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हाइकोर्ट कोर्ट ने रद्द किया आरक्षण : छत्तीसगढ़ में हज़ारों भर्तियों पर लगा ग्रहण, इंटरव्यू-भर्ती खटाई में

रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ में आरक्षण पर आये बिलासपुर उच्च न्यायालय के एक फैसले ने युवाओं के भविष्य को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इस फैसले से उपजी नीतिगत उलझन ने सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश का रास्ता रोक दिया है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने राज्य प्रशासनिक सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम रोक दिया है। वहीं राज्य वन सेवा के साक्षात्कार टाल दिये गये हैं। स्कूल में 12 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी खटाई में पड़ती नजर आ रही है।

बता दें छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा के 171 पदों पर इस साल परीक्षा ली थी। मुख्य परीक्षा में सफल 509 लोगों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। यह साक्षात्कार 20 से 30 सितम्बर के बीच चला। वहीं 8 से 21 अक्टूबर तक प्रस्तावित राज्य वन सेवा परीक्षा के साक्षात्कार को टाल दिया गया है। इस परीक्षा से 211 पदों पर भर्ती होनी थी। अधिकारियोें ने बताया, इसके पीछे आरक्षण फैसले से पैदा हुई उलझन ही है। अभी तक की भर्तियों में इस फैसले के आधार पर आरक्षण डिसाइड करने की शर्त लगी रहती थी। अब फैसला आ गया तो कोई यह बताने की स्थिति में नहीं है कि आरक्षण रद्द करने का परिणाम आरक्षण खत्म हो जाना है, अथवा आरक्षण को पिछली स्थिति में लौट जाना है।

इसको तय किये बिना भर्ती कर लेने से अदालत की अवमानना का मामला बन जाएगा। ऐसे में आयोग और दूसरे विभाग भी भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले उच्च न्यायालय के फैसले को स्पष्ट कर लेना चाहते हैं। विधि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सामान्य तौर पर उनका विभाग अदालत के आदेशों की व्याख्या नहीं करता। उनसे ओपिनियन मांगा गया था, विभाग ने अदालत के आदेश पर कार्रवाई की अनुशंसा भेज दी है। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े कानूनी अधिकारी महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा बार-बार पूछने पर भी कोई स्पष्टिकरण नहीं दे रहे हैं।
बिलासपुर उच्च न्यायालय ने गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बनाम राज्य सरकार के मुकदमे में 19 सितम्बर को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस फैसले में अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार के उस कानून काे रद्द कर दिया जिससे आरक्षण की सीमा 58% हो गई थी। सामान्य प्रशासन विभाग ने 29 सितम्बर को सभी विभागों को अदालत के फैसले की कॉपी भेजते हुए उसके मुताबिक कार्रवाई की बात कही। उसी के बाद आरक्षण को लेकर भ्रम की स्थिति निर्मित हो गई।