Chhattisgarh High Court ने RTI से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पूर्व कर्मचारी को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने जांजगीर-चांपा फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह बर्खास्त किए गए पूर्व कर्मचारी अकरम खान को उसकी विभागीय जांच से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए।
यह आदेश 31 अगस्त 2026 को पारित किया गया। कोर्ट ने माना कि जिन दस्तावेजों की मांग की गई थी, वे कर्मचारी की अपनी बर्खास्तगी और उसके खिलाफ हुई विभागीय कार्रवाई से सीधे जुड़े थे। इसलिए उन्हें RTI Act की बताई गई छूट के आधार पर रोकना उचित नहीं था।
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कर्मचारी ने RTI में क्या मांगा था?
अकरम खान जांजगीर स्थित फैमिली कोर्ट में ड्राइवर के पद पर कार्यरत थे। उनके खिलाफ कथित कदाचार और सात आरोपों को लेकर दो विभागीय जांच शुरू की गई थीं।
इन जांचों के बाद 5 जनवरी 2021 को फैमिली कोर्ट, जांजगीर-चांपा के प्रधान न्यायाधीश ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। खान ने इस फैसले को विभागीय अपील के जरिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष चुनौती दी।
खान का कहना था कि विभागीय जांच के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित और निष्पक्ष अवसर नहीं दिया गया।
इसी कारण उन्होंने जांच से जुड़े दस्तावेज RTI के जरिए मांगे। विशेष रूप से उन्होंने ऑफिस मेमो नंबर 443/Two-12-21/2020 की पूरी नोटशीट मांगी थी, जिसके आधार पर उनकी सेवा समाप्ति का आदेश पारित किया गया था।
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Chhattisgarh High Court ने क्या कहा?
RTI आवेदन को लोक सूचना अधिकारी ने 15 जनवरी 2021 को खारिज कर दिया था। इसके बाद उनकी पहली अपील भी 10 मार्च 2021 को खारिज हुई।
इसके बाद खान ने छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के समक्ष दूसरी अपील दायर की, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। आयोग ने 28 जनवरी 2022 को अपील खारिज कर दी।
मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर Chhattisgarh High Court ने दस्तावेजों की प्रकृति और RTI Act के तहत लगाई गई छूटों की समीक्षा की।
कोर्ट ने पाया कि मांगी गई जानकारी न तो गोपनीय थी, न किसी तीसरे पक्ष से संबंधित थी और न ही किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ इस्तेमाल के लिए मांगी गई थी। ये दस्तावेज खुद कर्मचारी की बर्खास्तगी को चुनौती देने के लिए जरूरी थे।
कोर्ट ने माना कि जानकारी मांगने का उद्देश्य उच्च अधिकारी के समक्ष अपने मामले की प्रभावी पैरवी और बचाव करना था।
RTI की धाराओं पर कोर्ट की टिप्पणी
अधिकारियों ने सूचना रोकने के लिए RTI Act की धारा 8(1)(c) और 8(1)(j) का सहारा लिया था।
RTI Act की धारा 8 में कुछ परिस्थितियों में सूचना देने से छूट का प्रावधान है। India Code के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी धारा 8 को सूचना के प्रकटीकरण से संबंधित exemptions के रूप में दर्ज किया गया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में मांगी गई जानकारी का संबंध संसद या राज्य विधानमंडल के विशेषाधिकार के उल्लंघन से नहीं था। इसी तरह यह किसी तीसरे व्यक्ति की निजी जानकारी भी नहीं थी, जिससे उसकी निजता का अनुचित उल्लंघन हो।
कोर्ट ने इसलिए माना कि संबंधित RTI छूट इन दस्तावेजों पर लागू नहीं होती।
विभागीय कार्रवाई पर भी उठे सवाल
Chhattisgarh High Court ने मामले की सुनवाई के दौरान विभागीय प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण पहलू पर भी टिप्पणी की।
कोर्ट ने गौर किया कि जिस प्राधिकारी ने खान की सेवा समाप्ति का आदेश पारित किया था, उसी प्राधिकारी ने उनकी पहली अपील पर भी फैसला किया था।
हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को निष्पक्ष कार्यवाही के अनुरूप नहीं माना। कोर्ट के अनुसार, जिस अधिकारी ने मूल बर्खास्तगी आदेश पारित किया, उसी के स्तर पर पहली अपील का निर्णय होना निष्पक्ष प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर सवाल खड़ा करता है।
इसके अलावा कोर्ट ने लोक सूचना अधिकारी, प्रथम अपीलीय प्राधिकारी और द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी के आदेशों को RTI Act की धारा 8 के विपरीत माना और तीनों आदेशों को निरस्त कर दिया।
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अब कर्मचारी को कब मिलेंगे दस्तावेज?
हाईकोर्ट ने लोक सूचना अधिकारी को निर्देश दिया कि आवश्यक शुल्क जमा करने के बाद अकरम खान को उनके द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
अदालत ने कहा कि जानकारी जल्द से जल्द दी जानी चाहिए और बेहतर होगा कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जाएं।
यह फैसला उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है, जहां किसी कर्मचारी को अपनी ही सेवा संबंधी कार्रवाई या विभागीय जांच को चुनौती देने के लिए संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की जरूरत होती है।
Chhattisgarh High Court का यह फैसला RTI के जरिए अपने ही सेवा रिकॉर्ड और विभागीय कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज हासिल करने के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी जानकारी को केवल सामान्य RTI exemptions का हवाला देकर नहीं रोका जा सकता, खासकर जब दस्तावेज आवेदक को अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ प्रभावी बचाव के लिए चाहिए हों। अब जांजगीर-चांपा फैमिली कोर्ट के संबंधित अधिकारी को निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क के बाद मांगी गई जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
