आगे बढ़कर संभावित अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की ओर संकेत कर रहा है। नौ आरोपियों की गिरफ्तारी, तीन बाघों की खाल की बरामदगी और महाराष्ट्र से जुड़े संदिग्धों के नाम सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। अब प्रस्तावित CBI जांच पर आगे की कार्रवाई और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। बाघों के संरक्षण और इंद्रावती जैसे संवेदनशील वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष और गहन जांच बेहद महत्वपूर्ण होगी।
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