DAP Shortage को लेकर दुर्ग जिले के किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले यूरिया और डीएपी खाद की कमी के कारण किसानों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। कई स्थानों पर खाद वितरण और टोकन व्यवस्था को लेकर भी किसानों में नाराजगी देखी जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न सेवा सहकारी समितियों और खाद वितरण केंद्रों का दौरा किया।
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दुर्ग में DAP Shortage से बढ़ी किसानों की चिंता
खरीफ फसलों की बुवाई का समय नजदीक आते ही किसानों को उर्वरकों की आवश्यकता बढ़ गई है। ऐसे समय में कई सहकारी समितियों में डीएपी और यूरिया की उपलब्धता कम होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
किसानों का कहना है कि पर्याप्त भंडारण नहीं होने के कारण उन्हें खाद लेने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। तेज धूप में लंबी कतारों में खड़े रहने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।
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ताम्रध्वज साहू ने किया सहकारी समितियों का दौरा
पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू ने ग्राम नगपुरा, थनौद, अंडा, कुथरेल, बोरीगारका, मंचादुर और नगर पंचायत उतई सहित कई क्षेत्रों की सेवा सहकारी समितियों का निरीक्षण किया।
दौरे के दौरान उन्होंने समिति प्रबंधकों और किसानों से सीधे चर्चा कर खाद और बीज की उपलब्धता की जानकारी ली।
साहू के साथ कांग्रेस के कई पदाधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
DAP Shortage पर किसानों ने क्या शिकायतें कीं?
खाद का पर्याप्त भंडारण नहीं
किसानों ने बताया कि कई समितियों में डीएपी और यूरिया का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं है। इससे खेती की तैयारियों पर असर पड़ रहा है।
कुछ किसानों का आरोप है कि जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जबकि सरकार पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध होने का दावा कर रही है।
सीमित मात्रा में मिल रही खाद
किसानों के अनुसार कई स्थानों पर प्रति एकड़ केवल 25 किलो डीएपी, एक बोरी यूरिया, पोटाश और अन्य उर्वरक सीमित मात्रा में दिए जा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि यह मात्रा खेती की जरूरतों के मुकाबले काफी कम है।
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DAP Shortage के साथ बीज संकट भी बना चिंता का कारण
किसानों को बीज के लिए भी भटकना पड़ रहा
केवल खाद ही नहीं बल्कि बीज की उपलब्धता को लेकर भी किसानों ने शिकायतें की हैं।
कई समितियों में धान बीज का पर्याप्त भंडारण नहीं होने के कारण किसानों को एक समिति से दूसरी समिति तक जाना पड़ रहा है।
अमानक बीज वितरण के आरोप
कुछ किसानों ने सरना धान बीज के गुणवत्ताहीन और करगा युक्त होने की शिकायत भी की है।
इन शिकायतों ने बीज वितरण व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू ने आरोप लगाया कि राज्य के किसान बुवाई के महत्वपूर्ण समय में खाद संकट का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध होने का दावा कर रही है, जबकि दूसरी ओर जमीनी स्तर पर किसान डीएपी और यूरिया के लिए परेशान हैं।
साहू ने यह भी कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
खाद की नियमित आपूर्ति
किसानों ने मांग की है कि सभी सहकारी समितियों में डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध कराई जाए।
टोकन व्यवस्था में सुधार
किसानों का कहना है कि टोकन वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाना चाहिए ताकि अनावश्यक भीड़ और इंतजार से बचा जा सके।
बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग
किसानों ने उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने और अमानक बीज वितरण की शिकायतों की जांच की भी मांग की है।
DAP Shortage पर प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से खाद संकट की जांच करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि खाद की उपलब्धता के सरकारी दावों के बावजूद किसानों तक पर्याप्त मात्रा में उर्वरक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो किसानों की खरीफ फसल प्रभावित हो सकती है।
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DAP Shortage का मुद्दा दुर्ग जिले सहित कई कृषि क्षेत्रों में किसानों की प्रमुख चिंता बन गया है। खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले खाद और बीज की कमी किसानों की तैयारियों को प्रभावित कर सकती है। किसानों द्वारा उठाई गई शिकायतों और कांग्रेस नेताओं के आरोपों के बीच अब सभी की नजर प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर है। यदि समय रहते DAP Shortage की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इसका सीधा असर खेती और उत्पादन पर पड़ सकता है।
