राम मंदिर दान चोरी का मामला अब उत्तर प्रदेश में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। अयोध्या स्थित राम मंदिर की CCTV फुटेज की जांच में विशेष जांच दल (SIT) ने दान की गिनती के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पकड़ी है।
45 दिनों की फुटेज जांचने के बाद SIT ने 23 जून को उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग को एक प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है।
राम मंदिर दान चोरी का खुलासा कैसे हुआ
विपक्षी नेताओं और एक व्हिसलब्लोअर के सवाल उठाने के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को तीन सदस्यीय SIT का गठन किया गया था।
जांच में सामने आया कि गिनती कर्मचारी नियमित रूप से नोटों के बंडल और खुले पैसे अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाकर बाहर ले जाते थे।
राम मंदिर दान चोरी में शामिल कर्मचारी
रिपोर्ट के अनुसार अविनाश शुक्ला और मनीष कुमार यादव बार-बार पैसे चुराते हुए फुटेज में दिखे। अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय उनकी मदद करते पाए गए, जबकि रामाशंकर मिश्रा को भी कैश छिपाते देखा गया।
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CCTV फुटेज में क्या मिला
SIT को केवल 27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक की फुटेज ही उपलब्ध हो पाई, जबकि ट्रस्ट के आंतरिक ऑडिट में 180 दिनों की फुटेज सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई थी।
इस सीमित अवधि में भी SIT ने कर्मचारियों द्वारा पैसे छिपाने की 70 घटनाएं दर्ज कीं। बैंक रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों से संकेत मिलता है कि यह चोरी पहले से भी होती रही होगी।
SIT को यह भी पता चला कि ट्रस्ट के गठन से पहले ही आरोपियों से करीब 78.94 लाख रुपये बरामद किए जा चुके थे, साथ ही गिनती कक्ष के पास एक बाथरूम से विदेशी मुद्रा, गहने और 2.25 लाख रुपये भी मिले।
गिनती कक्ष में सुरक्षा में चूक
राम मंदिर की गिनती प्रक्रिया में कई बुनियादी सुरक्षा उपायों की अनदेखी की गई। कर्मचारियों की एंट्री या एग्जिट पर तलाशी नहीं होती थी और उन्हें मोबाइल फोन ले जाने की भी अनुमति थी।
जेब रहित यूनिफॉर्म का नियम कागजों तक ही सीमित रहा। अलग-अलग हुंडियों से आया कैश और सिक्के गिनती से पहले आपस में मिला दिए जाते थे, जिससे किसी विशेष हुंडी की राशि का पता लगाना असंभव हो गया।
अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल
ट्रस्टी अनिल मिश्रा, जो अवध क्षेत्र में RSS के पूर्व प्रमुख रहे हैं, पर रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। फरवरी 2025 में उन्होंने SBI के साथ जो सुरक्षा प्रोटोकॉल साइन किया, उसने सितंबर 2024 के पुराने और सख्त नियम को कमजोर कर दिया।
रिपोर्ट कहती है कि उनकी भूमिका “प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं” बल्कि चोरी की सुविधा देने वाली रही। इसके बावजूद SIT ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की सिफारिश नहीं की।
SBI की जिम्मेदारी पर सवाल
State Bank of India, जो मंदिर ट्रस्ट का बैंकर है, पर भी रिपोर्ट में सवाल उठे हैं। बैंक ने न तो कर्मचारियों को निर्धारित यूनिफॉर्म दी और न ही अधिकारियों की मासिक रोटेशन सुनिश्चित की।
अधिक जानकारी के लिए State Bank of India आधिकारिक वेबसाइट और उत्तर प्रदेश सरकार पोर्टल देखा जा सकता है।
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रिपोर्ट में क्या छूट गया
रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहीं जिक्र नहीं है, जबकि उनके एक सहयोगी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है। गोपाल नागरकट्टे की भूमिका की भी जांच नहीं हुई।
राम मंदिर दान चोरी का यह मामला श्रद्धालुओं की आस्था और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर सवाल खड़ा करता है। SIT की अंतिम रिपोर्ट 22 जुलाई तक आने की उम्मीद है, जिसमें उम्मीद है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
