TMC Split Crisis ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई उथल-पुथल पैदा कर दी है। लगभग तीन दशक पुराने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के इतिहास में पहली बार पार्टी के भीतर इतना बड़ा विद्रोह सामने आया है। 58 बागी विधायकों ने पार्टी के विधायी दल पर नियंत्रण का दावा करते हुए अलग नेतृत्व की घोषणा कर दी है।
इस घटनाक्रम के बाद टीएमसी सांसद Mahua Moitra ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता वर्षों तक केवल Mamata Banerjee की लोकप्रियता का लाभ उठाते रहे और अब विपक्ष में बैठने का साहस नहीं दिखा पा रहे हैं।
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पश्चिम बंगाल में TMC Split Crisis क्या है?
पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया जब 58 बागी विधायकों ने टीएमसी के विधायी दल से अलग होकर नया नेतृत्व चुन लिया।
बागी विधायकों ने निष्कासित विधायक Ritabrata Banerjee को अपना नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता भी प्राप्त कर ली। इसके बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई।
यह टीएमसी के 28 साल के इतिहास का सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है।
58 विधायकों की बगावत से मची हलचल
खुद को बताया “असली टीएमसी”
बागी गुट ने दावा किया कि विधानसभा में वही “वास्तविक तृणमूल कांग्रेस” का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी को पूरी तरह अलग नहीं किया और उन्हें नए विधायी समूह का मुख्य सलाहकार बनाए जाने का प्रस्ताव भी रखा।
इस बीच कई बागी विधायक भी चाहते हैं कि ममता बनर्जी पार्टी की सर्वोच्च नेता बनी रहें।
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TMC Split Crisis से बढ़ी राजनीतिक अनिश्चितता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
विधानसभा के भीतर विपक्ष और सत्तापक्ष की रणनीतियों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।
महुआ मोइत्रा का बागी नेताओं पर तीखा हमला
“ममता बनर्जी के सहारे राजनीति करते रहे”
महुआ मोइत्रा ने बागी नेताओं को “पूरी तरह बेकार” बताते हुए कहा कि वे केवल ममता बनर्जी की लोकप्रियता के सहारे राजनीति करते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि वे अलग राजनीतिक रास्ता अपनाना चाहते हैं तो अपना संगठन बनाएं, लेकिन खुद को तृणमूल कांग्रेस न कहें।
विपक्ष में बैठने की इच्छा नहीं
मोइत्रा का आरोप है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण कई नेता विपक्ष की राजनीति करना भूल चुके हैं।
उनके अनुसार कुछ नेता संघर्ष करने के बजाय सुरक्षित राजनीतिक विकल्प चुनना चाहते हैं।
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TMC Split Crisis पर भाजपा पर लगाए गए गंभीर आरोप
दबाव और एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप
महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने केंद्रीय एजेंसियों के डर और दबाव का उपयोग कर विधायकों को प्रभावित किया।
उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग विधायकों पर विभिन्न मामलों में कार्रवाई की आशंका दिखाकर उन्हें बागी गुट में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया।
हालांकि इन आरोपों पर भाजपा की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अलग हो सकती है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सुवेंदु अधिकारी पर भी निशाना
मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि वे पहले टीएमसी से जुड़े रहे हैं और पार्टी के नेताओं की कमजोरियों को अच्छी तरह जानते हैं।
उनका दावा है कि इसी जानकारी का उपयोग राजनीतिक रणनीति में किया गया।
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर क्या बोलीं मोइत्रा?
महुआ मोइत्रा ने कहा कि पार्टी किसी भी तरह से खत्म नहीं हो रही है और ममता बनर्जी ही तृणमूल कांग्रेस की असली पहचान हैं।
उन्होंने कहा कि यदि पार्टी का चुनाव चिन्ह या संगठनात्मक ढांचा भी बदलना पड़े तो भी ममता बनर्जी नई शुरुआत कर सकती हैं।
अभिषेक बनर्जी का बचाव
मोइत्रा ने Abhishek Banerjee का भी बचाव किया।
उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी दबाव के आगे झुकने वाले नेता नहीं हैं और पार्टी नेतृत्व संघर्ष के लिए तैयार है।
बागी गुट की रणनीति और नई मांगें
बागी गुट का कहना है कि उनका विरोध सीधे ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं बल्कि पार्टी के कुछ अन्य नेताओं की कार्यशैली के खिलाफ है।
हालांकि इस दावे पर महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि ऐसी नाराजगी थी तो नेताओं ने हालिया चुनाव टीएमसी के टिकट पर क्यों लड़ा।
इस विवाद ने TMC Split Crisis को और अधिक जटिल बना दिया है।
TMC Split Crisis का राजनीतिक असर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट केवल एक पार्टी का आंतरिक विवाद नहीं है बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है।
यदि बागी गुट लंबे समय तक एकजुट रहता है तो राज्य की राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
वहीं ममता बनर्जी समर्थक गुट का दावा है कि पार्टी जल्द ही इस संकट से उबर जाएगी।
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TMC Split Crisis ने पश्चिम Bengal की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। 58 विधायकों की बगावत, महुआ मोइत्रा के तीखे आरोप और ममता बनर्जी के नेतृत्व पर जारी बहस आने वाले दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि TMC Split Crisis तृणमूल कांग्रेस के इतिहास का सबसे बड़ा संगठनात्मक और राजनीतिक परीक्षण बनकर उभरा है।
