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छत्तीसगढ़ में ईसाई परिवारों की बेदखली के आरोप, कांकेर-सुकमा में चिंता

छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में ईसाई परिवारों को उनके धार्मिक विश्वास के कारण घरों से बेदखल करने और उनके मकानों को नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं। कांकेर और सुकमा जिलों से जुड़े इन मामलों ने धार्मिक स्वतंत्रता, संपत्ति की सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन घटनाओं का विवरण अंतरराष्ट्रीय संगठन इंटरनेशनल क्रिश्चियन कंसर्न (ICC) की 27 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में प्रकाशित हुआ है। International Christian Concern

1. Chhattisgarh Christian Families: कांकेर में बेदखली का आरोप

रिपोर्ट के अनुसार, 24 अक्टूबर 2026 को कांकेर जिले के चिंडपाल गांव में एक ईसाई परिवार को कथित तौर पर उसके घर से बाहर कर दिया गया। यह गांव दुर्गूकोंदल क्षेत्र के अंतर्गत बताया गया है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि परिवार द्वारा अपना ईसाई धर्म छोड़ने से इनकार करने के बाद उसके घर का सामान बाहर फेंक दिया गया। इस घटना के संबंध में उपलब्ध सामग्री में पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया, दर्ज एफआईआर या प्रशासनिक जांच के निष्कर्षों का विवरण नहीं दिया गया है।

इसलिए मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है। यदि किसी परिवार को उसकी धार्मिक मान्यताओं के कारण जबरन बेदखल किया गया है, तो यह उसकी सुरक्षा और कानूनी अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है।

2. Chhattisgarh Christian Families: सुकमा में भी घरों को नुकसान

कांकेर की घटना से करीब दस दिन पहले सुकमा जिले के देवरपल्ली गांव में भी इसी तरह की घटना होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह गांव गोरगुंडा पंचायत क्षेत्र में स्थित है।

आरोप है कि पहले एक पादरी के घर की टिन की छत हटाई गई। इसके बाद दो ईसाई परिवारों के चार घरों की छतें भी हटा दी गईं। इससे प्रभावित परिवारों के सामने रहने और अपने सामान को सुरक्षित रखने का संकट पैदा हो गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन परिवारों पर अपनी ईसाई आस्था छोड़कर पुराने धार्मिक रीति-रिवाजों को अपनाने का दबाव था। हालांकि, इन विशिष्ट घटनाओं पर स्थानीय पुलिस या जिला प्रशासन की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच के जरिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि घटनाओं में कौन शामिल था, क्या शिकायत दर्ज कराई गई और प्रभावित परिवारों को सुरक्षा या राहत मिली अथवा नहीं।

3. धार्मिक आस्था और आदिवासी परंपराओं के बीच विवाद

छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में कुछ विवाद पारंपरिक रीति-रिवाजों और व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सामने आते रहे हैं। ICC की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ गांवों में सामूहिक धार्मिक कार्यक्रमों, पारंपरिक पूजा और अंतिम संस्कार संबंधी रस्मों में भागीदारी को लेकर तनाव पैदा होता है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ ईसाई परिवारों द्वारा पारंपरिक अनुष्ठानों में भाग नहीं लेने पर उनका विरोध किया जाता है। कहीं सामाजिक बहिष्कार तो कहीं घर छोड़ने का दबाव होने के आरोप लगाए गए हैं।

हालांकि, आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान और किसी व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता एक-दूसरे के विरोध में होना जरूरी नहीं है। विवाद की स्थिति में हिंसा, धमकी या जबरन बेदखली के बजाय कानून और संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए।

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4. Chhattisgarh Christian Families और संवैधानिक अधिकार

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता तथा धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने का अधिकार देता है। यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य और संविधान में निर्धारित अन्य प्रावधानों के अधीन है।

किसी व्यक्ति की धार्मिक मान्यताओं को लेकर विवाद होने पर भी उसके साथ कानून के अनुसार व्यवहार किया जाना चाहिए। किसी परिवार को धमकाना, उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या उसे जबरन घर से निकालना उचित नहीं है।

संबंधित आधिकारिक स्रोत: भारत का संविधान — विधायी विभाग

5. प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

कांकेर और सुकमा की घटनाओं के संबंध में प्रमुख सवाल यह है कि प्रभावित परिवारों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखे, आरोपों की निष्पक्ष जांच करे और जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षा उपलब्ध कराए।

साथ ही, सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। किसी संगठन की रिपोर्ट या शिकायत को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।

छत्तीसगढ़ में मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े अन्य मामलों पर भी समाचार प्रकाशित हुए हैं। हालांकि, प्रत्येक मामले के तथ्य और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। The Independent+1

संबंधित खबर: [Link: छत्तीसगढ़ में धार्मिक स्वतंत्रता और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी खबर]

Chhattisgarh Christian Families को मिले सुरक्षा और न्याय

कांकेर के चिंडपाल और सुकमा के देवरपल्ली गांव से सामने आए आरोप गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि धार्मिक आस्था के कारण परिवारों को घरों से निकाला गया या उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

Chhattisgarh Christian Families से जुड़े इन मामलों में प्राथमिकता प्रभावित परिवारों की सुरक्षा, रहने की व्यवस्था, संपत्ति के अधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। धार्मिक स्वतंत्रता, आदिवासी संस्कृति का सम्मान और सामाजिक सद्भाव साथ-साथ सुरक्षित रहना चाहिए।

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