NavDrishti Foundation के माध्यम से भिलाई के वैशाली नगर में एक ऐसी हृदयस्पर्शी घटना घटी जिसने पूरे समाज को प्रेरणा दी। श्री सुबोध कुमार चक्रवर्ती, जिन्होंने तीन वर्ष पूर्व NavDrishti Foundation के माध्यम से देहदान का पवित्र संकल्प लिया था, की सेक्टर 9 हॉस्पिटल में मध्यरात्रि को मृत्यु के बाद उनके परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा किया।
यह घटना न केवल एक परिवार की असाधारण निष्ठा और साहस की कहानी है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए देहदान और नेत्रदान के प्रति जागरूकता का एक शक्तिशाली संदेश भी है।
NavDrishti Foundation की त्वरित और संवेदनशील भूमिका ने यह सुनिश्चित किया कि एक सामाजिक सेवक की अंतिम इच्छा समय पर और गरिमापूर्वक पूरी हो सके।
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तीन साल पुराना संकल्प – सुबोध कुमार चक्रवर्ती की महान अंतिम इच्छा
समाजसेवा को जीवन का उद्देश्य माना
भिलाई के वैशाली नगर निवासी स्वर्गीय श्री सुबोध कुमार चक्रवर्ती ने लगभग तीन वर्ष पूर्व ही यह पवित्र निर्णय ले लिया था कि उनके निधन के बाद उनका शरीर चिकित्सा विज्ञान की सेवा में दान कर दिया जाए। इस संकल्प को उन्होंने NavDrishti Foundation के माध्यम से औपचारिक रूप दिया था।
उनकी पत्नी श्रीमती कल्पिता चक्रवर्ती ने बताया कि उनके पति ने जीवनकाल में सदैव समाज सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। देहदान का संकल्प भी उसी सेवा भावना की अभिव्यक्ति था।
पत्नी ने भी लिया था देहदान का संकल्प
एक अत्यंत प्रेरणादायक तथ्य यह है कि श्रीमती कल्पिता चक्रवर्ती ने भी अपने पति के साथ स्वयं का देहदान करने का संकल्प लिया है। यह दंपति समाज के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करता है — न केवल अपने जीवन में, बल्कि मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का संकल्प।
बेटी ने गुजरात से फोन कर पूरा किया पिता का अधूरा सपना
मध्यरात्रि की खबर और तुरंत लिया गया निर्णय
सेक्टर 9 हॉस्पिटल, भिलाई में मध्यरात्रि को श्री सुबोध कुमार चक्रवर्ती के निधन की सूचना मिलते ही उनकी पुत्री शिल्पी घोष चौधरी ने गुजरात से तत्काल NavDrishti Foundation के सदस्यों को फोन किया। इस कठिन भावनात्मक क्षण में भी उन्होंने अपने पिता की अंतिम इच्छा को सर्वोपरि रखा।
दूरी और दुख के बावजूद शिल्पी की यह तत्परता दर्शाती है कि परिवार ने पहले से ही इस निर्णय को पूरे मन से स्वीकार कर लिया था। यह साहस और संकल्प अपने आप में अत्यंत दुर्लभ और प्रेरणादायक है।
परिवार के तीन सदस्यों की सहमति से हुई प्रक्रिया
देहदान की यह पवित्र प्रक्रिया परिवार के तीन प्रमुख सदस्यों — पुत्री शिल्पी घोष चौधरी, पत्नी श्रीमती कल्पिता चक्रवर्ती और भांजे रंजीत चक्रबोर्ती — की पूर्ण सहमति से संपन्न हुई। यह पारिवारिक एकजुटता और सामूहिक निर्णय समाज के लिए एक बड़ा संदेश है।
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NavDrishti Foundation की भूमिका – मध्यरात्रि में पहुंची सेवा की रोशनी
कुलवंत भाटिया और प्रभु दयाल उजाला की त्वरित प्रतिक्रिया
NavDrishti Foundation के सक्रिय सदस्य श्री कुलवंत भाटिया और श्री प्रभु दयाल उजाला रात को ही वैशाली नगर स्थित निवास पर पहुंचे और देहदान की पूरी प्रक्रिया में परिवार को हर संभव सहयोग प्रदान किया।
NavDrishti Foundation की यह त्वरित और संवेदनशील प्रतिक्रिया इस संगठन की कार्यप्रणाली और समर्पण को दर्शाती है। मध्यरात्रि में भी बिना किसी देरी के पहुंचना यह सिद्ध करता है कि यह संस्था अपने संकल्प के प्रति कितनी गंभीर है।
NavDrishti Foundation ने की चक्रवर्ती परिवार के साहसिक निर्णय की सराहना
NavDrishti Foundation के श्री प्रभु दयाल उजाला ने चक्रवर्ती परिवार के इस साहसिक और पुनीत निर्णय की भूरि-भूरि सराहना की। उन्होंने कहा कि इस परिवार का यह कदम समाज में देहदान और नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज की टीम ने गरिमापूर्वक संपन्न की प्रक्रिया
डॉ. अंजलि वंजारी के निर्देशन में हुआ देहदान
श्री शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजलि वंजारी के कुशल निर्देशन में देहदान की पूरी प्रक्रिया संपन्न की गई। उनकी टीम में संदीप रिशबुड, दीपक रवानी और दयाराम शामिल थे।
