Mahtari Vandan Yojana Fraud का एक चौंकाने वाला मामला छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले से सामने आया है। यहां एक युवक ने कथित तौर पर अपने नाम से आवेदन कर महिला हितग्राही के रूप में महतारी वंदन योजना का लाभ प्राप्त किया। आरोप है कि उसके खाते में मार्च 2024 से दिसंबर 2024 तक हर महीने एक-एक हजार रुपये जमा होते रहे। बाद में ई-केवाईसी के दौरान मामला सामने आने पर प्रशासन ने लाभ राशि की रिकवरी की कार्रवाई की।
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Mahtari Vandan Yojana Fraud: कैसे हुआ पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी तिलोक साहू ने अपने ही नाम से महतारी वंदन योजना के पोर्टल पर आवेदन किया। आश्चर्यजनक रूप से उसका आवेदन महिला हितग्राही के रूप में स्वीकृत भी हो गया।
इसके बाद मार्च 2024 से दिसंबर 2024 तक उसके बैंक खाते में हर महीने 1,000 रुपये की सहायता राशि जमा होती रही। इस तरह उसे कुल 10,000 रुपये का लाभ मिला।
यह मामला योजना की पात्रता जांच और सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है।
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Mahtari Vandan Yojana Fraud: ई-केवाईसी में खुला राज
प्रशासन द्वारा हितग्राहियों की ई-केवाईसी प्रक्रिया के दौरान इस मामले का खुलासा हुआ।
जांच में सामने आया कि लाभ लेने वाला व्यक्ति महिला नहीं बल्कि पुरुष है। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए इस माह लाभ की पूरी राशि की रिकवरी कराई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई लाभ मिलने के लगभग दो वर्ष बाद की गई।
आरोपी ने क्या दी सफाई?
आरोपी तिलोक साहू, जो एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का संचालक बताया जा रहा है, ने दावा किया कि उसने केवल पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया को समझने और प्रदर्शित करने के उद्देश्य से अपने नाम से आवेदन किया था।
उसका कहना है कि उसने यह नहीं सोचा था कि आवेदन स्वीकृत हो जाएगा। हालांकि आवेदन स्वीकृत होने के बाद उसके खाते में लगातार सहायता राशि आती रही।
प्रशासन की ओर से इस दावे की पुष्टि या खंडन संबंधी कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।
सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल
मामले में यह भी सामने आया है कि आवेदन का सत्यापन संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक द्वारा किया गया था।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब योजना केवल पात्र महिलाओं के लिए है, तब एक पुरुष का आवेदन महिला हितग्राही के रूप में कैसे स्वीकृत हुआ और सत्यापन प्रक्रिया में यह त्रुटि कैसे रह गई।
हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत जांच या जिम्मेदारी तय किए जाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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ई-केवाईसी से सामने आई अनियमितता
यह मामला दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं में ई-केवाईसी जैसी डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया अनियमितताओं की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
प्रशासन ने लाभ राशि की रिकवरी कर यह स्पष्ट किया है कि अपात्र व्यक्ति द्वारा प्राप्त राशि वापस ली जाएगी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मामले में आगे किसी प्रकार की कानूनी या विभागीय कार्रवाई की जाएगी या नहीं।
Mahtari Vandan Yojana Fraud का यह मामला सरकारी योजनाओं में सत्यापन और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता की ओर संकेत करता है। ई-केवाईसी के दौरान सामने आई इस अनियमितता के बाद प्रशासन ने लाभ राशि की रिकवरी कर ली है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारी किसकी तय होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
