US Iran Conflict एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रारंभिक युद्धविराम (सीज़फायर) समझौते के बावजूद अमेरिका ने रविवार को ईरान के कई सैन्य ठिकानों और निगरानी ढांचे पर नए हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार यह कार्रवाई ईरान द्वारा कथित रूप से संघर्षविराम का उल्लंघन करने और वाणिज्यिक जहाजों पर ड्रोन हमलों के जवाब में की गई।
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US Iran Conflict में अमेरिका ने किए नए हवाई हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य निगरानी केंद्रों, मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों तथा तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाया।
CENTCOM के अनुसार, ईरान को संघर्षविराम का पालन करने का अवसर दिया गया था। लेकिन ईरानी बलों द्वारा कथित तौर पर एकतरफा ड्रोन हमले में M/T Kiku नामक तेल टैंकर को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की।
अमेरिका का कहना है कि यह हमला वाणिज्यिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया।
ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि यदि ईरान अपनी गतिविधियां नहीं रोकता, तो अमेरिका सैन्य अभियान को और आगे बढ़ाने के लिए मजबूर हो सकता है।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे तो अमेरिका “अपने शुरू किए गए मिशन को सैन्य रूप से पूरा करने” के लिए मजबूर होगा।
हालांकि, इस बयान पर ईरान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
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US Iran Conflict के बीच लेबनान में भी बढ़ा तनाव
इस क्षेत्रीय तनाव के बीच लेबनान के दक्षिणी शहर नबातियेह अल-फौका पर इज़रायली ड्रोन और हवाई हमलों की भी खबर सामने आई है।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि दो अन्य घायल हो गए।
इस बीच लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत कर दक्षिणी लेबनान में इज़रायल द्वारा कब्जे वाले क्षेत्रों से वापसी सुनिश्चित कराने में अमेरिकी सहयोग की उम्मीद जताई।
उन्होंने कहा कि लेबनान भी फ्रेमवर्क समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सीज़फायर के बावजूद क्यों बना हुआ है तनाव?
अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक संघर्षविराम समझौते के बाद उम्मीद थी कि क्षेत्र में हालात सामान्य होंगे, लेकिन हालिया घटनाओं ने तनाव को फिर बढ़ा दिया है।
अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने संघर्षविराम का उल्लंघन किया, जबकि ईरान पहले ही अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा चुका है। ऐसे में दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकालते हैं, तो पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
वर्तमान स्थिति में अमेरिका, ईरान, इज़रायल और लेबनान के बीच बढ़ता तनाव पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा के लिए चुनौती बना हुआ है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास तेज हो सकते हैं, लेकिन यदि सैन्य कार्रवाई जारी रही तो क्षेत्रीय तनाव और गहरा सकता है।
US Iran Conflict एक बार फिर ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां सीज़फायर के बावजूद सैन्य कार्रवाई जारी है। अमेरिका के नए हमले, राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी और लेबनान-इज़रायल सीमा पर बढ़ते तनाव ने पश्चिम एशिया की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक प्रयास सफल होंगे या US Iran Conflict एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव में बदल सकता है।