इस मेडिकल टीम ने पूरी प्रक्रिया को अत्यंत गरिमापूर्ण, व्यवस्थित और संवेदनशील तरीके से संपन्न किया। NavDrishti Foundation और शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज के बीच यह समन्वय देहदान की प्रक्रिया को सुगम और सम्मानजनक बनाता है।
चिकित्सा विज्ञान को मिलेगा अमूल्य योगदान
स्वर्गीय श्री सुबोध कुमार चक्रवर्ती का यह देह दान चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए अमूल्य शैक्षणिक संसाधन बनेगा। एनाटॉमी विभाग में इस दान से भावी डॉक्टरों की शिक्षा और प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। मृत्यु के बाद भी जीवन देने का यह संकल्प वास्तव में महादान है।
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परिवार की भावुक प्रतिक्रिया – गहरे दुख में भी अपार गर्व
बेटी शिल्पी का भावुक बयान
पुत्री शिल्पी घोष चौधरी ने आंसुओं के बीच कहा कि पिता के निधन से पूरा परिवार गहरे सदमे में है, लेकिन उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करने से उन्हें गर्व और आत्मसंतोष की अनुभूति हो रही है। उनके शब्दों में एक ऐसी दृढ़ता थी जो शोक के बीच भी असाधारण साहस की झलक दिखाती है।
गुजरात में होते हुए भी उन्होंने तत्काल कदम उठाया — यह दर्शाता है कि पिता के संस्कारों ने उन्हें कितना मजबूत बनाया था।
माँ का संदेश – पति की सेवा भावना थी प्रेरणा
श्रीमती कल्पिता चक्रवर्ती ने बताया कि उनके पति ने जीवनभर समाजसेवा को ही अपना धर्म माना। देहदान का संकल्प उनके उसी जीवन-दर्शन का स्वाभाविक विस्तार था। आज उनके परिवार ने अपने मुखिया की इस अंतिम इच्छा का सम्मान कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।
NavDrishti Foundation के सदस्यों ने दी श्रद्धांजलि
NavDrishti Foundation की ओर से बड़ी संख्या में सदस्य चक्रवर्ती परिवार के घर पहुंचे और स्वर्गीय श्री सुबोध कुमार चक्रवर्ती को श्रद्धांजलि अर्पित की। परिवार को इस पुनीत कार्य के लिए साधुवाद और सम्मान दिया।
श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में श्री अनिल बल्लेवार, कुलवंत भाटिया, राज आढ़तिया, प्रवीण तिवारी, मुकेश आढ़तिया, हरमन दुलई, रितेश जैन, राजेश पारख, जितेंद्र हासवानी, मंगल अग्रवाल, किरण भंडारी, उज्जवल पींचा, सत्येंद्र राजपूत, सुरेश जैन, पीयूष मालवीय, दीपक बंसल, विकास जायसवाल, मुकेश राठी, प्रमोद बाघ, सपन जैन, यतीन्द्र चावड़ा, जितेंद्र कारिया, बंसी अग्रवाल, अभिजीत पारख, मोहित अग्रवाल, चेतन जैन, दयाराम टांक, विनोद जैन और राकेश जैन सहित अनेक सदस्य शामिल थे।
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देहदान क्यों है महादान – समाज के लिए NavDrishti Foundation का संदेश
एक देह दान से बचती हैं अनेक जिंदगियाँ
NavDrishti Foundation जैसी संस्थाएं यह सुनिश्चित करती हैं कि देहदान की प्रक्रिया सरल, सम्मानजनक और समय पर हो। देहदान से चिकित्सा विद्यार्थियों को प्रशिक्षण मिलता है और इससे भावी डॉक्टर बेहतर चिकित्सक बनते हैं, जो अंततः लाखों जीवन बचाते हैं।
यही कारण है कि देहदान को महादान कहा जाता है — यह एक ऐसा दान है जो मृत्यु के बाद भी पीढ़ियों तक उपकार करता रहता है।
आप भी ले सकते हैं देहदान का संकल्प
NavDrishti Foundation से संपर्क कर कोई भी व्यक्ति देहदान या नेत्रदान का संकल्प ले सकता है। स्वर्गीय सुबोध कुमार चक्रवर्ती और उनके परिवार की प्रेरणा से यदि समाज में यह जागरूकता बढ़े, तो यही उनके प्रति सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।
NavDrishti Foundation और एक परिवार का अमर संदेश
NavDrishti Foundation के माध्यम से भिलाई के वैशाली नगर में संपन्न यह देहदान केवल एक व्यक्ति की अंतिम इच्छा की पूर्ति नहीं है — यह पूरे समाज के लिए एक अमर प्रेरणा है। स्वर्गीय श्री सुबोध कुमार चक्रवर्ती ने जीते जी जो संकल्प लिया, उनकी बेटी ने गुजरात से फोन करके उसे पूरा किया और उनकी पत्नी ने स्वयं भी यही राह चुनी — यह परिवार समाज के लिए एक आदर्श बन गया है।
NavDrishti Foundation जैसी संस्थाओं का यह पुनीत कार्य भिलाई और छत्तीसगढ़ में देहदान की संस्कृति को मजबूत कर रहा है। आज जरूरत है कि हम सब भी इस प्रेरणा से सीख लें और देहदान तथा नेत्रदान के इस महायज्ञ में अपनी आहुति देने का संकल्प लें।
