06 अगस्त 2026 | रायपुर। DMF Scam को लेकर छत्तीसगढ़ में जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार चर्चा में है। जिला खनिज संस्थान न्यास (District Mineral Foundation-DMF) के फंड में कथित तौर पर करोड़ों रुपये के गबन और कमीशनखोरी के आरोपों की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) तथा राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो-आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ACB-EOW) कर रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार, खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बने इस फंड में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इन आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया जारी है और अंतिम दोष तय होना अभी बाकी है।
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DMF Scam क्या है?
DMF (District Mineral Foundation) एक गैर-लाभकारी ट्रस्ट है, जिसे खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाया गया है।
इस फंड में खनन कंपनियों द्वारा रॉयल्टी का एक हिस्सा जमा किया जाता है। इसका उपयोग सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, आजीविका और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया जाना होता है।
इसी फंड के उपयोग में कथित अनियमितताओं को लेकर DMF Scam की जांच शुरू हुई।
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DMF फंड का उद्देश्य क्या था?
DMF का उद्देश्य उन गांवों और समुदायों का विकास करना है, जो खनन गतिविधियों से सीधे प्रभावित होते हैं।
फंड का उपयोग मुख्य रूप से इन कार्यों के लिए किया जाता है—
- स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
- शिक्षा और स्कूलों का विकास
- पेयजल एवं स्वच्छता
- ग्रामीण सड़क और आधारभूत ढांचा
- आजीविका एवं सामाजिक कल्याण योजनाएं
लेकिन जांच एजेंसियों का आरोप है कि कई स्थानों पर इन परियोजनाओं में वित्तीय अनियमितताएं हुईं।
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DMF Scam में कथित तौर पर कैसे हुआ घोटाला?
जांच एजेंसियों के अनुसार, DMF Scam में ठेके और आपूर्ति कार्यों के बदले 25% से 40% तक कथित कमीशन वसूले जाने का आरोप है।
जांच में कथित तौर पर निम्न तरीके सामने आए हैं—
- फर्जी बिल और वाउचर का उपयोग
- ठेकों में कथित कमीशन व्यवस्था
- फर्जी भुगतान और एंट्री
- कथित हवाला (Accommodation Entries) के जरिए धन का लेन-देन
एजेंसियों का आरोप है कि इन तरीकों से खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए आवंटित धन का एक हिस्सा कथित रूप से गलत तरीके से निकाला गया।
### कोरबा जिले में कितना बड़ा था DMF फंड?
उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार, कोरबा जिले में वित्तीय वर्ष 2022-23 तक DMF के तहत ₹1,000 करोड़ से ₹2,000 करोड़ से अधिक का आवंटन हुआ था।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी अवधि के दौरान फंड के उपयोग में कथित वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के कथित दुरुपयोग की जांच की जा रही है।
किन अधिकारियों के नाम जांच में आए?
जांच एजेंसियों द्वारा जिन प्रमुख व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई या जांच की जानकारी सार्वजनिक हुई है, उनमें—
- पूर्व कोरबा कलेक्टर रानू साहू
- पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चौरसिया
- सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अनिल टुटेजा
शामिल हैं।
इसके अलावा हाल के महीनों में रायपुर, बिलासपुर, धमतरी सहित कई जिलों में आपूर्तिकर्ताओं, ठेकेदारों और कथित बिचौलियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई।
ध्यान दें: संबंधित मामलों में न्यायालयों में सुनवाई जारी है। कुछ आरोपियों को निचली अदालतों और उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली थी, जबकि कुछ सह-आरोपियों एवं पूर्व अधिकारियों को बाद में सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिली। जमानत का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है।
DMF Scam का खनन प्रभावित क्षेत्रों पर असर
यदि जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका सबसे अधिक प्रभाव उन लोगों पर पड़ा होगा जिनके लिए यह फंड बनाया गया था।
खनन प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर इसका असर पड़ सकता है। इसलिए जांच एजेंसियां पूरे मामले में धन के प्रवाह और कथित अपराध से अर्जित संपत्ति का आकलन कर रही हैं।
DMF Scam छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित आर्थिक मामलों में से एक बन गया है। ED और ACB-EOW की जांच में कथित कमीशनखोरी, फर्जी बिलिंग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच जारी है। कई वरिष्ठ अधिकारी और अन्य लोग जांच के दायरे में हैं। हालांकि, मामले में अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा। जब तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक सभी आरोप जांच और अदालत के विचाराधीन हैं।
