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Lohagad Fort Murder Case: मंगेतर और दोस्त को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत, जांच में सामने आई हत्या की साजिश

Lohagad Fort Murder Case में महाराष्ट्र के पुणे की एक अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मृतक केतन अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसके मित्र चेतन चौधरी को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों पर केतन अग्रवाल को लोनावला स्थित लोहागढ़ किले (Lohagad Fort) की गहरी खाई में धक्का देकर हत्या करने और आपराधिक साजिश रचने का आरोप है। मामले की जांच फिलहाल लोनावला पुलिस द्वारा की जा रही है।

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Lohagad Fort Murder Case में अदालत का बड़ा आदेश

शुक्रवार (3 जुलाई) को दोनों आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) ए.एम. विभुते की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

इससे पहले 23 जून को अदालत ने दोनों आरोपियों को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था। बाद में पुलिस की मांग पर हिरासत बढ़ाई गई थी। पुलिस हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।


Lohagad Fort Murder Case में कैसे बदली जांच की दिशा?

यह घटना 18 जून को लोनावला के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल लोहागढ़ किला (Lohagad Fort) पर हुई थी। शुरुआत में पुलिस को मामला दुर्घटनावश खाई में गिरने का लगा था।

हालांकि जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को ऐसे साक्ष्य मिले, जिनके आधार पर मामला हत्या की साजिश की ओर मुड़ गया। इसके बाद मृतक के पिता की शिकायत पर लोनावला पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या (Murder) और आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) का मामला दर्ज किया।

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Lohagad Fort Murder Case में क्या हैं आरोप?

पुलिस के अनुसार, मृतक केतन अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसके मित्र चेतन चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से केतन को गहरी खाई में धक्का दिया।

हालांकि पुलिस ने अभी तक जांच के सभी साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए हैं। मामले की जांच जारी है और आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।

पुलिस किन पहलुओं की कर रही है जांच?

  • घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्य
  • प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य साक्ष्य
  • आरोपियों और अन्य संबंधित लोगों के बयान
  • मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड
  • घटनाक्रम से जुड़े अन्य तकनीकी साक्ष्य

आगे क्या होगी कानूनी प्रक्रिया?

अब दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में रहेंगे। इस दौरान पुलिस यदि आवश्यक समझे तो अदालत से आगे की कानूनी अनुमति लेकर पूरक जांच कर सकती है।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस अदालत में आरोपपत्र (Chargesheet) दाखिल करेगी। इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस चरण में न्यायिक हिरासत का अर्थ यह नहीं है कि आरोप सिद्ध हो चुके हैं। अंतिम फैसला अदालत द्वारा मुकदमे की सुनवाई और सभी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही दिया जाएगा।


Lohagad Fort Murder Case ने एक कथित दुर्घटना को हत्या की साजिश में बदल देने वाली जांच को सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल पुणे की अदालत ने दोनों आरोपियों को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि लोनावला पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। Lohagad Fort Murder Case में आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच रिपोर्ट और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।

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