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Dhruv Rathee Video Controversy: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को 15 दिन में फैसला लेने का दिया निर्देश

Dhruv Rathee Video Controversy एक बार फिर चर्चा में है। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह यूट्यूबर ध्रुव राठी के विवादित वीडियो को हटाने के संबंध में 15 दिनों के भीतर निर्णय ले। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि आदेश की अवहेलना हुई तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।

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Dhruv Rathee Video Controversy: दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ग्रिवांस अपीलेट कमेटी (GAC) को निर्देश दिया कि वह ध्रुव राठी के विवादित वीडियो पर 15 दिनों के भीतर निर्णय ले।

अदालत ने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं किया गया तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। यह मामला उस वीडियो से जुड़ा है जिसमें हिंदू देवी-देवताओं के भोजन संबंधी दावे किए गए थे।

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वीडियो को लेकर विवाद क्या है?

Dhruv Rathee Video Controversy की शुरुआत मार्च में अपलोड किए गए एक यूट्यूब वीडियो से हुई। वीडियो का शीर्षक था “Can Hindus Eat BEEF? | Kerala Story 2 EXPOSED”

याचिका के अनुसार वीडियो में भगवान राम, माता सीता और भगवान कृष्ण जैसे पूजनीय धार्मिक पात्रों के बारे में यह दावा किया गया कि वे मांस और शराब का सेवन करते थे। याचिकाकर्ता ने इन दावों को गलत, अपमानजनक और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया।

उनका आरोप है कि वीडियो सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकता है तथा सनातन धर्म की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।

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Dhruv Rathee Video Controversy पर केंद्र सरकार ने अदालत में क्या कहा?

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि सोशल मीडिया इंटरमीडियरी के रूप में यूट्यूब को उचित सावधानी (Due Diligence) बरतनी चाहिए थी।

उन्होंने अदालत से कहा कि यदि गूगल और यूट्यूब स्वयं वीडियो नहीं हटाते हैं तो अदालत उचित आदेश पारित कर सकती है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि ऐसा कंटेंट समाज में विभाजन पैदा करने वाला और लोगों की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने वाला हो सकता है।

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याचिकाकर्ता ने क्या आरोप लगाए?

यह याचिका अधिवक्ता अमिता सचदेवा द्वारा दायर की गई है।

याचिका में प्रमुख आरोप

  • धार्मिक ग्रंथों को कथित रूप से तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया।
  • सनातन धर्म की पवित्रता का मजाक उड़ाया गया।
  • खान-पान को जाति और राजनीति से जोड़कर सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 196, 299 और 302 के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई।

याचिकाकर्ता ने वीडियो को “अत्यंत आपत्तिजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील” बताया।


गूगल और यूट्यूब की ओर से क्या दलील दी गई?

गूगल की ओर से अदालत में कहा गया कि कंपनी पहले ही शिकायतकर्ता को अपना जवाब दे चुकी है।

साथ ही बताया गया कि शिकायतकर्ता ने इस मामले को ग्रिवांस अपीलेट कमेटी (GAC) के समक्ष अपील के रूप में प्रस्तुत कर दिया है। इसलिए अब अंतिम निर्णय GAC द्वारा लिया जाना है।


GAC की भूमिका क्या है?

Dhruv Rathee Video Controversy में GAC क्यों महत्वपूर्ण है?

ग्रिवांस अपीलेट कमेटी (GAC) केंद्र सरकार द्वारा गठित एक निकाय है।

इसका उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या अन्य ऑनलाइन इंटरमीडियरी द्वारा शिकायतों के निस्तारण से असंतुष्ट उपयोगकर्ताओं को अपील का अवसर देना है। यदि किसी कंटेंट को हटाने या बनाए रखने को लेकर विवाद हो, तो GAC उस पर निर्णय ले सकती है।


आगे क्या होगा?

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब GAC को 15 दिनों के भीतर यह तय करना होगा कि संबंधित वीडियो को यूट्यूब से हटाया जाए या नहीं।

यदि समिति समय पर निर्णय नहीं लेती है, तो मामला दोबारा अदालत के समक्ष आ सकता है। फिलहाल अदालत ने केवल निर्णय लेने का निर्देश दिया है, वीडियो हटाने का अंतिम आदेश नहीं दिया है।

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Dhruv Rathee Video Controversy अब न्यायिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मामला बन गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की ग्रिवांस अपीलेट कमेटी को 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश देकर स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है। अब सभी की नजर GAC के फैसले पर रहेगी, जो यह तय करेगा कि विवादित वीडियो यूट्यूब पर बना रहेगा या उसे हटाया जाएगा।

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