जगदलपुर, छत्तीसगढ़ | 25 अप्रैल 2026
Anti Naxal Operations के तहत छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ के सीपीआई (माओवादी) संगठन से जुड़े बस्तर डिविजनल कमेटी के 47 भूमिगत कैडरों ने शनिवार को तेलंगाना में आत्मसमर्पण कर दिया।
इन नक्सलियों ने तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी. शिवधर रेड्डी के सामने सरेंडर किया। सरेंडर करने वाले सभी 47 कैडर मूलतः छत्तीसगढ़ के निवासी हैं।
इन पर कुल मिलाकर ₹1.50 करोड़ से अधिक की इनामी राशि थी। यह सरेंडर बस्तर में चल रहे Anti Naxal Operations की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है।
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Anti Naxal Operations — 47 नक्सलियों का ऐतिहासिक सरेंडर
तेलंगाना में हुआ आत्मसमर्पण — DGP के सामने झुके नक्सली
यह सरेंडर शनिवार, 25 अप्रैल 2026 को तेलंगाना में तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी की उपस्थिति में हुआ।
इस ऐतिहासिक Anti Naxal Operations की सफलता में तीन प्रमुख संगठनों के सदस्य शामिल रहे — पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के 4 सदस्य, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के 28 सदस्य, और साउथ बस्तर डिविजनल कमेटी की 9वीं व 30वीं प्लाटून के 15 सदस्य।
इनमें 12 एरिया कमेटी सदस्य (ACM) भी शामिल थे, जो नक्सली संगठन के स्थानीय नेटवर्क की रीढ़ माने जाते हैं।
कौन-कौन थे ये नक्सली? — बड़े नामों का खुलासा
हेमला इय्थु उर्फ विज्जा — 20 साल पुराना नक्सल नेता
सरेंडर करने वालों में सबसे बड़ा नाम है हेमला इय्थु उर्फ विज्जा का। वे दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के सदस्य और साउथ बस्तर डिविजनल कमेटी के प्रभारी थे।
हेमला इय्थु ने वर्ष 2004 में माओवादी संगठन जॉइन किया था और पिछले 22 वर्षों में संगठन में कई अहम और वरिष्ठ जिम्मेदारियाँ निभाई थीं। उनका सरेंडर Anti Naxal Operations की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पोडियम लाछू उर्फ मनोज — 9वीं प्लाटून का कमांडर
एक और बड़ा नाम है पोडियम लाछू उर्फ मनोज का। वे 9वीं प्लाटून के कमांडर थे और 2009 में माओवादी संगठन से जुड़े थे।
17 वर्षों तक सशस्त्र संगठन में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने भी मुख्यधारा में वापसी का फैसला किया। यह दर्शाता है कि सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षाबलों के दबाव का असर अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।
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32 खतरनाक हथियार और 515 कारतूस जमा
LMG से AK-47 तक — हथियारों की लंबी फेहरिस्त
सरेंडर के साथ इन 47 नक्सलियों ने पुलिस को 32 हथियार और 515 जिंदा कारतूस सौंपे। जब्त हथियारों की सूची इस प्रकार है:
- 1 लाइट मशीन गन (LMG)
- 4 AK-47 राइफल
- 3 SLR राइफल
- 2 INSAS राइफल
- 2 × 410 मस्कट राइफल
- 1 × 8mm राइफल
- 12 सिंगल शॉट गन
- 1 × 9mm पिस्टल
- 1 रिवॉल्वर
- 2 BGL गन
- 2 एयर गन
- 1 SBBL गन
इतने भारी हथियार शांतिपूर्वक जमा होना Anti Naxal Operations की बड़ी जीत है। LMG और AK-47 जैसे हथियारों का सरेंडर यह बताता है कि ये कैडर संगठन के सशस्त्र ढाँचे का हिस्सा थे।
Anti Naxal Operations: साउथ बस्तर डिविजनल कमेटी अब खत्म होने की कगार पर
अधिकारियों ने कहा कि CPI (माओवादी) के प्रमुख नेताओं के आत्मसमर्पण के बाद साउथ बस्तर डिविजनल कमेटी लगभग समाप्ति के कगार पर पहुँच गई है।
इसके अधिकतर प्रमुख नेता और सशस्त्र कैडर अब निष्क्रिय हो चुके हैं। Anti Naxal Operations के लगातार दबाव ने संगठन की कमर तोड़ दी है।
यह सरेंडर तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब Mission 2026 के तहत सरकार ने नक्सलमुक्त भारत का लक्ष्य रखा है। बस्तर में बदलाव की यह लहर उस सपने को साकार करती नज़र आ रही है।
इनाम और पुनर्वास — सरेंडर नक्सलियों को क्या मिलेगा?
₹1.50 करोड़ इनाम और ₹25,000 अंतरिम सहायता
सरेंडर करने वाले 47 कैडरों पर कुल मिलाकर ₹1.50 करोड़ रुपये की इनामी राशि थी। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत इन्हें पात्रता अनुसार इनामी राशि दी जाएगी।
फिलहाल सभी 47 सरेंडरकर्ताओं को ₹25,000-₹25,000 की अंतरिम सहायता दी गई है। शेष राशि दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने और बैंक खाते खुलने के बाद प्रदान की जाएगी।
सभी मूलतः छत्तीसगढ़ के निवासी
यह उल्लेखनीय तथ्य है कि सरेंडर करने वाले सभी 47 कैडर छत्तीसगढ़ के मूल निवासी हैं। वे तेलंगाना में आत्मसमर्पण करने के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़े हैं और अब मुख्यधारा की जिंदगी जीने के लिए आगे आए हैं।
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Anti Naxal Operations: बस्तर में बदलाव की बयार
बस्तर डिवीजन में Anti Naxal Operations की यह सफलता अकेली नहीं है। बीते कुछ महीनों में यहाँ समर्पण का एक नया दौर शुरू हुआ है।
बीते 31 दिनों में बस्तर डिवीजन में 170 माओवादी कैडर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। 343 से अधिक हथियार बरामद हुए, जिनमें AK-47, INSAS, SLR, BGL लॉन्चर और LMG शामिल हैं।
यह बदलाव सरकार की दोतरफा नीति — सुरक्षाबलों का दबाव और पुनर्वास की उम्मीद — की सफलता का प्रमाण है। जो लोग दशकों तक जंगलों में बंदूक के साथ जिए, वे अब शांति का रास्ता चुन रहे हैं।
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निष्कर्ष
Anti Naxal Operations की यह ऐतिहासिक सफलता साबित करती है कि बस्तर में नक्सलवाद का अंत अब सपना नहीं, बल्कि हकीकत बनने की राह पर है। 47 कैडरों का एक साथ सरेंडर, 32 हथियारों की जमाबंदी और ₹1.50 करोड़ इनामी नेताओं की वापसी — ये आँकड़े बताते हैं कि माओवादी संगठन की नींव हिल चुकी है।
साउथ बस्तर डिविजनल कमेटी के लगभग निष्क्रिय हो जाने के बाद यह उम्मीद और भी मजबूत हुई है कि जल्द ही बस्तर पूरी तरह नक्सलमुक्त होगा। Anti Naxal Operations का यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक छत्तीसगढ़ की धरती से नक्सलवाद का आखिरी निशान भी मिट नहीं जाता।
