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Drishti-10 UAV Crash: पोरबंदर में प्रशिक्षण उड़ान के दौरान भारतीय नौसेना का ड्रोन दुर्घटनाग्रस्त, जांच शुरू

Drishti-10 UAV Crash ने भारतीय नौसेना के मानव रहित निगरानी प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है। गुजरात के पोरबंदर जिले के धर्मपुर गांव के पास बुधवार (8 जुलाई 2026) को नियमित प्रशिक्षण उड़ान (Training Sortie) के दौरान भारतीय नौसेना का Drishti-10 Starliner ड्रोन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना के बाद नौसेना ने Board of Inquiry (BoI) के गठन का आदेश दिया है, जो दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच करेगा।

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Drishti-10 UAV Crash: क्या हुआ पोरबंदर में?

Drishti-10 UAV Crash उस समय हुआ जब ड्रोन पोरबंदर एयरफील्ड के निकट नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था। भारतीय नौसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में बताया कि दुर्घटना में जमीन पर किसी व्यक्ति के घायल होने या किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।

घटना के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने दुर्घटनास्थल से ड्रोन का मलबा बरामद कर लिया और तकनीकी जांच शुरू कर दी।


दुर्घटना की जांच के लिए Board of Inquiry गठित

Drishti-10 UAV Crash के बाद नौसेना ने बोर्ड ऑफ इंक्वायरी के गठन की पुष्टि की है।

जांच में यह पता लगाया जाएगा कि हादसा तकनीकी खराबी, संचार (Communication Link) टूटने या किसी अन्य सिस्टम फेल होने के कारण हुआ। रक्षा सूत्रों का कहना है कि शुरुआती आशंका तकनीकी खराबी की है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

यह भी पढ़ें: India Australia Defence Cooperation: भारत-ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई दी, आतंकवाद पर दिया सख्त संदेश


Drishti-10 UAV की खासियत क्या है?

Drishti-10 भारत में निर्मित Hermes-900 Medium Altitude Long Endurance (MALE) ड्रोन का भारतीय संस्करण है।

इसे Adani Defence and Aerospace ने हैदराबाद स्थित अपनी इकाई में इजरायल की Elbit Systems के साथ साझेदारी में लाइसेंस के तहत तैयार किया है।

यह ड्रोन मुख्य रूप से इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) मिशनों के लिए विकसित किया गया है।

इसकी प्रमुख विशेषताएं:

  • 36 घंटे तक लगातार उड़ान भरने की क्षमता।
  • लगभग 450 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने की क्षमता।
  • 30,000 फीट तक संचालन की क्षमता।
  • समुद्री निगरानी और रणनीतिक खुफिया मिशनों में उपयोग।

पहले भी हो चुका है Drishti-10 UAV Crash

यह Drishti-10 UAV Crash पिछले करीब 18 महीनों में इस प्लेटफॉर्म से जुड़ी दूसरी बड़ी दुर्घटना है।

जनवरी 2025 में नौसेना में औपचारिक शामिल किए जाने से पहले परीक्षण उड़ान के दौरान एक Drishti-10 ड्रोन कथित रूप से संचार संपर्क टूटने के बाद अरब सागर में गिर गया था। उस समय निर्माता कंपनी ने ड्रोन को बदलकर नया प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया था।

भारतीय सेना और नौसेना ने वर्ष 2023 में आपातकालीन खरीद (Emergency Procurement) के चौथे चरण के तहत दो-दो Drishti-10 ड्रोन खरीदे थे। प्रत्येक ड्रोन की अनुमानित लागत करीब 140 करोड़ रुपये बताई गई थी।

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विश्वसनीयता पर फिर उठे सवाल

हालिया Drishti-10 UAV Crash के बाद इस प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं।

रक्षा सूत्रों के अनुसार भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में लगातार निगरानी मजबूत करने के लिए 10 और Drishti-10 UAV शामिल करने की योजना पर काम कर रही है। ऐसे में यह दुर्घटना भविष्य की खरीद प्रक्रिया और तकनीकी मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

हाल के वर्षों में Hermes-900 प्लेटफॉर्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहा है। विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया गया कि इजरायल-ईरान संघर्ष के दौरान कुछ Hermes-900 ड्रोन क्षतिग्रस्त हुए या उन्हें गिराया गया। हालांकि, इस घटना और पोरबंदर हादसे के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।


Drishti-10 UAV Crash भारतीय नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी घटना मानी जा रही है। फिलहाल हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, लेकिन दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए बोर्ड ऑफ इंक्वायरी की जांच अहम होगी। जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि हादसा तकनीकी खराबी, संचार प्रणाली में समस्या या किसी अन्य कारण से हुआ। साथ ही, इसके निष्कर्ष भविष्य में Drishti-10 UAV के संचालन और संभावित नई खरीद से जुड़े फैसलों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

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