NEET Paper Leak Protest को लेकर राजधानी दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में है। शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और कथित परीक्षा पेपर लीक मामलों को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस कार्रवाई के बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने चिंता व्यक्त की है। संगठन ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए और बल प्रयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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NEET Paper Leak Protest क्या है?
NEET Paper Leak Protest देशभर में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन का हिस्सा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च निकालने की भी कोशिश की।
Delhi Police की कार्रवाई पर उठे सवाल
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च किया। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए कई वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और बल प्रयोग किया। कुछ पोस्ट में पुलिस द्वारा पत्थर फेंकने के भी आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
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NEET Paper Leak Protest पर एमनेस्टी इंटरनेशनल की प्रतिक्रिया
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बोर्ड चेयर आकार पटेल ने कहा कि जंतर-मंतर से सामने आई तस्वीरें और रिपोर्टें शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
संगठन का कहना है कि:
- शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है।
- प्रशासन की जिम्मेदारी प्रदर्शन को सुरक्षित तरीके से संपन्न कराना है।
- यदि अत्यधिक बल प्रयोग हुआ है तो उसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
- कानून लागू करने वाली एजेंसियों को संयम बरतना चाहिए।
एमनेस्टी ने यह भी कहा कि भारतीय संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के तहत शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता एक मान्य अधिकार है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
NEET Paper Leak Protest में शामिल प्रदर्शनकारी कई प्रमुख मांगें उठा रहे हैं।
इनमें शामिल हैं—
- परीक्षा पेपर लीक मामलों की जवाबदेही तय की जाए।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।
- परीक्षा संबंधी तनाव के कारण कथित रूप से जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार लागू किए जाएं।
सोनम वांगचुक के अनशन का मामला
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठे थे।
रिपोर्ट के अनुसार, 18 जुलाई को उनके अनशन के 21वें दिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। बताया गया कि यह कार्रवाई उनकी इच्छा के विरुद्ध की गई। इस घटनाक्रम ने भी आंदोलन को लेकर बहस को और तेज कर दिया।
NEET Paper Leak Protest की पृष्ठभूमि
मई 2026 में NEET-UG परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक के आरोप सामने आए थे। इसके बाद परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी ने परीक्षा परिणाम रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया।
इस निर्णय से 20 लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए। परीक्षा को लेकर उत्पन्न अनिश्चितता और मानसिक दबाव के बीच कई छात्रों की आत्महत्या की खबरें भी विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद देशभर में परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग तेज हो गई।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। छात्र संगठनों का कहना है कि बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक के मामलों से युवाओं का भरोसा कमजोर हो रहा है।
वहीं दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस पूरे घटनाक्रम पर आगे की जांच और आधिकारिक कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
NEET Paper Leak Protest ने एक बार फिर देश में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, छात्रों के अधिकार और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। जहां प्रदर्शनकारी जवाबदेही और सुधार की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस कार्रवाई को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। मामले की निष्पक्ष जांच और आधिकारिक निष्कर्ष आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
