Skip to main content

4thnation

Devendra Yadav Election Petition: हाईकोर्ट ने प्रारंभिक अर्जी की खारिज, अब साक्ष्यों के आधार पर होगी सुनवाई

Devendra Yadav Election Petition मामले में भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण कानूनी राहत नहीं मिल सकी। हाईकोर्ट ने उनकी उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने चुनाव याचिका के दो मुद्दों को प्रारंभिक (Preliminary Issues) मानकर पहले उनका निपटारा करने और बिना साक्ष्य दर्ज किए पूरी चुनाव याचिका समाप्त करने का आग्रह किया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवादित तथ्यों से जुड़े मामलों में पूर्ण सुनवाई और साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक है।

📢 WhatsApp Channel: Join 4thNation Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j


Devendra Yadav Election Petition: क्या है पूरा मामला?

भिलाई नगर विधानसभा सीट से निर्वाचित विधायक देवेंद्र यादव के निर्वाचन को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव याचिका दायर कर चुनौती दी है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनावी शपथपत्र में सोशल मीडिया खातों, आय, संपत्ति और लंबित आपराधिक मामलों से संबंधित कुछ जानकारियां छिपाई गईं। इसके अलावा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अन्य आरोप भी याचिका में शामिल हैं।

दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर हाईकोर्ट ने 21 अगस्त 2024 को मामले में पांच प्रमुख मुद्दे तय किए थे।


हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की प्रारंभिक अर्जी?

Devendra Yadav Election Petition में विधायक की ओर से अदालत से आग्रह किया गया था कि मुद्दा क्रमांक 2 और 4 को प्रारंभिक मुद्दा मानते हुए पहले उन पर फैसला सुनाया जाए।

उनका तर्क था कि चुनावी शपथपत्र में सभी आवश्यक जानकारियां दी गई थीं, इसलिए बिना साक्ष्य दर्ज किए ही चुनाव याचिका समाप्त की जा सकती है।

हालांकि, न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय की एकलपीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि जिन मामलों में तथ्य विवादित हों और मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों की आवश्यकता हो, वहां पूर्ण ट्रायल के बिना फैसला नहीं दिया जा सकता।

यह भी पढ़ें: Surajpur Stone Collapse: अवैध खुदाई के दौरान पत्थर गिरने से 2 युवक जिंदा दफन, मौके पर हुई मौत


Devendra Yadav Election Petition: याचिकाकर्ता ने क्या कहा?

याचिकाकर्ता प्रेम प्रकाश पांडे की ओर से अदालत में कहा गया कि दोनों मुद्दे पूरी तरह विवादित तथ्यों से जुड़े हैं।

उनके वकील ने तर्क दिया कि प्रतिवादी ने याचिका में लगाए गए सभी महत्वपूर्ण आरोपों का अपने जवाब में खंडन किया है। इसलिए इन मामलों का निर्णय केवल साक्ष्य और गवाहों के परीक्षण के बाद ही संभव है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला न तो न्यायालय के क्षेत्राधिकार से जुड़ा है और न ही ऐसा कोई कानूनी प्रश्न है, जिसे आदेश 14 नियम 2 के तहत प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तय किया जा सके।


सुप्रीम कोर्ट पहले भी दे चुका है निर्देश

गौरतलब है कि इसी वर्ष फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने भी देवेंद्र यादव की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी थी।

शीर्ष अदालत ने उन्हें चुनाव याचिका का सामना करने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था। इसके बाद मामले की नियमित सुनवाई हाईकोर्ट में जारी है।


अदालत ने अपने आदेश में क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह तय करना कि किसी प्रत्याशी ने आवश्यक जानकारी छिपाई या नहीं, क्या जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन हुआ, क्या कोई चुनावी भ्रष्ट आचरण हुआ और उसका चुनाव परिणाम पर क्या प्रभाव पड़ा—ये सभी प्रश्न साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही तय किए जा सकते हैं।

इसी आधार पर अदालत ने देवेंद्र यादव की प्रारंभिक अर्जी को खारिज कर दिया।


अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 को

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब Devendra Yadav Election Petition में नियमित सुनवाई आगे बढ़ेगी।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 तय की है, जिसमें दोनों पक्ष साक्ष्य और अन्य दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।


Devendra Yadav Election Petition मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह आदेश स्पष्ट करता है कि विवादित तथ्यों वाले चुनावी मामलों में बिना साक्ष्य के फैसला नहीं दिया जा सकता। अदालत ने पूर्ण ट्रायल की आवश्यकता पर जोर देते हुए विधायक देवेंद्र यादव की प्रारंभिक अर्जी खारिज कर दी है। अब इस बहुचर्चित चुनाव याचिका की सुनवाई साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी और अगली महत्वपूर्ण तारीख 4 अगस्त 2026 होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *