Ranya Rao जेल से रिहा: ₹12.56 करोड़ के सोना तस्करी मामले में 1 साल बाद मिली आज़ादी

Ranya Rao, जिनका असली नाम हर्षवर्धिनी रण्या है, कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की एक जानी-मानी अभिनेत्री हैं।

33 वर्षीया यह अभिनेत्री अपने फिल्मी करियर के लिए नहीं बल्कि एक हाई-प्रोफाइल सोना तस्करी मामले के कारण पिछले एक साल से चर्चा में रही हैं।

बुधवार, 23 अप्रैल 2026 को Ranya Rao को मैसूरु सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया, जब COFEPOSA अधिनियम के तहत उनकी एक साल की निवारक नजरबंदी की अवधि समाप्त हो गई।


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गिरफ्तारी की पूरी कहानी

3 मार्च 2025 — बेंगलुरु एयरपोर्ट पर हुई धरपकड़

Ranya Rao को 3 मार्च 2025 को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वे दुबई से लौट रही थीं।

राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) के अनुसार, उनके पास से 14.2 किलोग्राम विदेशी मूल की सोने की छड़ें बरामद हुईं, जिनकी कुल कीमत ₹12.56 करोड़ आंकी गई थी।

यही नहीं, उनके घर की तलाशी में ₹2.06 करोड़ के सोने के गहने और ₹2.67 करोड़ की भारतीय मुद्रा भी जब्त की गई।

सह-आरोपियों की गिरफ्तारी

गिरफ्तारी के 6 दिन बाद, 9 मार्च को तरुण कोंदुरु राजू उर्फ विराट कोंदुरु (36), जो अमेरिकी नागरिक हैं, को तस्करी में कथित सहयोग के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

26 मार्च को साहिल साकरिया जैन (27), बल्लारी के एक जौहरी, को गिरफ्तार किया गया। उन पर तस्करी के सोने को ठिकाने लगाने और हवाला लेनदेन में मदद करने का आरोप लगाया गया।

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COFEPOSA क्या है और क्यों लगाया गया?

COFEPOSA अधिनियम 1974 — एक कड़ा कानून

COFEPOSA (Conservation of Foreign Exchange and Prevention of Smuggling Activities Act, 1974) एक कठोर निवारक नजरबंदी कानून है।

इस कानून के तहत सरकार किसी व्यक्ति को बिना जमानत के 1 साल तक हिरासत में रख सकती है, यदि उसे राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाए।

[DoFollow External Link: COFEPOSA Act 1974 – India Code – https://www.indiacode.nic.in/handle/123456789/1533]

तीनों आरोपियों पर COFEPOSA का इस्तेमाल

मई 2025 में विशेष आर्थिक अपराध न्यायालय ने Ranya Rao और तरुण राजू को ₹2 लाख के निजी बॉन्ड पर जमानत दी थी।

लेकिन केंद्र सरकार ने अप्रैल 2025 में ही COFEPOSA लागू कर दिया था, जिससे जमानत के बावजूद सभी तीनों आरोपी हिरासत में बने रहे।

COFEPOSA सलाहकार बोर्ड की सिफारिश

जुलाई 2025 में COFEPOSA सलाहकार बोर्ड ने धारा 8 के तहत तीनों की नजरबंदी जारी रखने की सिफारिश की, यह कहते हुए कि इससे आगे की तस्करी गतिविधियों को रोकने में मदद मिलेगी।


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Ranya Rao की रिहाई कैसे हुई?

22 अप्रैल 2026 — एक साल की नजरबंदी समाप्त

Ranya Rao को 22 अप्रैल 2026 को मैसूरु सेंट्रल जेल से रिहा किया गया, जब उनकी COFEPOSA नजरबंदी की अवधि पूरी हो गई।

DRI ने स्पष्ट किया कि वह नजरबंदी की समाप्ति को चुनौती नहीं देगा और विस्तार की मांग नहीं करेगा।

मीडिया से बचकर निकलीं Ranya Rao

रिहाई के बाद Ranya Rao ने मीडिया से पूरी तरह किनारा किया और अपने वकील की गाड़ी में जेल परिसर से रवाना हो गईं।

मामले में अगली सुनवाई 16 मई को निर्धारित है।


सह-आरोपियों पर क्या हुई कार्रवाई?

