Bhagirath Choudhary Subsidy Row राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी पर अपनी ही मंत्रालय से जुड़ी योजना के तहत लगभग ₹99.03 लाख की सब्सिडी प्राप्त करने को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि मंत्री ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने नियमों के तहत आवेदन किया था और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई।
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Bhagirath Choudhary Subsidy Row: क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भागीरथ चौधरी को व्यावसायिक खीरा (ककड़ी) उत्पादन परियोजना के लिए ₹99.03 लाख की सब्सिडी मिली। यह सब्सिडी मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) योजना के तहत दी गई, जिसका संचालन नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) करता है।
विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि कृषि राज्य मंत्री होने के नाते भागीरथ चौधरी NHB के पदेन (Ex-officio) उपाध्यक्ष भी हैं। विपक्षी दलों ने इसे हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मामला बताया।
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मंत्री ने आरोपों पर क्या सफाई दी?
Bhagirath Choudhary Subsidy Row पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे बचपन से किसान हैं और राजनीति में आने से पहले भी खेती करते रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए उन्होंने 2018 में आवेदन किया था और इससे संबंधित ऋण तथा सब्सिडी की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। उनके अनुसार इसमें कुछ भी छिपाया नहीं गया।
मंत्री ने यह भी कहा कि उनके फार्म पर आधुनिक खेती, पॉलीहाउस तकनीक और प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण हजारों किसानों को दिया जाता है। उन्होंने कहा कि देशभर में अनेक किसान पॉलीहाउस स्थापित कर इसी प्रकार की सब्सिडी लेते हैं।
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MIDH योजना और NHB की भूमिका क्या है?
Bhagirath Choudhary Subsidy Row में योजना को समझना जरूरी
Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसे वर्ष 2014-15 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य व्यावसायिक स्तर पर फल, सब्जियों और फूलों की खेती को बढ़ावा देना है।
इस योजना के अंतर्गत खीरा, शिमला मिर्च, टमाटर और कुछ फूलों की खेती के लिए परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक, अधिकतम ₹1 करोड़ प्रति परिवार की सब्सिडी दी जा सकती है।
NHB की आधिकारिक व्यवस्था के अनुसार, केंद्रीय कृषि मंत्री इसके पदेन अध्यक्ष और कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होते हैं।
हालांकि उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, सब्सिडी प्रस्तावों को मंजूरी NHB की अलग परियोजना स्वीकृति समिति (Project Approval Committee) देती है, जिसमें अध्यक्ष या उपाध्यक्ष सदस्य नहीं होते।
Bhagirath Choudhary Subsidy Row पर विपक्ष के आरोप
इस मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सीपीएम और शिवसेना (यूबीटी) सहित कई विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा का “भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस” का दावा सवालों के घेरे में है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि भाजपा के लिए “सब्सिडी घर से शुरू होती है।”
सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने इसे “Direct Family Transfer (DFT)” बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।
तृणमूल कांग्रेस सांसद सागरिका घोष और शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस मामले को लेकर सरकार की आलोचना की और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
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सब्सिडी मंजूरी की प्रक्रिया क्या कहती है?
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सब्सिडी मंजूरी का अंतिम निर्णय NHB Project Approval Committee द्वारा लिया जाता है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस समिति में NHB के पदेन अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते। इसलिए अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं हुआ है जिससे यह साबित हो कि केंद्रीय मंत्री ने अपनी आधिकारिक स्थिति का उपयोग कर स्वयं को लाभ पहुंचाया हो।
वहीं विपक्ष का कहना है कि मंत्री का संबंधित संस्था में पद पर होना नैतिक रूप से हितों के टकराव का प्रश्न खड़ा करता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस जारी है।
Bhagirath Choudhary Subsidy Row ने कृषि सब्सिडी योजनाओं की पारदर्शिता और हितों के टकराव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि उन्होंने नियमों के तहत वर्षों पहले आवेदन किया था, वहीं विपक्ष इस मामले में नैतिक जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार सब्सिडी एक अलग परियोजना स्वीकृति समिति द्वारा मंजूर की गई थी, जबकि राजनीतिक विवाद अभी भी जारी है।
