Durg POCSO Case में दुर्ग की विशेष POCSO अदालत ने गुरुवार को 24 वर्षीय दोषी को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने छह साल की बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या के अपराध को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” यानी अत्यंत दुर्लभ श्रेणी का अपराध माना।
अदालत ने दोषी को POCSO Act की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत मौत की सजा सुनाई। दोनों धाराओं के तहत 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
इसके अलावा, सबूत नष्ट करने के मामले में BNS की धारा 238(a) के तहत पांच वर्ष के कठोर कारावास और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा दी गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
महत्वपूर्ण: मौत की सजा का अंतिम क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की पुष्टि के बाद ही कानून के अनुसार संभव होगा।
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छह साल की बच्ची की हत्या का मामला
यह मामला 6 अप्रैल 2025 का है। छह साल तीन महीने की बच्ची दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र से लापता हो गई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल तलाश शुरू की।
तलाश के दौरान बच्ची एक वाहन के अंदर मिली। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग पुलिस ने विशेष टीम गठित की और जांच में वैज्ञानिक एवं फोरेंसिक साक्ष्यों पर विशेष ध्यान दिया।
Durg POCSO Case में वैज्ञानिक जांच अहम
Durg POCSO Case की जांच में पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित करने के साथ कई तरह के साक्ष्य जुटाए। इनमें जैविक, चिकित्सकीय, भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शामिल थे।
जांच टीम ने बच्ची के कपड़े, स्वैब, बाल और नाखून से संबंधित नमूने सुरक्षित किए। इन नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। इसके साथ ही DNA प्रोफाइलिंग के लिए भी नमूने लिए गए।
पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र से CCTV फुटेज तथा DVR भी जब्त किए। बरामद सामग्री को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजकर वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया।
जांच के दौरान आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी के मेमोरेंडम स्टेटमेंट के आधार पर कुछ वस्तुएं बरामद कीं और उसके कपड़ों सहित अन्य सामग्री की भी वैज्ञानिक जांच कराई।
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आरोपी को किन धाराओं में सजा मिली?
अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने DNA रिपोर्ट, फोरेंसिक निष्कर्ष, मेडिकल साक्ष्य, CCTV फुटेज और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को प्रस्तुत किया।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। पुलिस के अनुसार, केस केवल मौखिक या परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित नहीं था, बल्कि जांच के शुरुआती चरण से जुटाए गए फोरेंसिक, जैविक, मेडिकल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का संयोजन महत्वपूर्ण रहा।
भारत के आधिकारिक India Code के अनुसार POCSO Act की धारा 6 aggravated penetrative sexual assault के लिए कठोर सजा का प्रावधान करती है।
वहीं BNS की धारा 103(1) हत्या के लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान करती है।
अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और बच्ची की कम उम्र को देखते हुए यौन अपराध से जुड़ी अनावश्यक विस्तृत जानकारी को अपने फैसले में दोहराने से परहेज किया।
पीड़ित परिवार को 7 लाख रुपये मुआवजा
अदालत ने पीड़ित परिवार के लिए भी राहत का आदेश दिया है। राज्य की पीड़ित मुआवजा योजना के तहत बच्ची के परिवार को 7 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है।
यह सहायता परिवार को अपराध के बाद उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने में आर्थिक मदद देने के उद्देश्य से है।
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मौत की सजा पर हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी
Durg POCSO Case में विशेष अदालत द्वारा मौत की सजा सुनाया जाना मामले का महत्वपूर्ण न्यायिक चरण है, लेकिन यह सजा अंतिम रूप से लागू होने से पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की पुष्टि की प्रक्रिया से गुजरेगी।
BNS और अन्य आपराधिक कानूनों के तहत मौत की सजा से जुड़े मामलों में निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाता है। इसलिए विशेष अदालत का फैसला आने के बाद भी आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।
दुर्ग पुलिस के अनुसार, मामले की जांच विशेष टीम ने की। राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिलीवार ने अदालत में पक्ष रखा।
Durg POCSO Case में विशेष POCSO अदालत का फैसला बेहद गंभीर अपराध के खिलाफ कड़ा न्यायिक कदम है। छह साल की बच्ची की दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत ने उपलब्ध वैज्ञानिक, मेडिकल, DNA और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना और अपराध को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी में रखते हुए मौत की सजा सुनाई। हालांकि, इस सजा की पुष्टि अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।
