Abujhmad PDS छत्तीसगढ़ के सबसे दुर्गम और लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे इलाके अबूझमाड़ में प्रशासनिक बदलाव की नई पहचान बन गया है। नारायणपुर जिले के ओरछा ब्लॉक के कई गांवों में अब लोगों को राशन लेने के लिए जंगलों और नदी-नालों को पार कर कई दिनों तक सफर नहीं करना पड़ रहा।
2019 बैच की आईएएस अधिकारी Namrata Jain के नेतृत्व में शुरू की गई यह नई विकेंद्रीकृत सार्वजनिक वितरण प्रणाली अब हजारों ग्रामीणों तक सीधे राशन पहुंचा रही है।
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अबूझमाड़ में राशन वितरण की पुरानी समस्या
Abujhmad लंबे समय तक प्रशासनिक पहुंच से दूर माना जाता रहा है।
घने जंगल, खराब सड़कें और वर्षों तक नक्सली प्रभाव के कारण यहां सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक आसानी से नहीं पहुंच पाता था।
गांवों के लोगों को राशन लेने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। कई बार उन्हें जंगलों से गुजरते हुए नदी-नालों को पार कर ओरछा तक पहुंचना पड़ता था।
तीन दिन का सफर बन चुका था मजबूरी
कई गांवों में राशन लेने की प्रक्रिया तीन दिन के कठिन सफर जैसी थी।
ग्रामीणों को मजदूरी छोड़कर राशन लाना पड़ता था, जिससे आर्थिक नुकसान भी होता था।
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Abujhmad PDS क्या है
घर के नजदीक पहुंच रहा राशन
Abujhmad PDS मॉडल के तहत प्रशासन ने गांवों तक सीधे राशन पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की है।
अब ट्रैक्टरों के जरिए खाद्यान्न ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाया जा रहा है।
इस पहल के तहत 67 गांवों के 11,764 लाभार्थियों को राहत मिल रही है।
14 ग्राम पंचायतें शामिल
यह योजना फिलहाल 14 ग्राम पंचायतों में लागू की गई है, जिनमें:
- मुरूमवाड़ा
- जाटलूर
- थुलथुली
- आडेर
- घमंडी
- पोचावाड़ा
- कोडोली
- धोड़रबेड़ा
- मंडाली
- हिकुल
- गोमागल
- रेकावाया
- हंदावाड़ा
- आदनार
शामिल हैं।
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IAS नम्रता जैन की नई पहल
प्रशासनिक सोच में बदलाव
Namrata Jain ने गांवों की स्थिति का अध्ययन करने के बाद महसूस किया कि राशन की सुविधा कागजों पर मौजूद थी, लेकिन वास्तविक पहुंच बेहद कठिन थी।
उन्होंने निर्णय लिया कि लोगों को राशन दुकान तक बुलाने के बजाय राशन को गांवों तक पहुंचाया जाए।
जनवरी 2026 से हुई शुरुआत
यह पहल जनवरी 2026 में मंडाली ग्राम पंचायत से शुरू हुई थी।
सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद इसे 13 अन्य पंचायतों तक विस्तार दिया गया।
ट्रैक्टर मॉडल से कैसे बदल रही व्यवस्था
ट्रैक्टर बने जीवनरेखा
Abujhmad PDS के तहत हर महीने लगभग 34.05 मीट्रिक टन खाद्यान्न ट्रैक्टरों के माध्यम से गांवों तक पहुंचाया जा रहा है।
यह मॉडल उन क्षेत्रों में बेहद उपयोगी साबित हुआ है जहां सड़क और परिवहन सुविधाएं सीमित हैं।
घमंडी गांव को मिली सबसे बड़ी राहत
घमंडी गांव पहले सोनपुर राशन केंद्र से लगभग 70 किलोमीटर दूर था।
अब राशन गांव के पास पहुंचने से ग्रामीणों का समय और पैसा दोनों बच रहा है।
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सोमारी बाई की कहानी ने बदली सोच
तीन दिन की यात्रा से मिली राहत
थुलथुली गांव की सोमारी बाई पहले राशन लेने के लिए तीन दिन तक यात्रा करती थीं।
उन्हें जंगलों से होकर गुजरना पड़ता था और मजदूरी के दिन भी छूट जाते थे।
अब राशन गांव के नजदीक मिलने से उनकी जिंदगी काफी आसान हो गई है।
हजारों लोगों की समान कहानी
सोमारी बाई की कहानी अबूझमाड़ के हजारों ग्रामीणों की स्थिति को दर्शाती है।
लोग वर्षों से दूरी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का बोझ झेल रहे थे।
मानसून और निगरानी की चुनौती
बारिश में कट जाते हैं गांव
मानसून के दौरान कई गांव पूरी तरह संपर्क से कट जाते हैं।
इसी को देखते हुए प्रशासन ने पहले से खाद्यान्न भंडारण की रणनीति बनाई है।
डिजिटल मॉनिटरिंग पर जोर
Abujhmad PDS में राशन वितरण की निगरानी के लिए डिजिटल फोटो, वीडियो रिकॉर्डिंग और सप्लाई चेन मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है।
जिला स्तर के नोडल अधिकारी पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं।
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अबूझमाड़ में बदलता प्रशासनिक मॉडल
“माओवादी मुक्त” क्षेत्र में नई शुरुआत
हाल ही में प्रशासन और सुरक्षा बलों ने अबूझमाड़ को माओवादी प्रभाव से काफी हद तक मुक्त घोषित किया है।
अब प्रशासन लोगों तक सेवाएं पहुंचाने पर फोकस कर रहा है।
भविष्य में और विस्तार की तैयारी
जिला प्रशासन इस मॉडल को बस्तर और अन्य दुर्गम इलाकों तक विस्तार देने की संभावना पर काम कर रहा है।
स्थायी राशन दुकानों के लिए भी मंजूरी दी जा रही है।
Abujhmad PDS छत्तीसगढ़ के सबसे कठिन इलाकों में प्रशासनिक बदलाव का मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है। यह पहल केवल राशन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों और शासन के बीच विश्वास बढ़ाने का माध्यम भी बन रही है।
आईएएस अधिकारी Namrata Jain की इस पहल से हजारों ग्रामीणों को राहत मिली है। आने वाले समय में Abujhmad PDS मॉडल पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए नई प्रशासनिक दिशा साबित हो सकता है।
