नई दिल्ली | 16 जून 2026: One lakh government schools closed — यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा व्यवस्था पर एक गंभीर चेतावनी है। नीति आयोग (NITI Aayog) की हाल ही में जारी रिपोर्ट — ‘स्कूल शिक्षा प्रणाली: टेम्पोरल एनालिसिस एंड पॉलिसी रोडमैप’ — में यह खुलासा किया गया है कि 2014 से 2024 के बीच देश में करीब एक लाख सरकारी स्कूल बंद हो गए। इस दौरान स्कूलों में बच्चों का नामांकन 26.95 करोड़ से घटकर 24.69 करोड़ रह गया — यानी 2.26 करोड़ बच्चे शिक्षा से दूर हो गए।
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One Lakh Government Schools Closed — NITI Aayog का चौंकाने वाला खुलासा
नीति आयोग ने पिछले सप्ताह यह रिपोर्ट जारी की जिसमें 2014-15 से 2024-25 तक के स्कूली शिक्षा के आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले एक दशक में देश में सरकारी स्कूलों की संख्या में भारी कमी आई है।
यह रिपोर्ट न सिर्फ स्कूलों के बंद होने का आंकड़ा सामने रखती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि इसका सीधा असर बच्चों के स्कूल छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दर पर पड़ा है।
10 साल में कितने स्कूल बंद हुए? पूरे आंकड़े
सरकारी स्कूल 2014-15
11.07 लाख
सरकारी स्कूल 2024-25
10.13 लाख
सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल
83,000 → 79,000
निजी स्कूल (वृद्धि)
2.88 → 3.39 लाख
जबकि सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या घटी, वहीं निजी स्कूलों की संख्या में 51,000 की वृद्धि हुई — जो यह दर्शाता है कि शिक्षा का निजीकरण तेज़ी से बढ़ रहा है।
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2.26 करोड़ बच्चों का नामांकन क्यों घटा?
रिपोर्ट के अनुसार, 2014-15 में जहां 26.95 करोड़ बच्चे स्कूलों में नामांकित थे, 2024-25 में यह संख्या घटकर 24.69 करोड़ रह गई। नीति आयोग ने इस गिरावट के लिए कई कारण गिनाए हैं:
- जनसांख्यिकीय बदलाव — घटती जन्म दर से स्कूल उम्र के बच्चों की संख्या में कमी
- स्कूल विलय (School Consolidation) नीति का दुष्प्रभाव
- माध्यमिक स्तर पर शिक्षा में बच्चों को बनाए रखने की चुनौती
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One Lakh Government Schools Closed — स्कूल विलय नीति और उसके खतरनाक नतीजे
क्या है स्कूल कंसोलिडेशन नीति?
केंद्र सरकार और नीति आयोग ने राज्यों को निर्देश दिया है कि कम नामांकन वाले स्कूलों को पास के अन्य स्कूलों में मिला दें ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके। इसे “स्कूल कंसोलिडेशन” या स्कूल विलय कहा जाता है।
शिक्षा अधिकार मंच के समन्वयक और शिक्षा कार्यकर्ता मित्र रंजन ने इस नीति की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा — “स्कूलों का विलय ही बच्चों के नामांकन में भारी गिरावट का सबसे बड़ा कारण है। जब नज़दीकी स्कूल बंद हो जाता है तो कई बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि अकेले उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में मिलकर करीब 40,000 स्कूलों का विलय हो चुका है — जो इस संकट की गंभीरता दर्शाता है।
ड्रॉपआउट दर की भयावह तस्वीर — कक्षा 9-10 सबसे संकट में
NITI Aayog की रिपोर्ट बताती है कि स्कूल छोड़ने की समस्या सबसे तीखी माध्यमिक स्तर (कक्षा 9-10) पर है:
प्राथमिक स्तर ड्रॉपआउट
0.3%
उच्च प्राथमिक ड्रॉपआउट
3.5%
माध्यमिक स्तर ड्रॉपआउट
11.5%
यानी जैसे-जैसे बच्चे ऊंची कक्षाओं में जाते हैं, पढ़ाई छोड़ने की दर तेज़ी से बढ़ती है। उच्च प्राथमिक से माध्यमिक में जाने वाले बच्चों की ट्रांज़िशन दर 2014-15 के 91.58% से गिरकर 2024-25 में 86.6% रह गई।
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राज्यवार ट्रांज़िशन रेट — कौन आगे, कौन पीछे?
रिपोर्ट में राज्यवार ट्रांज़िशन दर (उच्च प्राथमिक से माध्यमिक में जाने वाले बच्चों का प्रतिशत) का भी विश्लेषण किया गया है:
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
पुदुच्चेरी — 99.6%
केरल — 99.6%
चिंताजनक राज्य
मेघालय — 65% | बिहार — 66.7%
मध्य प्रदेश — 77.8% | UP — 78.1%
झारखंड — 81.3%
गणित में कमज़ोर बच्चे — शिक्षा की जड़ में समस्या
रिपोर्ट में एक और चिंताजनक तथ्य सामने आया है — माध्यमिक स्तर पर बच्चे पढ़ाई में पिछड़ रहे हैं। कक्षा 9 के छात्र बीजगणित, ज्यामिति और प्रमेयों जैसे उन्नत विषयों से ही नहीं, बल्कि प्रतिशत, भिन्न और अनुपात जैसी बुनियादी गणित से भी जूझ रहे हैं।
रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि “प्रारंभिक वर्षों में सीखने की जो कमी रह जाती है, वह ऊंची कक्षाओं तक ठीक नहीं होती।” यह शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी खामी की ओर इशारा करता है।
SDG 2030 का लक्ष्य खतरे में — One Lakh Government Schools Closed का असर
विश्वव्यापी प्रतिबद्धता vs. ज़मीनी हकीकत
भारत ने सतत विकास लक्ष्य (SDG) के तहत 2030 तक सार्वभौमिक स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है। लेकिन शिक्षाविद मित्र रंजन ने स्पष्ट चेतावनी दी है:
“स्कूलों का विलय, सार्वभौमिक शिक्षा के उद्देश्य को ही पराजित करता है। One lakh government schools closed होने की इस स्थिति में भारत SDG 2030 का लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता।”
— मित्र रंजन, समन्वयक, राइट टू एजुकेशन फोरम
NITI Aayog की यह रिपोर्ट देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक खतरे की घंटी है। One lakh government schools closed होने की सच्चाई यह बताती है कि स्कूल विलय की नीति ने लाखों बच्चों को शिक्षा से वंचित किया है। 2.26 करोड़ बच्चों का नामांकन घटना, माध्यमिक स्तर पर 11.5% ड्रॉपआउट और SDG 2030 लक्ष्य से बढ़ती दूरी — ये सब मिलकर सरकार को तत्काल नीतिगत सुधार की मांग करते हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भारत का शिक्षा संकट और गहरा होता जाएगा।
