Nari Shakti Vandan Adhiniyam भारत की संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाला एक ऐतिहासिक विधेयक है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने लोकसभा में पेश किया था। यह विधेयक देश की आधी आबादी को नीति-निर्धारण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था।
लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के कारण यह अधिनियम उस रूप में लागू नहीं हो सका, जिसकी उम्मीद करोड़ों भारतीय महिलाओं को थी। इसी मुद्दे पर छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक बड़ी प्रेस वार्ता आयोजित की गई।
संदीप शर्मा ने दुर्ग में प्रेस वार्ता में क्या कहा?
दुर्ग जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य खाद आयोग के अध्यक्ष श्री संदीप शर्मा ने कहा कि भारतीय सभ्यता के हजारों सालों के इतिहास के साथ ही भारत लोकतंत्र की जननी है।
उन्होंने कहा कि देश के पास इस सफर में एक नया पहलू जोड़ने का सुनहरा मौका था। Nari Shakti Vandan Adhiniyam देश की आधी आबादी को लोकतंत्र के मंदिर तक पहुंचाने का एक महायज्ञ था — लेकिन स्वार्थी विपक्ष ने इस यज्ञ को अधूरा छोड़ दिया।
“हमारी दादी ने इंतजार किया, माताओं ने उम्मीद रखी” — संदीप शर्मा
श्री शर्मा ने भावुक होते हुए कहा कि हमारी दादी ने इसका इंतजार किया था। हमारी माताओं ने इसकी उम्मीद की थी। हमारी बहन-बेटियों ने इस ऐतिहासिक क्षण का इंतजार किया था।
लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने मिलकर एक बार फिर देश की बेटियों को निराश किया। उन्होंने कहा कि यह सीटों का मामला नहीं, यह भारतीय घर की इज्जत का मामला है जो आखिरकार लोकतंत्र के मंदिर तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी।
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Nari Shakti Vandan Adhiniyam को विपक्ष ने क्यों रोका?
Nari Shakti Vandan Adhiniyam के विरोध पर श्री संदीप शर्मा ने तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्ष ने अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की बेचैनी में इंडि अलायन्स ने महिलाओं के हितों को एक बार फिर दरकिनार कर दिया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इस बिल का हमेशा समर्थन करने का दिखावा किया, लेकिन हर बार “लेकिन” के साथ। जब भी विधेयक पारित होने की नौबत आई, तो वे तकनीकी बहाने ढूंढने लगे और समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश की।
विपक्ष का महिला-विरोधी चरित्र — शर्मा का सीधा आरोप
संदीप शर्मा ने कहा कि विपक्ष ने जो किया है, वह देश के सबसे ऊँचे पदों पर बैठी महिलाओं के लिए अपनी नफरत और तिरस्कार को सबके सामने ला दिया है।
उनके अनुसार, विपक्ष की यह सोच शीर्ष नेतृत्व में नीति-निर्धारण की भूमिकाओं में महिलाओं की काबिलियत पर शक करती है। यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि एक गहरी महिला-विरोधी मानसिकता का प्रमाण है।
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30 साल की देरी — कांग्रेस का महिला-विरोधी इतिहास
श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने पारंपरिक रूप से हमेशा एक महिला-विरोधी रुख बनाए रखा है। उन्होंने याद दिलाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को पलट दिया था।
इस अन्याय को बाद में एनडीए सरकार ने तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाकर सुधारा। उन्होंने कहा कि आज वही कांग्रेस पार्टी और उसके नेता Nari Shakti Vandan Adhiniyam को रोककर महिलाओं के प्रतिनिधित्व और बराबरी के मुद्दे को बड़ा झटका दे रहे हैं।
2014 से पहले महिलाओं की दुर्दशा — शौचालय, गैस, बैंक तक नहीं
श्री शर्मा ने कहा कि 2014 से पहले महिलाओं की स्थिति बेहद दयनीय थी। शौचालय, रसोई गैस, पेयजल और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले वर्षों में इन समस्याओं का समाधान किया। लेकिन जब महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित स्थान देने की बात आई, तो विपक्ष ने Nari Shakti Vandan Adhiniyam को रोककर महिलाओं की प्रगति को एक बड़ा झटका दे दिया।
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Nari Shakti Vandan Adhiniyam और पंचायत आरक्षण का झूठ
संदीप शर्मा ने कहा कि विपक्ष पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण का झूठा श्रेय लेता है, क्योंकि उससे उनकी राजनीतिक स्थिति को कोई खतरा नहीं था।
लेकिन जब Nari Shakti Vandan Adhiniyam के माध्यम से लोकतंत्र के शीर्ष स्तर — संसद और विधानसभाओं — में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने की बात आई, तो विपक्ष ने अपना असली चेहरा दिखाया और इसे रोक दिया।
उन्होंने कहा कि तकनीकी बहाने दिए जा सकते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि महिलाओं की राजनीतिक प्रगति को जानबूझकर बाधित किया गया है।
BJP का संकल्प — महिलाओं के अधिकार के लिए अडिग
श्री शर्मा ने दृढ़ता से कहा कि यह कभी भी राजनीतिक श्रेय लेने का विषय नहीं था। भाजपा ने विपक्ष से भी इस विधेयक के समर्थन का आग्रह किया था।
उन्होंने कहा कि भाजपा माताओं, बहनों और बेटियों के अधिकार और सम्मान के लिए पूरी तरह समर्पित है। महिला-विरोधी ताकतें आज भले जीत गई हों, लेकिन भाजपा का संकल्प अटल और मजबूत है।
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प्रेस वार्ता में कौन-कौन रहे उपस्थित?
दुर्ग जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित इस प्रेस वार्ता में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इनमें महिला मोर्चा प्रदेश महामंत्री शीतल नायक, जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक, महापौर अलका बाघमार, भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य चंद्रिका चंद्राकर, पदमा देवांगन, जिला महामंत्री विनोद अरोरा, जिला भाजपा मीडिया प्रभारी राजा महोबिया, महिला मोर्चा प्रदेश मंत्री कुमुद बघेल तथा महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष तृप्ति चंद्राकर की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
महिला पदाधिकारियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति यह दर्शाती है कि Nari Shakti Vandan Adhiniyam का मुद्दा भाजपा के लिए केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि एक सामाजिक और नैतिक प्रतिबद्धता है।
Nari Shakti Vandan Adhiniyam के लिए संघर्ष जारी रहेगा
Nari Shakti Vandan Adhiniyam केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय महिलाओं के सपनों और अधिकारों का प्रतीक है। दुर्ग में संदीप शर्मा की प्रेस वार्ता ने यह स्पष्ट कर दिया कि भाजपा इस मुद्दे पर न केवल राजनीतिक रूप से बल्कि नैतिक और सामाजिक रूप से भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विपक्ष के विरोध ने भले ही इस अधिनियम को अधूरा छोड़ दिया हो, लेकिन देश की माताएं, बहनें और बेटियां जानती हैं कि उनके अधिकारों के लिए कौन लड़ रहा है। Nari Shakti Vandan Adhiniyam का सपना अधूरा जरूर है, लेकिन यह संघर्ष रुकने वाला नहीं है — और छत्तीसगढ़ की भाजपा इसकी सबसे मजबूत आवाज बनकर उभरी है।
