Chhattisgarh Electricity Tariff Hike के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है। प्रदेश में बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी के विरोध में कांग्रेस ने बुधवार को राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा सरकार ने बिजली दरें बढ़ाकर आम जनता, किसानों और व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर सभी जिला मुख्यालयों में बिजली विभाग के कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जाएगा।
📢 4thNation WhatsApp Channel से जुड़ें https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Chhattisgarh Electricity Tariff Hike को लेकर कांग्रेस का बड़ा आंदोलन
कांग्रेस ने बिजली दरों में वृद्धि को जनविरोधी फैसला बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि महंगाई के दौर में बिजली की कीमतें बढ़ाना आम लोगों की परेशानियों को और बढ़ाएगा।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर जिला, शहर और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के पदाधिकारी, विधायक, पूर्व विधायक, सांसद प्रत्याशी, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस और अन्य मोर्चा संगठनों के कार्यकर्ता आंदोलन में शामिल होंगे।
कांग्रेस का दावा है कि Chhattisgarh Electricity Tariff Hike का असर सीधे लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेताओं के अनुसार भाजपा सरकार ने बिजली दरों में वृद्धि कर जनता के हितों की अनदेखी की है। पार्टी का कहना है कि किसानों को सिंचाई, छोटे व्यापारियों को कारोबार और घरेलू उपभोक्ताओं को मासिक बिजली बिल के रूप में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा।
पार्टी ने मांग की है कि सरकार बिजली दर वृद्धि के फैसले को तत्काल वापस ले और जनता को राहत प्रदान करे।
इसके अलावा कांग्रेस ने आंदोलन के दूसरे चरण में 18 जून को जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का भी निर्णय लिया है, जिसमें बिजली दर वृद्धि के खिलाफ विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
यह भी पढ़ें: DMF Scam Chhattisgarh: ED की छापेमारी में 1 करोड़ से अधिक नकदी बरामद
Chhattisgarh Electricity Tariff Hike में कितनी बढ़ी हैं बिजली दरें?
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों को मंजूरी दी है।
नई दरों के अनुसार:
- घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट वृद्धि
- व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट वृद्धि
- कृषि पंप उपभोक्ताओं के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट वृद्धि
- औसत बढ़ोतरी 6.23 प्रतिशत
गौरतलब है कि बिजली कंपनी ने करीब 24 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा था, लेकिन आयोग ने केवल 6.23 प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दी।
नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी।
CSERC का दावा, अधिकांश उपभोक्ताओं पर असर सीमित
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के सचिव सूर्य प्रकाश शुक्ला के अनुसार औसतन 40 से 42 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है।
उन्होंने बताया कि राज्य में लागू बिजली बिल हाफ योजना के तहत 400 यूनिट तक मासिक खपत वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक राहत मिलती रहेगी।
आयोग के अनुसार प्रदेश के लगभग 70 से 75 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ता इसी श्रेणी में आते हैं, इसलिए Chhattisgarh Electricity Tariff Hike का प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।
किसानों और व्यापारियों पर क्या असर पड़ेगा?
कृषि पंपों के लिए बिजली दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। हालांकि सरकार का दावा है कि विभिन्न योजनाओं और सब्सिडी के माध्यम से किसानों को राहत दी जाएगी।
दूसरी ओर, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और छोटे कारोबारियों को बढ़ी हुई दरों का सीधा असर झेलना पड़ सकता है। व्यापारिक संगठनों ने भी बिजली दरों में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की है।
बिजली वितरण लागत बढ़ने का तर्क
आयोग के अनुसार बिजली वितरण कंपनी को एक यूनिट बिजली उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में औसतन 7.13 रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि उसे प्रति यूनिट केवल 6.71 रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
बढ़ती उत्पादन लागत, कोयले की कीमतों और वितरण खर्चों को देखते हुए आयोग ने सीमित दर वृद्धि को आवश्यक बताया है।
जनता और विपक्ष के बीच बढ़ी बहस
Chhattisgarh Electricity Tariff Hike अब केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। जहां कांग्रेस इसे जनता पर बोझ बता रही है, वहीं सरकार और आयोग का दावा है कि अधिकांश उपभोक्ताओं को राहत योजनाओं का लाभ मिलता रहेगा।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
Chhattisgarh Electricity Tariff Hike को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक माहौल गर्म है। कांग्रेस जहां इसे जनविरोधी फैसला बताकर प्रदेशव्यापी आंदोलन कर रही है, वहीं सरकार और नियामक आयोग का दावा है कि अधिकांश उपभोक्ताओं पर इसका असर सीमित रहेगा। 1 जुलाई से नई दरें लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिजली दरों में बढ़ोतरी का वास्तविक प्रभाव आम जनता, किसानों और व्यापारियों पर कितना पड़ता है।
