रायपुर-बिलासपुर प्रगति-50 (Raipur Bilaspur Pragati-50) कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर को देश के मॉडल स्वच्छ शहरों के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत इस पहल के लिए दोनों नगर निगमों का चयन किया है। इसके तहत कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक शौचालय, सीवेज निपटान और शहरों के सौंदर्यीकरण सहित कई क्षेत्रों में तय समय-सीमा के भीतर सुधार करना होगा।
हालांकि, इस योजना के साथ नगर निगमों के सामने वित्तीय चुनौती भी खड़ी हो सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम के लिए केंद्र से अलग अतिरिक्त फंड नहीं मिलेगा। ऐसे में दोनों नगर निगमों को अपनी आय और दूसरे उपलब्ध वित्तीय स्रोतों के जरिए जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करनी होगी।
रायपुर-बिलासपुर प्रगति-50 में शामिल, सात दिन में बनेगी टीम
केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने देश के 24 राज्यों के 50 शहरों को प्रगति-50 पहल के लिए चुना है। इनमें छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर भी शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य शहरों में स्वच्छता के बेहतर मानक स्थापित करना और तकनीक आधारित निगरानी के जरिए काम की गति बढ़ाना है।
कार्यक्रम के तहत दोनों शहरों में सात दिनों के भीतर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में निकाय स्तरीय टीम गठित करनी होगी। इसके बाद 15 दिनों में वार्डवार सफाई व्यवस्था का आकलन किया जाएगा। इस आकलन के आधार पर 30 दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करनी होगी।
कार्ययोजना में छह महीने, 12 महीने और 24 महीने के लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। रेलवे कॉलोनियों, औद्योगिक क्षेत्रों और नगर निगम सीमा से जुड़े अन्य इलाकों में भी स्वच्छता मानकों को लागू करने के लिए संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
छह महीने में कचरा प्रबंधन सुधारने का लक्ष्य
Raipur Bilaspur Pragati-50 के शुरुआती छह महीनों में घर-घर कचरा संग्रहण को 100 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही कम से कम 50 प्रतिशत कचरे का स्रोत पर पृथक्करण सुनिश्चित करना होगा। यानी घरों और प्रतिष्ठानों में गीले तथा सूखे कचरे को अलग-अलग जमा करने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी।
कचरा संग्रहण वाहनों की डिजिटल ट्रैकिंग भी जरूरी होगी। बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों और निर्माण कार्यों से निकलने वाले अपशिष्ट का 100 प्रतिशत निस्तारण करना होगा। इसके अलावा कम से कम एक आरआरआर केंद्र स्थापित करना होगा, जहां रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा सके।
बाजार, बस स्टैंड, अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में रात के समय सफाई और दिन में दो बार कचरा संग्रहण की व्यवस्था करनी होगी। पुराने डंपसाइट पर जमा कचरे का कम से कम 75 प्रतिशत उपचार करना होगा। इन स्थलों पर नए कचरे की डंपिंग रोकने और कचरा संवेदनशील स्थानों को समाप्त करने पर भी जोर रहेगा।
सार्वजनिक शौचालयों को नियमित रूप से चालू रखना, फुटपाथों को निर्माण मलबे से मुक्त करना और शहरों के सौंदर्यीकरण के काम भी इस अभियान का हिस्सा होंगे।
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48 संकेतकों से होगी Raipur Bilaspur Pragati-50 की निगरानी
दोनों शहरों की प्रगति स्वच्छतम पोर्टल पर 48 प्रमुख संकेतकों के आधार पर मापी जाएगी। इसके लिए अलग-अलग स्तरों पर नियमित समीक्षा की व्यवस्था होगी। निकाय स्तर पर हर सप्ताह, राज्य स्तर पर प्रत्येक 15 दिन और राष्ट्रीय स्तर पर मासिक या द्वि-मासिक समीक्षा की जाएगी।
सिर्फ अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही काम का मूल्यांकन नहीं होगा। आंकड़ों का स्वतंत्र मैदानी सत्यापन भी किया जाएगा। निर्धारित समय-सीमा में अनिवार्य लक्ष्य पूरे नहीं होने पर नकारात्मक अंकन का प्रावधान रखा गया है। इससे दोनों नगर निगमों पर तय समय में काम पूरा करने का दबाव रहेगा।
यूजर चार्ज बढ़ा तो आम लोगों पर पड़ेगा असर?
इस कार्यक्रम की सबसे अहम चुनौती वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था है। स्वच्छता पर होने वाले खर्च का कम से कम 15 प्रतिशत यूजर चार्ज से वसूलने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में नगर निगमों को अपनी आय बढ़ाने के लिए मौजूदा शुल्क व्यवस्था की समीक्षा करनी पड़ सकती है।
फिलहाल रायपुर में घरों से कचरा संग्रहण के बदले घरेलू उपभोक्ताओं से 40 से 80 रुपये प्रतिमाह और व्यावसायिक दुकानों से 180 से 700 रुपये प्रतिमाह तक यूजर चार्ज लिया जा रहा है। यदि इन दरों में बढ़ोतरी की जाती है, तो इसका सीधा असर आम नागरिकों और कारोबारियों की जेब पर पड़ सकता है। हालांकि, शुल्क बढ़ाने का कोई अंतिम निर्णय अभी स्पष्ट नहीं है।
फंड जुटाने के लिए कई विकल्पों पर निर्भरता
Raipur Bilaspur Pragati-50 के तहत नगर निगम स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0, अपनी आय, 16वें वित्त आयोग के अनुदान, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और अर्बन चैलेंज फंड जैसे स्रोतों से संसाधन जुटा सकते हैं।
इसका मतलब है कि दोनों शहरों को स्वच्छता के लक्ष्य पूरे करने के साथ-साथ खर्च का प्रबंधन भी करना होगा। कचरा संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण, सीवेज व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से निवेश करना जरूरी होगा।
रायपुर और बिलासपुर के सामने दोहरी चुनौती
प्रगति-50 में शामिल होना रायपुर और बिलासपुर के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन दिखाने का अवसर है। लेकिन इस पहल की सफलता केवल योजनाएं बनाने से नहीं, बल्कि जमीन पर नियमित सफाई, कचरे के वैज्ञानिक निपटान और नागरिक सुविधाओं में वास्तविक सुधार से तय होगी।
दोनों नगर निगमों को एक ओर निर्धारित समय में 48 संकेतकों पर बेहतर प्रदर्शन करना होगा, वहीं दूसरी ओर वित्तीय संसाधनों का संतुलन भी बनाए रखना होगा। Raipur Bilaspur Pragati-50 तभी सफल माना जाएगा, जब शहरों की सफाई व्यवस्था में स्थायी सुधार हो और इसका आर्थिक बोझ आम नागरिकों पर अनावश्यक रूप से न पड़े।
