YUVAN Programme छत्तीसगढ़ में युवाओं को जंगल, वन्यजीव और जैव विविधता से जोड़ने की एक खास पहल बनकर सामने आया है। इस कार्यक्रम ने ऐसे युवाओं की सोच बदलने में मदद की है, जो कुछ समय पहले तक पक्षियों, सांपों और तितलियों की दुनिया से लगभग अनजान थे।
रायपुर के नंदनवन जंगल सफारी से शुरू हुई इस पहल का विस्तार बलौदाबाजार वनमंडल तक हुआ। इसका उद्देश्य युवाओं और प्रकृति के बीच बढ़ती दूरी को कम करना और उन्हें संरक्षण कार्यों में सक्रिय भागीदार बनाना है। छत्तीसगढ़ सरकार के जनसंपर्क पोर्टल ने भी ‘युवान’ को वन, वन्यजीव और जैव विविधता संरक्षण से युवाओं को जोड़ने वाली पहल बताया है।
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YUVAN Programme ने बदली युवाओं की सोच
टिकेश्वर निषाद, कुंभज साहू और नरेंद्र वर्मा जैसे युवाओं की कहानी इस बदलाव को दिखाती है। पहले टिकेश्वर ने ‘बर्ड वॉचिंग’ के बारे में नहीं सुना था। अब वह प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए सक्रिय हैं।
इसी तरह कुंभज साहू पहले सांपों को नुकसान पहुंचाने की सोच रखते थे। YUVAN से जुड़ने के बाद उन्होंने सांपों को बचाने और लोगों को उन्हें नहीं मारने के लिए जागरूक करने का काम शुरू किया।
नरेंद्र वर्मा भी अपने आसपास मौजूद तितलियों की विविधता और उनके व्यवहार को समझने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस तरह कार्यक्रम ने केवल जानकारी नहीं दी, बल्कि युवाओं के व्यवहार में भी बदलाव लाने का प्रयास किया है।
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युवाओं और प्रकृति के बीच दूरी कम करने की कोशिश
YUVAN का नाम Yuva + Van से बना है। कार्यक्रम की मूल सोच यह है कि डिजिटल और तेज रफ्तार जीवन के बीच युवाओं का जंगल और प्राकृतिक दुनिया से संपर्क कमजोर हो रहा है।
पूर्व बलौदाबाजार DFO धम्मशील गणवीर के अनुसार, आज की युवा पीढ़ी व्यावहारिक अनुभवों से अधिक प्रभावी ढंग से सीखती है। इसलिए YUVAN को केवल कक्षा या लंबे व्याख्यान तक सीमित नहीं रखा गया है।
युवाओं को जंगलों में ले जाकर पक्षियों, कीटों, औषधीय पौधों, आर्द्रभूमि, नदियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को करीब से समझने का अवसर दिया जाता है।
YUVAN Programme में प्रैक्टिकल लर्निंग पर जोर
YUVAN Programme की सबसे बड़ी खासियत इसका व्यवहारिक प्रशिक्षण है। युवाओं को संरक्षण के बारे में केवल बताया नहीं जाता, बल्कि उन्हें वास्तविक गतिविधियों में शामिल किया जाता है।
कार्यक्रम में पौधारोपण, सीड बॉल अभियान, आर्द्रभूमि संरक्षण, जैव विविधता का दस्तावेजीकरण और सामुदायिक जागरूकता जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
इससे युवाओं को यह समझने में मदद मिलती है कि जंगल और वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय समुदाय और युवा भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
किन क्षेत्रों में मिल रही ट्रेनिंग?
YUVAN से जुड़े स्वयंसेवकों को कई महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- वन और वन्यजीव संरक्षण
- आर्द्रभूमि संरक्षण
- पक्षी निगरानी और बर्ड वॉचिंग
- जैव विविधता की पहचान और दस्तावेजीकरण
- मानव-वन्यजीव संघर्ष की समझ
- जलवायु परिवर्तन
- इको-टूरिज्म
- सामुदायिक भागीदारी
- नेचर इंटरप्रिटेशन
- वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी
बलौदाबाजार वनमंडल की आधिकारिक पहल में युवाओं को वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा ज्ञान और व्यावहारिक कौशल देने पर जोर दिया गया है।
YUVAN Programme से बन रहे ग्रीन गार्डियन
YUVAN का प्रभाव केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं दिख रहा है। कार्यक्रम से जुड़े युवा अपने आसपास के लोगों को भी प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
टिकेश्वर निषाद द्वारा अवैध पेड़ कटाई रोकने के लिए ग्रामीणों को समझाना और एक प्रवासी पक्षी को शिकारियों से बचाना इसका उदाहरण है। वहीं सांपों को बचाने और उनके प्रति लोगों की सोच बदलने की दिशा में भी स्वयंसेवक काम कर रहे हैं।
कार्यक्रम में वन्यजीव फोटोग्राफी और जैव विविधता दस्तावेजीकरण जैसी क्षमताओं पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे युवाओं के लिए प्रकृति संरक्षण के साथ नई सीख और कौशल के अवसर भी तैयार हो रहे हैं।
जंगल से जुड़ाव का लंबा असर
प्रकृति संरक्षण में केवल नियम और कानून पर्याप्त नहीं होते। स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी और जागरूकता भी जरूरी है। YUVAN इसी सोच को युवाओं के माध्यम से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
सरकारी पहल के तहत छात्रों और युवाओं को कार्यक्रम से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। चयनित स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण और फील्ड विजिट के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण की व्यावहारिक समझ देने की व्यवस्था भी की गई है।
YUVAN Programme छत्तीसगढ़ के युवाओं को प्रकृति के करीब लाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है। टिकेश्वर, कुंभज और नरेंद्र जैसे युवाओं में आया बदलाव बताता है कि जब युवाओं को जंगल और वन्यजीवों को करीब से समझने का अवसर मिलता है, तो उनकी सोच और व्यवहार दोनों बदल सकते हैं।
पक्षी बचाने से लेकर सांपों की सुरक्षा और तितलियों की पहचान तक, YUVAN युवाओं को प्रकृति का दर्शक नहीं बल्कि उसका जिम्मेदार साथी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। आने वाले समय में ऐसे युवा छत्तीसगढ़ के जंगलों और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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