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Chintan Shivir 3.0: विकसित छत्तीसगढ़ के लिए सुशासन, तकनीक और विकास पर हुआ मंथन

Chintan Shivir 3.0 के सफल समापन के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने विकसित राज्य के निर्माण की दिशा में अपनी दीर्घकालिक रणनीति को और स्पष्ट किया है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय शिविर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्रिपरिषद के सदस्य, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, नीति विशेषज्ञ और शिक्षाविदों ने शासन, तकनीक, कृषि, पर्यटन और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की।

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Chintan Shivir 3.0: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गिनाईं बड़ी उपलब्धियां

समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि Chintan Shivir 3.0 अब केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक सुधारों और प्रभावी सुशासन का मजबूत माध्यम बन चुका है।

उन्होंने कहा कि पिछले दो चिंतन शिविरों से प्राप्त सुझावों को राज्य सरकार ने सफलतापूर्वक लागू किया है। इसी का परिणाम है कि आज कई प्रशासनिक सुधार धरातल पर दिखाई दे रहे हैं।

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Chintan Shivir 3.0: ई-ऑफिस, CM हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु बने बदलाव की मिसाल

मुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और समयबद्ध हुई है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान की प्रभावी व्यवस्था विकसित हुई है। वहीं सेवा सेतु पोर्टल के जरिए 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे आम लोगों को सरकारी सेवाएं आसानी से मिल रही हैं।

उन्होंने कहा कि यही इस चिंतन प्रक्रिया की सबसे बड़ी सफलता है कि विचार अब नीतियों और परिणामों के रूप में दिखाई दे रहे हैं।


Chintan Shivir 3.0: पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

दूसरे दिन आयोजित “सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन” विषयक सत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और पर्यटन नीति विशेषज्ञ सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का प्रमुख High Value, Low Impact Tourism गंतव्य बनने की क्षमता रखता है।

उन्होंने पर्यटन अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी, निजी निवेश और उत्तरदायी पर्यटन मॉडल को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की संभावनाएं भी बताईं।


जिला आधारित विकास मॉडल पर जोर

“सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति” विषय पर सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि प्रत्येक जिले को विकास का वास्तविक केंद्र बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने District GDP, स्थानीय आर्थिक क्षमता, उद्यमिता, रोजगार और कृषि परिवर्तन पर आधारित जिला-केंद्रित विकास मॉडल प्रस्तुत किया। उनका मानना था कि इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में विकास को नई गति मिलेगी।


उभरती तकनीक और कृषि सुधारों पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), 5G, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, ड्रोन, ब्लॉकचेन और डेटा आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

वहीं कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।


नेतृत्व विकास और सुशासन पर भी हुआ मंथन

शिविर के उद्घाटन सत्र में आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन और जनसेवा पर अपने विचार साझा किए।

समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और नेतृत्व विकास के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।


विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

दो दिवसीय Chintan Shivir 3.0 में मंत्रियों ने समूह आधारित विचार-विमर्श के माध्यम से प्रशासनिक सुधार, कृषि, पर्यटन, तकनीक और सुशासन से जुड़े कई सुझावों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि शिविर से प्राप्त सुझावों को जल्द ही नीतिगत और प्रशासनिक स्तर पर लागू किया जाएगा, जिससे विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को गति मिलेगी।


Chintan Shivir 3.0 ने यह स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक, पारदर्शी प्रशासन, प्रभावी नीति निर्माण और जनभागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ सुशासन के नए मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा ई-ऑफिस, CM हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसी पहलों को सफल उदाहरण बताते हुए भविष्य के लिए नई रणनीति प्रस्तुत की गई। Chintan Shivir 3.0 से निकले सुझाव आने वाले वर्षों में राज्य की विकास नीतियों और प्रशासनिक सुधारों की मजबूत आधारशिला बन सकते हैं।

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