Ranya Rao के अलावा उनके दोनों सह-आरोपी — तरुण कोंदुरु राजू और साहिल साकरिया जैन — भी COFEPOSA की नजरबंदी अवधि समाप्त होने के बाद रिहा हो गए हैं।

हालाँकि, तीनों की रिहाई के बावजूद, DRI, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा बड़े सोना तस्करी नेटवर्क की जांच अभी भी जारी है।

जांच के दौरान यह सामने आया कि तरुण राजू ने दुबई के रास्ते अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सोने की आवाजाही की सुविधा दी, जबकि जैन ने भारत के भीतर इसे ठिकाने लगाने का काम किया।


IPS पिता रामचंद्र राव का विवादास्पद किरदार

Ranya Rao की गिरफ्तारी और उनके IPS पिता

Ranya Rao वरिष्ठ IPS अधिकारी के. रामचंद्र राव की सौतेली बेटी हैं, जो इस मामले के कारण गंभीर विवाद में फंस गए।

जांच के दौरान रामचंद्र राव से पूछताछ की गई — उन पर आरोप था कि उन्हें इन गतिविधियों की जानकारी थी और उनकी सरकारी गाड़ी का कथित रूप से इस्तेमाल किया गया।

निलंबन और पुनर्स्थापना का क्रम

Ranya Rao की गिरफ्तारी के बाद रामचंद्र राव को अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया गया।

अगस्त 2025 में उन्हें नागरिक अधिकार प्रवर्तन निदेशालय में DGP के पद पर बहाल कर दिया गया।

हालाँकि, बाद में एक अलग विवाद — कथित अवैध संबंध — के चलते उन्हें फिर से निलंबित कर दिया गया। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए एक वरिष्ठ IAS अधिकारी की अगुवाई में विशेष टीम गठित की, जिसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा चुकी है।


जांच का दायरा: 100 किलो से अधिक सोने की तस्करी?

Ranya Rao और बड़ा तस्करी नेटवर्क

जांच में सामने आया कि यह तीनों किसी बड़े सिंडिकेट का हिस्सा थे, जिसने 2024 से 2025 के बीच 100 किलोग्राम से अधिक सोना भारत में तस्करी से लाया।

DRI के अनुसार, साहिल जैन ने 49.6 किलोग्राम सोने को ठिकाने लगाने में मदद की, जिसकी कीमत लगभग ₹40 करोड़ आंकी गई।

Ranya Rao पर हवाला लेनदेन में जैन के साथ मिलीभगत का भी आरोप है।

Karnataka High Court ने खारिज की याचिका

दिसंबर 2025 में Karnataka High Court ने Ranya Rao की माँ द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उनकी रिहाई की माँग की गई थी।


Ranya Rao की रिहाई के बाद अगला कदम

Ranya Rao की रिहाई के बाद भी उनकी कानूनी मुसीबतें खत्म नहीं हुई हैं।

DRI, ED और CBI की जांच अभी भी जारी है। मामले में Customs Act की धारा 135 के तहत आपराधिक मुकदमा भी चल रहा है।

अगली सुनवाई 16 मई को है, जिसमें मामले की आगे की दिशा तय होगी।


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Ranya Rao का मामला भारत में सोना तस्करी के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक बन गया है।

एक साल की कठोर COFEPOSA नजरबंदी के बाद Ranya Rao भले ही जेल से बाहर आ गई हों, लेकिन उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा, DRI-ED-CBI की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी लंबी चलने वाली है।

इस मामले ने न केवल फिल्म इंडस्ट्री बल्कि पुलिस प्रशासन में भी हलचल मचाई है। Ranya Rao प्रकरण यह साफ संदेश देता है कि देश में सोना तस्करी और हवाला नेटवर्क के खिलाफ सरकार का रुख कितना कड़ा है।

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