Adhik Maas Amavasya Donation के अवसर पर दुर्ग की जन समर्पण सेवा संस्था ने जरूरतमंदों, असहाय लोगों और वृद्धजनों की सेवा करते हुए भोजन के साथ-साथ आवश्यक सामग्री का वितरण किया। संस्था की ओर से वृद्धाश्रम, महिला अनाथ आश्रम, दुर्ग रेलवे स्टेशन और शहर के विभिन्न स्थानों पर निवास कर रहे जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाई गई।
Adhik Maas Amavasya Donation के तहत विशेष सेवा अभियान
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है, दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस पवित्र माह में अन्नदान और जरूरतमंदों की सेवा करने से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है।
इसी भावना को आत्मसात करते हुए जन समर्पण सेवा संस्था ने अधिकमास की अमावस्या के अवसर पर सेवा कार्यों का आयोजन किया।
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3450 दिनों से लगातार चल रही नि:शुल्क भोजन सेवा
संस्था के अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा बंटी ने बताया कि जन समर्पण सेवा संस्था पिछले 9 वर्ष 6 माह यानी लगभग 3450 दिनों से बिना रुके प्रतिदिन दुर्ग रेलवे स्टेशन और अन्य स्थानों पर अस्थायी रूप से निवास कर रहे मजदूरों, महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगजनों और असहाय लोगों को रात्रि में नि:शुल्क भोजन उपलब्ध करा रही है।
इसके साथ ही संस्था के युवा सदस्य विभिन्न पर्व और त्योहारों पर जरूरतमंदों की हरसंभव सहायता करते आ रहे हैं।
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Adhik Maas Amavasya Donation के दौरान वृद्धाश्रम में सामग्री वितरण
14 जून को शाम 6 बजे संस्था के सदस्यों ने पुलगांव स्थित वृद्धाश्रम और कादंबरी नगर के महिला अनाथ आश्रम पहुंचकर वृद्धजनों को नई स्टील की थाली, गिलास और चम्मच वितरित किए तथा उसी में भोजन कराया।
भोजन के बाद वृद्ध पुरुषों को लुंगी और वृद्ध महिलाओं को नाइटी प्रदान की गई। इसके अलावा मिष्ठान, नमकीन, फल, बिस्किट, साबुन, निरमा, तेल, टूथपेस्ट, कंघी और अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री भी वितरित की गई।
इसके पश्चात दुर्ग रेलवे स्टेशन और शहर के विभिन्न फुटपाथों पर रहने वाले जरूरतमंद लोगों को नि:शुल्क भोजन के साथ साबुन और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई गईं।
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अधिकमास में दान का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
वेदों और पुराणों के अनुसार अधिकमास में दान और अन्नदान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान जरूरतमंदों को भोजन कराने से कर्मों का शुद्धिकरण होता है और नकारात्मक प्रभावों का नाश होता है।
पौराणिक मान्यता यह भी है कि भूखे और बेसहारा लोगों की सेवा से मानसिक शांति प्राप्त होती है तथा पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है। पद्म पुराण में अधिकमास के दौरान किए गए दान को अत्यंत पुण्यकारी बताया गया है।
सेवा कार्य में इन लोगों की रही सहभागिता
इस सेवा अभियान में संस्था के अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा बंटी के साथ प्रतिभा शर्मा, सुरेश गुप्ता, पार्षद राम भाऊ, मनोज गुप्ता, लाला, अर्चला शर्मा, सरिता शर्मा, चंचल शर्मा, पिंकी पुरोहित, किरण सेन, सुमन शर्मा, गिरधर शर्मा, राजेंद्र ताम्रकार, अर्जित शुक्ला, आशीष मेश्राम, सुजल शर्मा, विनय मिश्रा, संदीप गुप्ता, अंकेश पेसवानी, वाशु शर्मा, सार्थक शर्मा, अनस खान, अंश पाण्डेय, मंटू गुप्ता, मोक्ष शर्मा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
Adhik Maas Amavasya Donation के माध्यम से जन समर्पण सेवा संस्था ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। पिछले 3450 दिनों से लगातार चल रही नि:शुल्क भोजन सेवा और अधिकमास अमावस्या पर जरूरतमंदों को भोजन एवं आवश्यक सामग्री का वितरण समाज के लिए प्रेरणादायी पहल है। ऐसे सेवा कार्य सामाजिक समरसता और मानवता की भावना को मजबूत बनाते हैं।
