Encroachment Action: 5 बड़े आरोप, व्यापारियों में गुस्सा

Encroachment Action को लेकर दुर्ग जिले के उतई नगर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में प्रशासन द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद स्थानीय व्यापारियों में गहरा आक्रोश दिखाई दे रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन ने चुनिंदा दुकानदारों को निशाना बनाकर कार्रवाई की, जबकि कई जगहों पर पूरी तरह अवैध निर्माण होने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया। इस पूरे मामले में नगर पंचायत प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई से उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है और यह कार्रवाई पूरी तरह भेदभावपूर्ण लग रही है।
Encroachment Action पर व्यापारियों के गंभीर आरोप

Encroachment Action को लेकर स्थानीय व्यापारी नेता सतीश शांतिमोहन पारख ने प्रशासन को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 19 फरवरी को प्रशासनिक दल पुलिस बल और जनप्रतिनिधियों के साथ बाजार क्षेत्र में पहुंचा। इसके बाद कुछ दुकानों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई।

शिकायत में कहा गया है कि इस कार्रवाई से लगभग दस से बारह व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ। व्यापारियों के अनुसार नुकसान की राशि करोड़ों रुपये से अधिक बताई जा रही है। उनका कहना है कि इनमें से कई दुकानों का आवंटन लगभग पचास से पचपन वर्ष पहले ग्राम पंचायत के समय हुआ था।

व्यापारियों का दावा है कि वे नियमित रूप से किराया भी जमा करते रहे हैं। यहां तक कि नगर पंचायत द्वारा हाल में बढ़ाए गए किराये का भी भुगतान किया जा रहा है। इसके बावजूद अतिरिक्त निर्माण को अतिक्रमण मानकर कार्रवाई की गई।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि कार्रवाई के दौरान कुछ व्यापारियों से दबाव बनाकर खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। उन्हें कहा गया कि तय समय में निर्माण नहीं हटाया गया तो फिर कार्रवाई होगी।

व्यापारियों का कहना है कि यदि प्रशासन ईमानदारी से Encroachment Action करना चाहता है तो उसे सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई करनी चाहिए।

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पुराने आवंटन और नया विवाद

इस विवाद की पृष्ठभूमि कई दशक पुरानी बताई जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि बाजार क्षेत्र में कई दुकानों का आवंटन ग्राम पंचायत के समय हुआ था। उस समय से लेकर आज तक वे लगातार किराया जमा कर रहे हैं।

हालांकि समय के साथ कई दुकानों में अतिरिक्त निर्माण भी हुआ। प्रशासन ने इन्हीं अतिरिक्त हिस्सों को अतिक्रमण बताते हुए कार्रवाई शुरू की।

दूसरी ओर व्यापारियों का आरोप है कि नगर पंचायत कार्यालय के आसपास, पाटन पुल और सद्भावना चौक क्षेत्र में शासकीय जमीन पर बड़े-बड़े निर्माण खड़े हो गए हैं। इन पर अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।

इसी वजह से स्थानीय व्यापारियों में असंतोष बढ़ गया है। उनका कहना है कि अगर कुछ दुकानों पर कार्रवाई हो सकती है, तो अन्य पूरी तरह अवैध कब्जों पर भी समान कार्रवाई होनी चाहिए।


Key Facts – Encroachment Action

  • 19 फरवरी को प्रशासन ने पुलिस बल के साथ बाजार क्षेत्र में Encroachment Action चलाया।
  • कार्रवाई में लगभग 10-12 दुकानों पर तोड़फोड़ की गई।
  • व्यापारियों के अनुसार इससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
  • कई दुकानों का आवंटन लगभग 50-55 वर्ष पहले ग्राम पंचायत समय का बताया जा रहा है।
  • व्यापारियों ने अन्य अवैध निर्माणों पर कार्रवाई न होने का आरोप लगाया।

प्रतिक्रियाएँ

Encroachment Action के बाद स्थानीय बाजार में तनाव का माहौल बन गया है। व्यापारी संगठन और स्थानीय नागरिक इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

व्यापारी नेता सतीश शांतिमोहन पारख ने प्रशासन से सवाल किया है कि अगर अतिरिक्त निर्माण अवैध है, तो पूरी तरह अवैध कब्जों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

उन्होंने कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर अन्य अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रभावित व्यापारी आगे कानूनी और जनआंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

व्यापारियों ने यह भी मांग की है कि शासन के लीज नियमों के तहत सभी कब्जाधारियों को स्थायी आवंटन दिया जाए। इससे नगर पंचायत को नियमित राजस्व मिलेगा और विवाद भी खत्म हो सकता है।

इस मामले की प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, नायब तहसीलदार, एसडीओ पुलिस और थाना प्रभारी को भी भेजी गई है।


कुल मिलाकर Encroachment Action को लेकर उतई नगर में विवाद गहराता जा रहा है। व्यापारी इसे पक्षपातपूर्ण कार्रवाई बता रहे हैं। वहीं प्रशासन की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि आने वाले दिनों में अन्य अवैध निर्माणों पर भी कार्रवाई होती है, तो स्थिति शांत हो सकती है। लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ, तो Encroachment Action को लेकर यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।

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