District Reserve Guard के जवानों पर बड़ा हमला

District Reserve Guard के चार जवान छत्तीसगढ़ के कांकेर-नारायणपुर सीमा क्षेत्र में IED ब्लास्ट की चपेट में आकर शहीद हो गए। यह हादसा शनिवार को डिमाइनिंग और एरिया डोमिनेशन ऑपरेशन के दौरान हुआ।

घटना के बाद पूरे पुलिस विभाग और राज्य में शोक की लहर फैल गई। सुरक्षा बलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन और सतर्कता बढ़ा दी है।

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कांकेर-नारायणपुर सीमा पर IED ब्लास्ट

पुलिस अधिकारियों के अनुसार District Reserve Guard की टीम छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के सीमावर्ती इलाकों में सर्चिंग और डिमाइनिंग मिशन पर निकली थी।

इस दौरान जवानों को माओवादियों द्वारा पहले से लगाया गया एक IED मिला। सुरक्षा बल उसे निष्क्रिय करने की कोशिश कर रहे थे, तभी अचानक विस्फोट हो गया।

धमाका इतना तेज था कि तीन जवानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य जवान ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।


District Reserve Guard के डिमाइनिंग ऑपरेशन में हुआ हादसा

कांकेर जिले के पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने बताया कि District Reserve Guard की टीम लगातार इलाके को सुरक्षित बनाने के लिए अभियान चला रही थी।

ऑपरेशन का उद्देश्य सीमा क्षेत्र को सैनिटाइज करना और माओवादियों द्वारा लगाए गए विस्फोटकों को हटाना था।

हालांकि, IED को निष्क्रिय करने के दौरान विस्फोट हो गया और यह दुखद हादसा सामने आया।

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शहीद जवानों की पहचान

इस हादसे में शहीद हुए District Reserve Guard के जवानों में इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, आरक्षक कृष्णा कोमरा और संजय गढ़पाले शामिल हैं।

वहीं गंभीर रूप से घायल आरक्षक परमानंद कोमरा को रायपुर रेफर किया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई।

चारों जवानों की शहादत ने पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर दिया है।


CM विष्णुदेव साय ने जताया गहरा दुख

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने District Reserve Guard के जवानों की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहीद जवानों के परिवारों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि दी।

सरकार ने घायल जवानों के इलाज और परिवारों को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है।


Bastar Range में लगातार बरामद हो रहे IED

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा कि हाल के महीनों में सुरक्षा बलों ने सैकड़ों IED बरामद कर उन्हें निष्क्रिय किया है।

इन अभियानों में आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से मिली खुफिया जानकारी अहम भूमिका निभा रही है।

उन्होंने बताया कि District Reserve Guard और अन्य सुरक्षा बल लगातार हाई अलर्ट पर काम कर रहे हैं।

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District Reserve Guard की भूमिका क्यों अहम

नक्सल विरोधी अभियानों की मजबूत ताकत

District Reserve Guard छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों की सबसे अहम इकाइयों में से एक मानी जाती है।

इस फोर्स में स्थानीय युवाओं और क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों से परिचित जवानों को शामिल किया जाता है। इससे जंगलों में ऑपरेशन चलाने में मदद मिलती है।

स्थानीय जानकारी से मिलती है बढ़त

DRG जवान इलाके की भाषा, संस्कृति और भौगोलिक स्थिति को बेहतर तरीके से समझते हैं। यही वजह है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।


सुरक्षा बलों के सामने बढ़ती चुनौती

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में माओवादी लगातार IED का इस्तेमाल कर सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

सड़क किनारे, जंगलों और संवेदनशील इलाकों में विस्फोटक छिपाकर हमले किए जाते हैं। ऐसे में District Reserve Guard की जिम्मेदारी और जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं।

सुरक्षा एजेंसियां लगातार नई तकनीकों और रणनीतियों के जरिए इन चुनौतियों से निपटने का प्रयास कर रही हैं।

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शहादत को सलाम

चारों जवानों की शहादत को लेकर पूरे राज्य में लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। सोशल मीडिया पर भी नागरिकों ने जवानों के साहस और बलिदान को सलाम किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हमले सुरक्षा बलों के मनोबल को कमजोर नहीं कर सकते और नक्सल विरोधी अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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District Reserve Guard के चार जवानों की शहादत छत्तीसगढ़ के लिए बेहद दुखद क्षण है। कांकेर-नारायणपुर सीमा पर डिमाइनिंग ऑपरेशन के दौरान हुआ यह हादसा एक बार फिर नक्सल प्रभावित इलाकों में मौजूद खतरे को उजागर करता है।

इसके बावजूद सुरक्षा बल लगातार साहस और प्रतिबद्धता के साथ अभियान चला रहे हैं। राज्य सरकार और पूरा छत्तीसगढ़ शहीद जवानों के बलिदान को हमेशा याद रखेगा। District Reserve Guard के जवानों का यह सर्वोच्च बलिदान नक्सल विरोधी लड़ाई में प्रेरणा का प्रतीक बनेगा।

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