VB-G RAM-G Scheme के तहत दुर्ग जिले में ग्रामीण रोजगार, जल संरक्षण, स्वच्छता और आधारभूत सुविधाओं के विकास को नई गति देने की पहल की जा रही है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में 1 जुलाई 2026 से लागू नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को समयबद्ध रोजगार और मजदूरी भुगतान के साथ गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
जिला प्रशासन के अनुसार, योजना का उद्देश्य केवल मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराना नहीं है। इसके साथ जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका संवर्धन और जलवायु अनुकूल गतिविधियों को बढ़ावा देना भी प्रमुख लक्ष्य है।
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VB-G RAM-G Scheme में मजदूरी भुगतान पर विशेष फोकस
योजना के तहत मजदूरों को मजदूरी का भुगतान SNA यानी सिंगल नोडल अकाउंट के माध्यम से निर्धारित समय-सीमा में किया जा रहा है। राशि सीधे मजदूरों के बैंक अथवा डाकघर खातों में DBT के जरिए भेजी जा रही है।
दुर्ग जिले के तीन जनपद पंचायतों के लिए मजदूरी राशि का प्रावधान किया गया है। पाटन के लिए ₹20.69 लाख, धमधा के लिए ₹35.11 लाख और दुर्ग के लिए ₹44.53 लाख निर्धारित किए गए हैं। इस तरह कुल ₹100.33 लाख की मजदूरी राशि का भुगतान किया जा रहा है।
सीधे खाते में भुगतान होने से व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और मजदूरों को समय पर उनकी मेहनत का पैसा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
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520 निर्माण कार्यों को मिली प्रशासनिक स्वीकृति
VB-G RAM-G Scheme के तहत दुर्ग जिले में कुल 520 निर्माण कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इनमें जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।
स्वीकृत कार्यों में 77 तालाब गहरीकरण, 40 नाली निर्माण, 45 नाला पुनरुद्धार, 5 असफल नलकूपों की रिचार्जिंग और 17 ट्रेंच निर्माण जैसे काम शामिल हैं।
इन कार्यों से ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिलने के साथ गांवों में लंबे समय तक उपयोगी रहने वाली परिसंपत्तियां तैयार होंगी। इससे जल संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
40,254 मानव दिवस रोजगार का सृजन
जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे के अनुसार, नई व्यवस्था में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलेगी। पूर्व व्यवस्था में यह सीमा 100 दिनों तक थी।
रोजगार की मांग ग्राम पंचायत के माध्यम से की जा सकेगी। आवेदन के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
जिले में 1 जुलाई 2026 से अब तक 40,254 मानव दिवस रोजगार का सृजन किया जा चुका है। वहीं SNA के माध्यम से ₹53.29 लाख की मजदूरी राशि का भुगतान भी किया जा चुका है।
VB-G RAM-G Scheme से 29 स्कूलों में बालिका शौचालय
ग्रामीण विकास के साथ स्वच्छता और बालिकाओं के लिए बेहतर सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 और VB-G RAM-G Scheme के अभिसरण से जिले के 29 सरकारी स्कूलों में नए बालिका शौचालय बनाए जाएंगे।
इन कार्यों के लिए कुल ₹126.73 लाख यानी करीब ₹1.27 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। जनपद पंचायत दुर्ग के 5, धमधा के 16 और पाटन के 8 विद्यालयों में एक-एक बालिका शौचालय बनाया जाएगा।
प्रत्येक शौचालय की स्वीकृत लागत ₹4.37 लाख है। इसमें ₹0.90 लाख स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और ₹3.47 लाख VB-G RAM-G योजना के अभिसरण से खर्च किए जाएंगे।
कुल स्वीकृत राशि में ₹26.10 लाख स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), ₹68.15 लाख सामग्री मद और ₹32.48 लाख मजदूरी मद शामिल है।
रोजगार के साथ स्थायी परिसंपत्ति निर्माण
योजना की खासियत रोजगार और विकास को एक साथ आगे बढ़ाना है। तालाब, नाला, ट्रेंच और अन्य जल संरक्षण कार्य भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
इन परिसंपत्तियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, आजीविका के अवसर बढ़ाने और स्थानीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में मदद मिल सकती है।
जिला पंचायत के अनुसार, समयबद्ध मजदूरी भुगतान, अधिक रोजगार दिवस और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण ग्रामीण परिवारों की आय तथा आजीविका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस नीति
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायत से जिला स्तर तक लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि योजना में लापरवाही, अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
VB-G RAM-G Scheme के तहत दुर्ग जिले में रोजगार के साथ जल संरक्षण, स्वच्छता और ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। 520 स्वीकृत कार्य, 40,254 मानव दिवस रोजगार और 29 स्कूलों में बालिका शौचालय निर्माण ग्रामीण विकास की व्यापक तस्वीर पेश करते हैं। समय पर मजदूरी भुगतान और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण से यह पहल ग्रामीण परिवारों की आजीविका मजबूत करने के साथ गांवों को अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मददगार साबित हो सकती है।
