Bharatmala Compensation Scam: रायपुर में ED की बड़ी कार्रवाई, जयप्रकाश गांधी गिरफ्तार

Bharatmala Compensation Scam को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर जिले के अभनपुर निवासी जयप्रकाश गांधी को गिरफ्तार किया है। यह मामला भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजे में कथित अनियमितताओं और करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है।

ED ने आरोपी को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। विशेष न्यायालय ने उसे तीन दिन की ED रिमांड पर भेज दिया है। मामले की जांच अभी जारी है।

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भारतमाला मुआवजा घोटाले में ED की कार्रवाई

Bharatmala Compensation Scam की जांच छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई थी।

एफआईआर में रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे।

ED ने इन आरोपों के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की थी।

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कौन हैं जयप्रकाश गांधी?

जयप्रकाश गांधी रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र के निवासी हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने अपने परिवार के कुछ सदस्यों और कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर मुआवजा राशि प्राप्त करने के लिए सुनियोजित तरीके से भूमि का विभाजन किया।

हालांकि आरोपी का पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है और मामले की जांच जारी है।


Bharatmala Compensation Scam में क्या है आरोप?

जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने का आरोप

ED की जांच के अनुसार हाईवे अलाइनमेंट के दायरे में आने वाली भूमि को पहले अधिग्रहित किया गया।

इसके बाद जमीन को 500 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाले छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर दिया गया।

जांच एजेंसी का दावा है कि ऐसा अधिक मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया था।

NHAI से बढ़ा हुआ मुआवजा लेने की योजना

आरोप है कि जमीन का कृत्रिम विभाजन कर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से अधिक मुआवजा प्राप्त किया गया।

ED के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई।

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57 लाख की जगह 9.83 करोड़ रुपये का मुआवजा कैसे मिला?

जांच में सामने आया बड़ा अंतर

Bharatmala Compensation Scam की जांच में सामने आया कि आरोपी और उसके परिवार को वास्तविक रूप से लगभग 56.76 लाख रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए था।

लेकिन कथित तौर पर अपनाई गई प्रक्रिया के कारण लगभग 9.83 करोड़ रुपये का मुआवजा प्राप्त किया गया।

9.27 करोड़ रुपये को माना गया अपराध से अर्जित धन

ED के अनुसार वैध राशि और प्राप्त राशि के बीच करीब 9.27 करोड़ रुपये का अंतर पाया गया।

जांच एजेंसी इसे “अपराध से अर्जित संपत्ति” (Proceeds of Crime) मानकर जांच कर रही है।


ED जांच में क्या-क्या खुलासे हुए?

ED का दावा है कि प्राप्त मुआवजा राशि का एक हिस्सा शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश किया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार इन निवेशों के माध्यम से कथित रूप से धन को वैध दिखाने का प्रयास किया गया।

हालांकि इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।


सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

अप्रैल में हुई थी छापेमारी

इससे पहले 28 अप्रैल को ED ने रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिले के कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था।

तलाशी के दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य साक्ष्य जब्त किए गए थे।

अन्य लोगों पर भी नजर

ED ने संकेत दिए हैं कि मामले में शामिल अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे और कार्रवाई हो सकती है।

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आगे क्या होगी कार्रवाई?

विशेष PMLA न्यायालय ने आरोपी जयप्रकाश गांधी को तीन दिन की ED हिरासत में भेजा है।

इस दौरान जांच एजेंसी वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और अन्य संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच करेगी।

मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के केंद्र में बनी हुई है।


Bharatmala Compensation Scam छत्तीसगढ़ के चर्चित आर्थिक मामलों में से एक बनता जा रहा है। ED का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण मुआवजे में कथित हेराफेरी कर करोड़ों रुपये का अनुचित लाभ प्राप्त किया गया। जयप्रकाश गांधी की गिरफ्तारी के बाद जांच और तेज हो गई है। आने वाले दिनों में Bharatmala Compensation Scam से जुड़े और भी महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं, क्योंकि जांच एजेंसियां अन्य लाभार्थियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।

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