सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व IAS अधिकारी अनिल तुतेजा की गिरफ्तारी पर ED को लगाई फटकार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल तुतेजा की गिरफ्तारी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताई है। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और एजी मसीह की पीठ ने कहा कि तुतेजा की गिरफ्तारी में इतनी जल्दबाजी “निंदनीय” है।

कोर्ट ने उठाए सवाल:
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया, “आधी रात को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की इतनी जल्दी क्यों थी? वह कोई आतंकवादी नहीं थे। क्या यह इतना जरूरी था?” अदालत ने ED से पूछा कि 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तुतेजा के खिलाफ पहली कार्यवाही रद्द करने के केवल तीन दिन बाद 11 अप्रैल को नए मामले के लिए क्या अतिरिक्त साक्ष्य थे।

ED का पक्ष:
एएसजी एसवी राजू ने कहा कि ED को आशंका थी कि तुतेजा नोटिस से बचने के लिए भूमिगत हो सकते हैं। ED ने दावा किया कि नए मामले का आधार छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और अलग आरोपों पर आधारित सबूत हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने ED को निर्देश दिया कि वह यह स्पष्ट करे कि दूसरे मामले के लिए क्या अतिरिक्त सामग्री उपलब्ध थी। अदालत ने कहा, “पहले मामले को रद्द करने के बाद नए मामले को दर्ज करने के लिए ठोस आधार दिखाना आवश्यक है।

8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने अनिल तुतेजा और अन्य के खिलाफ ED की पूरी कार्यवाही को खारिज कर दिया था, क्योंकि यह आयकर विभाग की कार्यवाही पर आधारित थी, जो मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (PMLA) के तहत “अनुसूचित अपराध” की श्रेणी में नहीं आती। इसके बावजूद, ED ने 11 अप्रैल को नया मामला दर्ज किया और 20 अप्रैल को तुतेजा को गिरफ्तार कर लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को शुक्रवार तक स्थगित कर दिया है और ED को निर्देश दिया है कि वह सभी प्रश्नों का उत्तर प्रस्तुत करे।