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DAV Public School RTI Verdict: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

DAV Public School RTI Verdict में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि डीएवी पब्लिक स्कूल जैसी निजी और स्ववित्तपोषित शैक्षणिक संस्थाओं को RTI Act के तहत “पब्लिक अथॉरिटी” नहीं माना जा सकता।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें स्कूल को RTI के दायरे में लाने और प्राचार्य को जन सूचना अधिकारी (PIO) मानने का निर्देश दिया गया था।


DAV Public School RTI Verdict क्या है?

यह मामला कोरबा स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल से जुड़ा है। स्कूल प्रबंधन ने केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा पारित विभिन्न आदेशों को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

विवाद तब शुरू हुआ जब स्कूल के एक पूर्व कर्मचारी की सेवा समाप्ति के बाद उसके परिजनों ने RTI अधिनियम के तहत स्कूल के आंतरिक प्रशासन, सेवा संबंधी मामलों और अन्य दस्तावेजों की जानकारी मांगी थी।

इस आवेदन पर केंद्रीय सूचना आयोग ने स्कूल को जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।

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मामला कैसे शुरू हुआ?

मामले में याचिकाकर्ता स्कूल प्रबंधन ने अदालत को बताया कि डीएवी पब्लिक स्कूल एक निजी संस्था है, जिसका संचालन दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसायटी द्वारा किया जाता है।

स्कूल का दावा था कि वह न तो सरकारी संस्था है और न ही किसी सार्वजनिक प्राधिकरण की श्रेणी में आता है। इसलिए उस पर RTI Act लागू नहीं किया जा सकता।


DAV Public School RTI Verdict में हाईकोर्ट ने क्या कहा?

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकलपीठ, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने की, ने RTI Act की धारा 2(h) सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों का विस्तृत परीक्षण किया।

अदालत ने कहा कि किसी भी संस्था को “पब्लिक अथॉरिटी” मानने के लिए उस पर सरकार का स्वामित्व, पर्याप्त वित्तीय सहायता या प्रशासनिक स्तर पर गहरा नियंत्रण होना आवश्यक है।

न्यायालय ने पाया कि डीएवी पब्लिक स्कूल मुख्य रूप से फीस और अन्य निजी स्रोतों से अपनी आय अर्जित करता है। इसलिए इसे सरकारी नियंत्रण वाली संस्था नहीं माना जा सकता।

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RTI Act में ‘पब्लिक अथॉरिटी’ की परिभाषा

किन संस्थाओं पर लागू होता है RTI?

सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत वही संस्थाएं सार्वजनिक प्राधिकरण मानी जाती हैं जो:

  • सरकार के स्वामित्व में हों।
  • सरकार द्वारा स्थापित की गई हों।
  • पर्याप्त सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त करती हों।
  • प्रशासनिक रूप से सरकारी नियंत्रण में हों।

DAV Public School RTI Verdict में अदालत की व्याख्या

अदालत ने कहा कि केवल किसी सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) के कर्मचारियों के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने से कोई निजी स्कूल सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं बन जाता।

फैसले में कहा गया कि यदि किसी स्थिति में फीस की कमी की भरपाई की जाती है, तो उसे “पर्याप्त वित्तीय सहायता” नहीं माना जा सकता।


DAV Public School RTI Verdict के कानूनी आधार

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि स्कूल के प्रबंधन, प्रशासन, नियुक्तियों और नीतिगत निर्णयों पर न तो राज्य सरकार और न ही कोई अन्य सरकारी निकाय प्रत्यक्ष नियंत्रण रखता है।

यही कारण है कि RTI अधिनियम के तहत इसे सार्वजनिक प्राधिकरण की श्रेणी में शामिल नहीं किया जा सकता।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला निजी शिक्षण संस्थानों और RTI कानून की व्याख्या के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।


CIC के आदेश को क्यों किया गया निरस्त?

प्राचार्य को PIO बनाने का आदेश भी रद्द

DAV Public School RTI Verdict में हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया जिसमें स्कूल के प्राचार्य को जन सूचना अधिकारी (PIO) घोषित किया गया था।

अदालत ने कहा कि जब संस्था स्वयं RTI Act के दायरे में नहीं आती, तो उसके अधिकारियों को PIO नियुक्त करने का प्रश्न भी नहीं उठता।

इसलिए आयोग द्वारा जारी सभी संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया गया।


इस फैसले का क्या होगा असर?

इस निर्णय का प्रभाव केवल डीएवी पब्लिक स्कूल तक सीमित नहीं रहेगा। देशभर के कई निजी और स्ववित्तपोषित शैक्षणिक संस्थानों के लिए यह फैसला एक महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में RTI के तहत निजी संस्थानों से सूचना मांगने से जुड़े मामलों में इस फैसले का हवाला दिया जा सकता है।

हालांकि, यदि कोई निजी संस्था पर्याप्त सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त करती है या सरकारी नियंत्रण में संचालित होती है, तो उस पर अलग कानूनी मानदंड लागू हो सकते हैं।


DAV Public School RTI Verdict ने RTI Act के तहत “पब्लिक अथॉरिटी” की परिभाषा को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टता प्रदान की है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि केवल निजी शैक्षणिक संस्था होने के कारण किसी स्कूल को RTI के दायरे में नहीं लाया जा सकता। जब तक सरकार का पर्याप्त वित्तीय या प्रशासनिक नियंत्रण न हो, तब तक ऐसी संस्थाओं को सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना जाएगा। यह DAV Public School RTI Verdict भविष्य में RTI से जुड़े कई मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है।

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