Dantewada — जो कभी माओवादी हिंसा के लिए जाना जाता था — अब क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की उपस्थिति से जगमगा उठा है। 22 अप्रैल 2026 को सचिन तेंदुलकर ने Dantewada जिले के छिंदनार गाँव में ‘मैदान कप’ पहल के तहत एक कार्यक्रम में भाग लिया।
भारत रत्न से सम्मानित तेंदुलकर का यह दौरा इस कार्यक्रम का हिस्सा था। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनके दौरे का स्वागत करते हुए इसे बस्तर के “डर से विकास की ओर” बदलाव का प्रतीक बताया।
तेंदुलकर पहले जगदलपुर हवाई अड्डे पर पहुँचे और वहाँ से Dantewada के छिंदनार गाँव गए, जहाँ उन्होंने मैदान कप कार्यक्रम में बच्चों के साथ समय बिताया।
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‘मैदान कप’ — क्या है यह अनूठी पहल?
‘मैदान कप’ एक ऐसी पहल है जो Dantewada के नक्सल प्रभावित गाँवों में वंचित बच्चों को खेल के ज़रिए आगे बढ़ने का मंच प्रदान करने के लिए शुरू की गई है।
इस प्रतियोगिता के तहत Dantewada जिले के 50 गाँवों में 50 खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं, जहाँ बंजर ज़मीन को खेल के मैदानों में बदला जा रहा है।
यह पहल जिला प्रशासन, मन्न देशी फाउंडेशन और सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र की संघर्षग्रस्त छवि को बदलकर खेल संस्कृति को बढ़ावा देना है।
Dantewada में 50 खेल मैदान — कैसे बने?
Dantewada में मैदान कप के पहले चरण का लक्ष्य सरकारी स्कूलों — हाई स्कूल, हायर सेकेंडरी स्कूल और पोर्टा केबिन संस्थाओं — में 50 खेल मैदान विकसित करना था।
प्रत्येक मैदान स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री और सामुदायिक भागीदारी का उपयोग करते हुए 4 लाख रुपये से कम की लागत पर विकसित किया गया है।
मैदानों की बाउंड्री दीवारें स्थानीय बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग से सजाई गई हैं, जो इन्हें एक अनूठी पहचान देती हैं और बच्चों में स्वामित्व व गर्व की भावना जगाती हैं।
छिंदनार सहित कई गाँवों में मैदान पूरी तरह तैयार हो चुके हैं।
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सचिन तेंदुलकर ने Dantewada के बच्चों को दी अनमोल सीख
सचिन तेंदुलकर ने Dantewada के छिंदनार गाँव में स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम हाई स्कूल में एक मल्टी-स्पोर्ट्स मैदान का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर तेंदुलकर ने बच्चों को समझाया कि सफलता के लिए कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास ज़रूरी है, और लक्ष्य पाने का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने बच्चों को सलाह दी कि वे अच्छे दोस्त चुनें और अच्छे इंसान बनने की कोशिश करें।
सचिन ने कार्यक्रम में कहा, “जब हमें पता चला कि यहाँ कोई खेल सुविधा या मैदान नहीं है, तो मुझे अपना बचपन याद आ गया। मेरी यात्रा भी एक मैदान से ही शुरू हुई थी।”
Dantewada का बदलता चेहरा — नक्सल से खेल तक
Dantewada का नाम कभी माओवादी आतंक और हिंसा से जुड़ा था। 2010 में पड़ोसी सुकमा जिले के तड़मेटला में हुए भीषण हमले में 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे।
31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त घोषित किया गया। इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद Dantewada जैसे इलाकों में विकास की नई राह खुली है।
मैदान कप का व्यापक प्रभाव संघर्ष क्षेत्रों में अपराध दर को खेल कार्यक्रमों के ज़रिए लगभग 20 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखता है।
जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि यह पहल “बचपन को वापस दिलाने” और खेल के माध्यम से युवाओं के लिए नए रास्ते खोलने की कोशिश है।
मैदान कप से 5,000 से अधिक बच्चों को फायदा
Dantewada में हो रही मैदान कप प्रतियोगिता मन्न देशी और सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन के समर्थन से 5,000 से अधिक बच्चों को लाभान्वित कर रही है।
तेंदुलकर ने जगदलपुर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “मुझे बहुत खुशी है कि हमने मैदान कप पहल के तहत लगभग 50 स्कूल खेल मैदान विकसित किए हैं।”
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “22 अप्रैल हमेशा से खास रहा है। आज अलग ही महसूस हो रहा है। हम सब एक यादगार हाफ सेंचुरी मनाने के लिए उत्साहित हैं — बच्चों, समुदायों और गाँवों के एकजुट होने की हाफ सेंचुरी।”
Dantewada में 13 खेल विधाओं की सुविधा
Dantewada के इन मैदानों में केवल क्रिकेट नहीं, बल्कि 13 विभिन्न खेल विधाओं की सुविधाएँ बनाई गई हैं।
इनमें रनिंग ट्रैक, शॉट पुट, भाला फेंक, चक्का फेंक, लंबी कूद, दीवार चढ़ाई, कबड्डी, खो-खो, एथलेटिक्स और वॉलीबॉल जैसी प्रतियोगिताएँ शामिल हैं।
यह विविधता सुनिश्चित करती है कि हर बच्चे को उसकी पसंद और प्रतिभा के अनुसार खेलने का मौका मिले।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की सचिन के दौरे की तारीफ
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सचिन तेंदुलकर के Dantewada दौरे को गर्व की बात बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने मैदान कप अभियान को आदिवासी क्षेत्रों में खेल बुनियादी ढाँचे के लिए एक दूरदर्शी कदम बताया।
साय ने X (ट्विटर) पर लिखा कि यह दौरा बस्तर के डर से विकास की ओर बदलाव को दर्शाता है और स्थानीय समुदायों में अवसर और आत्मविश्वास जगाता है।
Dantewada का यह सफर — नक्सल हिंसा के अंधेरे से खेल के उजाले की ओर — वास्तव में प्रेरणादायक है। सचिन तेंदुलकर की उपस्थिति ने यहाँ के बच्चों को सिर्फ खेल मैदान नहीं, बल्कि एक सपना दिया है। 50 मैदान, 5,000 से अधिक बच्चे और 13 खेल विधाएँ — Dantewada अब सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उम्मीद और बदलाव का प्रतीक बन रहा है। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र से निकलने वाले युवा खिलाड़ी देश और दुनिया में Dantewada का नाम रोशन करेंगे।
