Bhojraj Nag Rain Claim को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में बुधवार को नई चर्चा शुरू हो गई। कांकेर से भाजपा सांसद भोजराज नाग ने बालोद जिले के डौंडीलोहारा में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दावा किया कि उन्होंने बूढ़ादेव और महादेव से प्रार्थना कर नींबू काटा और बारिश रुक गई।
यह बयान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में दिए गए कार्यक्रम के दौरान सामने आया। सांसद के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और बहस तेज हो गई है।
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नींबू काटकर बारिश रोकने का दावा
डौंडीलोहारा में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पहुंचे थे। यह कार्यक्रम महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त जारी करने से जुड़ा था।
सांसद भोजराज नाग ने मंच से खराब मौसम का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे का प्रोटोकॉल रात करीब 12 बजे आया था। उस समय मौसम खराब था और बारिश की आशंका बनी हुई थी।
नाग ने कहा कि उन्होंने बूढ़ादेव और महादेव से प्रार्थना की तथा नींबू काटा, जिसके बाद बारिश रुक गई और मुख्यमंत्री का कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित हो सका।
उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि अब कार्यक्रम सफल हो चुका है, इसलिए अगर बारिश होनी है तो हो सकती है। उनके इस बयान पर मंच पर मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया।
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Bhojraj Nag Rain Claim पर CM साय भी हंसे
सांसद के बयान के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समेत मंच पर मौजूद अन्य नेताओं के मुस्कुराने और हंसने का वीडियो भी सामने आया है।
बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे सांसद की व्यक्तिगत आस्था से जोड़कर देखा, जबकि कई यूजर्स ने दावे का मजाक उड़ाया।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि बारिश रुकने को नींबू काटने या किसी अनुष्ठान से जोड़ने के दावे का कोई वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। मौसम में बदलाव प्राकृतिक और वायुमंडलीय परिस्थितियों से संबंधित होता है।
Bhojraj Nag Rain Claim पर कांग्रेस का तंज
सांसद के बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भोजराज नाग के दावे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर नींबू काटने से बारिश रुक सकती है, तो उन्हें महंगाई कम करने के लिए भी यही तरीका आजमाना चाहिए।
बैज ने सांसद पर दिखावे और अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने महंगाई और शक्कर की कीमतों का जिक्र करते हुए सांसद के बयान को राजनीतिक व्यंग्य का विषय बनाया।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक बहस में भी आ गया है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने बिजली बिल, पेट्रोल-डीजल और घरेलू खर्च कम करने के लिए भी इसी तरीके का इस्तेमाल करने पर तंज कसा।
पहले भी नींबू और झाड़-फूंक वाले बयान
भोजराज नाग पहले भी नींबू, झाड़-फूंक और कथित रूप से ‘भूत उतारने’ जैसे बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले उन्होंने जनसमस्याओं पर कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों को लेकर भी ‘नींबू काटने’ की बात कही थी। उस बयान को लेकर भी उनकी आलोचना हुई थी।
ताजा Bhojraj Nag Rain Claim ने उनके पुराने बयानों को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, वर्तमान मामले में सांसद ने अपने बयान को धार्मिक आस्था और कार्यक्रम के संदर्भ में रखा।
आस्था और वैज्ञानिक दावे के बीच बहस
भारत में धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यताओं का सार्वजनिक जीवन में अपना स्थान है। लेकिन जब किसी प्राकृतिक घटना के कारण को किसी विशेष उपाय से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता है, तो उसके वैज्ञानिक आधार पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बारिश मौसम विज्ञान से जुड़ी प्राकृतिक प्रक्रिया है। वर्षा का होना या रुकना बादलों की स्थिति, नमी, तापमान, वायुदाब और अन्य वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
इसलिए सांसद के बयान को उनका व्यक्तिगत दावा मानना उचित है, न कि बारिश रोकने की प्रमाणित वैज्ञानिक विधि के रूप में।
कार्यक्रम के बीच बयान बना चर्चा का विषय
डौंडीलोहारा का कार्यक्रम मूल रूप से महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त से जुड़ा था। मुख्यमंत्री साय की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
लेकिन सांसद के बारिश रोकने वाले दावे का वीडियो वायरल होने के बाद कार्यक्रम से ज्यादा चर्चा इसी बयान की होने लगी। राष्ट्रीय और स्थानीय मीडिया में भी इसे प्रमुखता से रिपोर्ट किया गया है।
Bhojraj Nag Rain Claim ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। कांकेर सांसद ने डौंडीलोहारा में दावा किया कि बूढ़ादेव और महादेव से प्रार्थना कर नींबू काटने के बाद बारिश रुक गई। मुख्यमंत्री के सामने दिए गए इस बयान पर मंच पर हंसी का माहौल बना, जबकि कांग्रेस ने इसे लेकर तीखा तंज कसा। वैज्ञानिक दृष्टि से बारिश रुकने को नींबू काटने से जोड़ने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। फिलहाल सांसद का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
